top of page

ये 5 G के कारण नहीं

आजकल हम लोग एक नयी समस्या से गुजर रहे हैं। लोगों को उठते बैठते काम करने के दौरान बिजली के झटके लग रहे हैं। लोग समझ नहीं पा रहे हैं कि ऐसा क्यूँ हो रहा है? अभी तक तो सब ठीक चल रहा था फिर अचानक से ये सब क्या और कैसे होने लगा? व्हाट्सएप्प पर इसका कारण बताने वाले तमाम मैसेज तैर रहे हैं। जिनमें 5G रेडिएशन से लेकर बढ़ते पोल्यूशन को इसका कारण बताया जा रहा है। यहाँ तक कि कुछ अख़बारों ने भी इससे सम्बंधित ख़बरें छापी हैं। तो आखिर सच्चाई क्या है?


असल में इसका कारण है स्टैटिक इलेक्ट्रिसिटी। अब ये कैसे और क्यों बनती है इसको समझने के लिए आपको चीजों को थोड़ा ज़ूम करके देखना पड़ेगा। थोड़ा ज्यादा ज़ूम। यानी एटॉमिक लेवल पर। जैसा कि हम जानते हैं कि सभी पदार्थ अणुओं से मिलकर बने होते हैं। अणु के भीतर झांके तो हमें यहाँ तीन प्रकार के पार्टिकल्स दिखते हैं। प्रोटोन, न्यूट्रॉन जो मिलकर न्यूक्लियस बनाते हैं और अणु के केंद्र में आराम फरमाते हैं। और इलेक्ट्रान जो कि इस न्यूक्लियस के इर्द गिर्द अपनी कक्षाओं में धमाचौकड़ी मचाते रहते हैं। ये नन्हें शैतान कभी शांति से नहीं बैठते। अगर किसी पदार्थ के अणु में प्रोटोन और इलेक्ट्रान की संख्या समान हो तो इनकी धमाचौकड़ी घर तक ही सीमित रहती है। लेकिन अगर ऐसा न हो जो कि अधिकांश मामलों में होता ही है तो ये नन्हे शैतान घर से बाहर भी उछल कूद का मौका नहीं छोड़ते।


आपने देखा होगा कि जब आप सूखे बालों में कंघी करते हैं तो आपके बाल कंघे की ओर आकर्षित होने लगते हैं। यही नहीं जब आप उस कंघे को कागज के छोटे टुकड़ों के पास ले जाते हैं तो वे भी कंघे की ओर चुम्बक की तरह खींचे चले आते हैं। इसका कारण है चार्ज इम्बैलेंस। असल में होता क्या है कि जब आप कंघे को बालों पर फिराते हैं तो आपके बालों के अणुओं में से कुछ इलेक्ट्रान कूदकर कंघे में चले जाते हैं। अब चूँकि इलेक्ट्रान नेगेटिव चार्ज को कैरी करते हैं तो वे कंघे को भी नेगेटिवली चार्ज कर देते हैं। और बालों से इलेक्ट्रान के जाने के कारण बाल पॉजिटिवली चार्ज हो जाते हैं। दोनों में चार्ज के इस अंतर के कारण ही दोनों एक दुसरे की ओर आकर्षित होते हैं। चार्ज के इस अंतर को ही स्टैटिक इलेक्ट्रिसिटी कहते हैं।


तो अब बात करते हैं कि आखिर ये स्टैटिक इलेक्ट्रिसिटी हमें झटका किस तरह देती है? झटके का कारण है चार्ज का तेजी से एक जगह से दूसरी जगह फ्लो होना। मान लीजिये आप बेड पर लेटे हैं। इस दौरान बेड पर आपके उलटने पलटने करवटें लेने इत्यादि के कारण पैदा हुआ घर्षण आपको कंघे की तरह ही चार्ज कर देता है। और यदि इस दौरान घर का कोई सदस्य आपको आकर छू ले तो वह चार्ज तेजी से आपकी बॉडी से उसकी बॉडी में फ्लो होता है और दोनों को झटका लगता है। इसी तरह जब आप कार चलाकर आते हैं तो आपकी कार हवा से हुए घर्षण के कारण चार्ज हो जाती है, और उससे उतरने के दौरान उसकी बॉडी से आपका सम्पर्क होता है तो वह चार्ज तेजी से कार से आपकी बॉडी में फ्लो होता है और आपको झटका लगता है।


लेकिन अब आप सोच रहे होंगे कि अभी कुछ महीने पहले तो सब ठीक था। आखिर ये समस्या अभी ही क्यों बढ़ गयी है? कहीं इसका कारण 5G रेडिएशन तो नहीं? जैसा कि व्हाट्सएप्प यूनिवर्सिटी में प्रचारित किया जा रहा है? जी नहीं, इसका सम्बन्ध मौसम से है।


असल में आम परिस्थितियों में कोई भी स्टैटिक चार्ज हमेशा बना नहीं रहता, हर चार्जड वस्तु धीरे धीरे अपना चार्ज खोती जाती है। जिसका कारण है हमारे आस पास मौजूद atmosphere यानी हवा। कोई वस्तु कितनी जल्दी अपना चार्ज खोएगी यह निर्भर करता है कि उसके आस पास मौजूद हवा किस तरह की है। यदि हवा में नमी की मात्रा अधिक है तो वस्तु अपना चार्ज तेजी से खोएगी। क्योंकि नम हवा इलेक्ट्रिसिटी की अपेक्षाकृत अच्छी चालक (conductor) होती है। हवा में नमी की मात्रा कम होने पर वस्तु अपेक्षाकृत लम्बे समय तक चार्ज को होल्ड कर सकती है। वर्तमान में मौसम कुछ इसी तरह का है।


आज दिल्ली में नमी का स्तर 14% दिखा रहा है जो काफी कम है। नमी की कमी के कारण ही हमें कुछ अन्य समस्याएं जैसे रुखी त्वचा और होठों का पड़पड़ाना फटना से दो चार होना पड़ रहा है। और यही कारण है कि स्टैटिक इलेक्ट्रिसिटी हमें इतना परेशान कर रही है।


साभार : विज्ञान विश्व,

अर्पित द्विवेदी

66 views0 comments
bottom of page