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कॉपर निकस- विज्ञान विश्व से साभार


कोपरनिकस के अन्तरिक्ष के बारे में सात नियम जो उसकी किताब में अंकित हैं, इस प्रकार हैं :

1.सभी खगोलीय पिंड किसी एक निश्चित केन्द्र के परितः नहीं हैं।

2.पृथ्वी का केंद्र ब्रह्माण्ड का केन्द्र नहीं है। वह केवल गुरुत्व व चंद्रमा का केन्द्र है।

3. सभी गोले (आकाशीय पिंड) सूर्य के परितः चक्कर लगाते हैं। इस प्रकार सूर्य ही ब्रह्माण्ड का केन्द्र है। (यह नियम असत्य है।)

4. पृथ्वी की सूर्य से दूरी, पृथ्वी की आकाश की सीमा से दूरी की तुलना में बहुत कम है।

5. आकाश में हम जो भी गतियां देखते हैं वह दरअसल पृथ्वी की गति के कारण होता है। (आंशिक रूप से सत्य)

6. जो भी हम सूर्य की गति देखते हैं, वह दरअसल पृथ्वी की गति होती है।

7. जो भी ग्रहों की गति हमें दिखाई देती है, उसके पीछे भी पृथ्वी की गति ही जिम्मेदार होती है।

विशेष बात यह है कि कोपरनिकस ने ये निष्कर्ष बिना किसी प्रकाशिक यंत्र के उपयोग के प्राप्त किए। वह घंटों नंगी आँखों से अन्तरिक्ष को निहारता रहते थे और गणितीय गणनाओं द्वारा सही निष्कर्ष प्राप्त करने की कोशिश करते थे। बाद में गैलिलियो ने जब दूरदर्शी का आविष्कार किया तो उसके निष्कर्षों की पुष्टि हुई।



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