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चीन और ऑस्ट्रेलिया

चीन ने हाल ही में ऑस्ट्रेलिया के साथ महत्वपूर्ण आर्थिक बातचीत को अनिश्चित काल हेतु स्थगित कर दिया है, जो दोनों देशों के बीच बढ़ती कूटनीतिक दरार में नवीनतम है. आस्ट्रेलिया के तेवर सख्त होने और बेल्ट एंड रोड इनीशिएटिव (बीआरआइ) के दो समझौतों को रद करने के बाद चीन गुस्सा गया है. चीन ने आस्ट्रेलिया से व्यापारिक समझौतों पर चल रही सभी गतिविधियों पर अनिश्चितकाल के लिए रोक लगा दी है. चीन ने कहा है कि वह सभी व्यापारिक वार्ताओं को भी निलंबित रखेगा. चीन ने आस्ट्रेलिया से कोयला, आयरन, गेहूं, वाइन सहित कई सामान के आयात को भी फिलहाल बंद कर दिया है. चीन की सरकार ने यह कदम उठाते हुए आरोप लगाया है कि आस्ट्रेलिया शीत युद्ध की मानसिकता और वैचारिक भेदभाव करते हुए सामान्य संबंधों को नुकसान पहुंचा रहा है. चीन अब सभी व्यापारिक समझौतों पर रोक लगा रहा है. चीन का ऐसा ही आक्रामक रवैया कुछ अन्य देशों की सरकार के साथ बना हुआ है. उसके भारत सहित कई देशों से सीमा विवाद और अन्य मामलों में संबंध बिल्कुल निचले स्तर पर आ गए हैं. आस्ट्रेलिया ने साल 2019 में कोरोना की शुरूआत को लेकर वायरस की उत्पत्ति के मामले में जांच की मांग की थी. चीन के उसी समय संबंध तनावपूर्ण हो गए थे. उसने आस्ट्रेलिया से कई सामानों के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया था. अभी भी आयरन जैसे कई अन्य वस्तुओं का आस्ट्रेलिया से आयात कर रहा था. आस्ट्रेलिया के लिए चीन अब तक विदेशी बाजार के रूप में पहले नंबर पर था.



चीन का यह क़दम दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों में आई दरार और जैसे को तैसा की नीति का यह सबसे ताज़ा उदाहरण है. ऑस्ट्रेलिया के विदेशी मामलों और व्यापार के विभाग के मुताबिक चीन ऑस्ट्रेलिया का सबसे बड़ा व्यापारिक पार्टनर है और पूरी दुनिया से ऑस्ट्रेलिया जितना व्यापार करता है उसके अकेले 29 प्रतिशत व्यापार वो चीन से करता है. साल 2020 में ऑस्ट्रेलिया में चीनी निवेश में 61 प्रतिशत की कमी आई है जो कि पिछले छह साल में सबसे कम है.


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