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जो अंधकार में ही रहते हैं वे प्रकाश स्तम्भ नहीं देख पाते

Updated: Apr 13, 2021

चक्षु हीन को प्रकाश नहीं अंधकार ही समझ में आएगा -डॉ आनंद प्रदीक्षित

दृष्टिबाधित पाठक अन्यथा न लें,ओशो की पोस्ट का प्रयोग किया है

ओशो की किसी कथा में पढ़ा था

"किसी अंधे के सामने तुम अगर प्रकाश के खिलाफ बोलोगे तो वह तुमसे राजी हो जाएगा। असल में, अंधे को प्रकाश के पक्ष में राजी करना मुश्किल है। प्रकाश के विपक्ष में राजी करने में क्या कठिनाई है? तुम अगर प्रकाश के खिलाफ तर्क दोगे अंधे को, राजी हो जाएगा। मगर मेरी आंख खुल गई, मैं क्या करूं! तुम जरा देर से आए केशव! अगर तुम दस-पंद्रह साल पहले आए होते, जब मेरी भी आंख बंद थी, तो शायद मैं तुमसे राजी हो गया होता। तुम जीत गए होते। मगर अब जीतने का कोई उपाय नहीं"

यही हाल उन नादानों का है जो NCERT और रीजनिंग मैथ्स को आईएएस बनने का रास्ता मां बैठे हैं।

चक्षुहीन हो चुके हैं ये

मैं रोशनी दिख रहा हूँ कि रास्ता ये है पर टॉर्च बियरर के दिखाए रास्ते पर वे कैसे चलेंगे?

वे तो अंधकार के अभ्यस्त हो चुके हैं।प्रकाशित व्यक्तित्व को पहचान न सकेंगे


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