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कोविड पर विज्ञान विश्व से साभार लेख

आज COVID-19 महामारी दुनिया के सभी हिस्सों में फैल चुका है, अब कोरोना वायरस हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली से बचने के लिए नए संस्करण विकसित कर रहा है। 2020 के अंत में यूनाइटेड किंगडम, दक्षिण अफ्रीका और ब्राजील में मिले कोरोना वायरस के नए संस्करण मूल वायरस की तुलना में अधिक संक्रामक हैं।

कोरोना के नए वेरिएंट की उत्पत्ति, पहचान और उसके परिणाम का अध्ययन करके ही स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाया जा सकता है। भारत में विशेषकर महाराष्ट्र ने, COVID-19 के संभावित नए म्यूटेंट की पहचान करने और नए वेरिएंट को समझने के लिए वायरल जीनोम की सिक्वेंसिंग अध्ययन पर ध्यान दिया है।

SARS-CoV-2 अनुसंधान में शामिल कई भारतीय संस्थानों के शोधकर्ताओं ने महाराष्ट्र में प्रवेश करने वाले अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के नमूने प्राप्त किए। परीक्षण में पॉजिटिव पाए गए लगभग 5% सैंपल को अनुक्रमित कर SARS-CoV-2 के पूरे जीनोम साथ ही टीम ने मानव रिसेप्टर (ACE2) के साथ शीर्ष 10 वायरस स्पाइक प्रोटीन म्यूटेशन के क्रिस्टलीय संरचना का विश्लेषण किया गया। शोधकर्ताओं ने यह भी आंकलन करने का प्रयास किया कि वायरस के नए म्युटेशन संरचनाएं दो न्यूट्रिलाइजिंग एंटीबॉडी को बांधने के लिए कितना प्रभावशाली है।

पूरे 598 वायरल जीनोम का विश्लेषण करने के बाद वैज्ञानिकों ने वायरस के 47 प्रजातियों को पाया। लगभग आधे जीनोम अनुक्रम में जो वेरिएंट देखा गया वो वेरिएंट B.1.617 था। कोरोना वायरस के इस B.1.617 वेरिएंट ने अपने स्पाइक प्रोटीन में म्युटेशन कर उसके साथ चार क्लस्टर को विकसित कर लिया था। वैज्ञानिकों ने पाया कि B.1.617 वेरिएंट ने अपने स्पाइक प्रोटीन के रिसेप्टर-बाइंडिंग डोमेन (RBD) में L452R और E484Q नामक म्यूटेंट कर लिया है जबकि RBD के बाहर G142D और P681R जनवरी 2021 से ही इस म्युटेशन में वृद्धि भी देखी गयी है। अन्य कोरोना वायरस म्युटेशन में H1101D और T95I शामिल है जो केवल एक छोटे से अनुपात ने B.1.617 संस्करण में खासकर दिसंबर 2020 में देखे गए थे।

कुछ कोरोना वायरस क्लस्टर ऐसे भी थे जिनमें E484Q म्युटेशन शामिल नही है लेकिन उनके स्पाइक प्रोटीन में T19R और D950N म्यूटेशन मौजूद था। एक उत्परिवर्तन D111D था जो कि RBD म्यूटेशन है लेकिन इस समूह मे L452R और E484Q परिवर्तन नही देखा गया। कुल मिलाकर अब तक के वैज्ञानिक विश्लेषण से पता चलता है कि कोरोना वायरस अपने प्रोटीन अनुक्रम को बदल रहे है।

पश्चिमी महाराष्ट्र मुंबई, पुणे, ठाणे और नासिक जैसी जगहों पर और राज्य के कुछ पूर्वी भाग में देखे गए प्रमुख वेरिएंट B.1.617 है जबकि कुछ अन्य वेरिएंट भी पाए गए है।

E484Q म्यूटेशन RBD में किसी इलेक्ट्रोस्टैटिक बॉन्ड को बांधने से रोकता है जबकि P681R कोशिका झिल्ली से चिपकने में मदद करता है जिससे वायरस की संक्रामकता में वृद्धि होती हैं। पिछले शोधों में भी पाया गया है कि नए म्युटेशन मानव एंटीबॉडी से बच सकते है और संक्रमण को बढ़ाते हैं।

B.1.427, B.1.429 वेरिएंट में L452R नामक म्यूटेंट जो सर्वप्रथम कैलिफोर्निया में रिपोर्ट की गई। E484Q यूनाइटेड किंगडम, दक्षिण अफ्रीका और ब्राजील से रिपोर्ट किए गए वेरिएंट में देखा गया है। वैसे आजकल ट्रिपल वेरिएंट की भी बात हो रही जो मुख्य रूप से L452R, E484Q, और P681R म्युटेशन के संयोजन ही है।

वैज्ञानिक मानते है कि महाराष्ट्र सहित अन्य राज्यो में रिपोर्ट किये जा रहे मामलों में घातीय वृद्धि इस ट्रिपल म्यूटेशन और अन्य स्पाइक म्यूटेशन से जुड़ी हो सकती है। यद्यपि B.1.617 म्युटेशन कई अन्य देशों में भी पाया जा रहा है। लेकिन इसके प्रभाव को समझने और निदान के लिए निरंतर अनुसंधान की और आवश्यकता है




साभार : राज प्रकाश

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