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कुछ होश है श्रीमान?-डॉ आनंद

स्वर्ग और नर्क के अस्तित्व का प्रश्न

डॉ आनंद प्रदीक्षित

क्या स्वर्ग और नर्क वास्तव में हैं ?वर्तमान समाज को देखते हुए तो लगता है कि नहीं, क्योंकि जिन पुराणों और धर्म शास्त्रों में स्वर्ग नरक की कल्पना है उन में यह भी बताया गया है कि स्वर्ग क्या करने से मिलता है और नर्क कौन से पाप करने से भोगना पड़ता है। नर्क के अनेक प्रकार हैं जबकि स्वर्ग एक ही प्रकार का है ।लगता है लोग भगवान को तो मानते हैं ,देवताओं को मानते हैं, देवियों को मानते हैं ,भूत-प्रेत पिशाच को भी मानते हैं, डायन चुड़ैलों को भी मानते हैं ,लेकिन स्वर्ग नर्क हो मानना भूल गए हैं, या उन्होंने जानबूझकर भुला रखा है ।वह अपने धन वैभव के मद में इतने चूर हैं कि धरती पर जो स्वर्ग उन्होंने बसा रखा है उसके आगे उनको वह नर्क नहीं दिखाई देता जो उन्हें भोगना पड़ेगा। यदि आप ईश्वर में विश्वास करते हैं और ईश्वर के आसपास की जो भी उपसत्ता है उसमें विश्वास करते हैं तो आपको स्वर्ग नरक में भी विश्वास करना पड़ेगा और यह भी मानना पड़ेगा कि क्या करने से स्वर्ग मिलता है और क्या करने से नरक मिलता है। सामान्यतया सभी जानते हैं कि क्या पाप है क्या पुण्य हैं ।कोई भी इतना भोला भाला नन्ना मुन्ना नहीं है जो यह ना जानता हो कि वह जो कर रहा है, पाप है या पूण्य। इस हिसाब से देखा जाए तो नर्क ही अंतिम डेस्टिनेशन है क्योंकि हम सब कहीं ना कहीं कुछ ना कुछ ऐसा जरूर कर रहे हैं जिसमें नर्क मिलना अवश्यंभावी है ।कितने समय के लिए मिलेगा किस वैरायटी का मिलेगा या वहां कौन-कौन सी सुविधाएं उपलब्ध होंगी ,किस तरह के तेल में कितनी देर तक तला जाएगा,कौन सी मल मूत्र की नदिया पार करनी पड़ेगी, यह वहां जाकर क्यूआर कोड स्कैन करने के बाद ही पता चलेगा ,जो मरने के तुरंत बाद आत्मा पर अंकित हो जाएगा। चित्रगुप्त उस क्यूआर कोड को स्कैन करके उस तरह के नर्क के दरवाजे खोल देंगे और वहां विभिन्न प्रकार के कढ़ाई और विभिन्न प्रकार की अग्नि हमारी प्रतीक्षा कर रही होगी। अलग-अलग प्रकार के टॉर्चर रूम होंगे और हमारे कर्मों का नाम ले लेकर उन टॉर्चर रूम में हमें धकेला जाएगा और बार-बार टॉर्चर करके पूछा जाएगा "अब तो नहीं करेगा? अब तो नहीं करेगा "और हम चीख कर कहेंगे कि अब कभी नहीं करेंगे लेकिन कोई हमारी सुनने वाला नहीं होगा। ईश्वर ने यह सोचा कि जब लगभग सभी को नर्क जाना ही है तो पहले थोड़ा प्रोबेशन पर रख दिया जाए और नरकवास की प्रैक्टिस करा दी जाए अतः कोरोनावायरस भेज दिया।लोग बिना ऑक्सीजन बिना दवाइयों के तड़प के मर रहे हैं मर कर भी शमशान नसीब नहीं हो रहा है। मुझे लगता है कि नरक के दरवाजों पर भी लंबी लंबी लाइनें लग गई होंगी आत्माओं की, और वहां भी चित्रगुप्त ने काफी बड़ा स्टाफ तैनात कर दिया होगा जिसमें जो कालाबाजारी है मर गए हैं वह लोग वहां भी सीट की कालाबाजारी कर रहे होंगे और कुछ अच्छे कर्म लोगों से अपने नाम करवा रहे होंगे घूस के तौर पर जिससे कि उनका दंड कम हो सके।लोग नर्क में जल्दी से अपने दंड भुगत कर वापस धरती पर किसी योनि में आ जाएं और कर्मानुसार कुत्ता बिल्ली छिपकली बनकर अगला जन्म गुजारे क्योंकि बड़े पाप किए हैं ,किए जा रहे हैं, मानेंगे नहीं ।

खाई है रे हमने कसम पाप करने की ।

छोड़ेंगे नहीं चाहे तले जाएं चाहे रोस्ट किए जाएं चाहे बॉईल किए जाएं या बर्न किए जाएं लेकिन पाप करने में जो आनंद है वह और कहां। उस आनंदको नहीं छोड़ा जा सकता ,अद्भुत है लाजवाब है। पूरा ध्यान केवल धन और सेक्स पर ही रखना है स्वर्ग नरक किसने देखा है ।मजे लो चार्वाक को गुरु बनाओ ।

जय हो ।

अरे अभी सुधर जाओ भाई।


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