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मन तो कुत्ता है जी,आज़ाद कर दो न

मन तो कुत्ता है जी ,मन का क्या है

डॉ आनंद प्रदीक्षित

हमारा मन एक बहुत प्यारा सा डॉगी है जो हम ने पाला हुआ है। जब हम ध्यान करते हैं तो यह डॉगी दुम हिलाता है कूँ कूँ भों भों करता है क्योंकि हमने इसे बांधा हुआ है ।यह खुलने के लिए बेताब होता है और हम चाहते हैं कि यह मन हमें डिस्टर्ब ना करे। जितना ही हम इसे बांधते हैं उतना ही यह भागने के लिए आमादा होता है अतः यदि सच्चे अर्थों में ध्यान करना है, मेडिटेशन करना है तो इस प्यारे से डॉगी को थोड़ी देर के लिए खुला छोड़ दो ।इसकी आवाज़ें सुनो ।यह पंजों से खड़ा होता है तो उसे सह लो लेकिन पट्टा खोल दो ।इसका जब पट्टा खोल दोगे तो यह भाग जाएगा लेकिन क्योंकि यह हमने पाला हुआ है हम।इसे रोटी डालते हैं और कभी-कभी बिस्कुट भी खिलाते हैं ,तो ये लौट के वापस आएगा, हमारे पास ही आएगा ।अतः जितनी देर के लिए बाहर घूम कर आए उतनी देर में ध्यान कर लीजिए, मेडिटेशन कर लीजिए ।

यही 15 मिनट आपके जीवन में अनमोल होंगे ।

मन बांधने से कभी भी ध्यान नहीं लगेगा ।मन खुला छोड़ दो जो यह दिखाएं वह देखो मुस्कुराओ और जाने दो तभी ध्यान लगेगा। आनंद सूत्र है यह डॉक्टर आनंद प्रदीक्षित का

करके देखो।


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