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रेडिएशन की कहानी से सतर्क-डॉ आनंद प्रदीक्षित

रेडिएशन की झूठी कहानी पे रोये

डॉ आनंद प्रदीक्षित

आजकल एक बात व्हाट्सएप पर बहुत तेजी से फैल रही है कि यह कोरोना नहीं है 5G स्पेक्ट्रम का प्रभाव है। निश्चय ही 5G का ट्रायल होगा तो प्रभाव हो सकता है,पर अभी तो शायद नहीं है। शोध के बाद वैज्ञानिक ही बता सकते हैं, ना मैं बता सकता हूं ना आप बता सकते हैं ।यदि 5G स्पेक्ट्रम का यह प्रभाव होता तो पूरे विश्व में कोई ना कोई वैज्ञानिक रेडिएशन मीटर से यह चीज चेक जरूर कर सकता था। सभी देशों की सरकारें ऐसी नहीं है की मीडिया पर यह बोलने पर प्रतिबंध लगा दें जैसा कुछ देशों में हैं जहां ना कोई कुछ बोल सकता है ना सरकार का विरोध कर सकता है जैसे चीन।बहुत से ऐसे देश हैं जिनमें इस प्रकार की सेंसरशिप मौजूद है भले ही वह सीधे सेंसरशिप ना हो किंतु यदि कोई बोलता है तो उसे तरह तरह से चुप करा दिया जाता है ,या तो सरकार के समर्थक उसे बुरी तरह फटकार के चुप करा देते हैं ।या उसे किसी भी धारा में बंद किया जा सकता है ।हमारे महान लोकतंत्र भारत में भी ये इमरजेंसी में था पर अब ऐसा नहीं है ।यदि किसी ने ऐसा परीक्षण किया होता तो अवश्य पता चल जाता कि सड़कों पर रेडिएशन इतना है घरों के अंदर रेडिएशन इतना है।

रेडिएशन मीटर कोई बहुत बड़ी चीज नहीं है । रेडिएशन की तीव्रता को कई प्रकार से नाप सकता है ।5G स्पेक्ट्रम से अल्फा बीटा गामा किरणों नहीं निकलेंगे बल्कि इसे कुछ अलग प्रकार से नापा जाएगा इसके नापने के लिए ऐप भी बनाए जा सकते हैं और मोबाइल फोन इसे नाप सकते हैं जैसे कि आप अपने वाईफाई की स्पीड नाप ते हैं। कुछ इसी प्रकार से आप रेडिएशन की तीव्रता भी नाप पाएंगे लेकिन ऐसा कोई उपकरण मेरे संज्ञान में नहीं है जो बनाए गए हो और मैंने ऐसा कोई शोध नहीं पढ़ा है जिससे पता चले की सड़कों पर चारों ओर एडिशन फैला हुआ है ।

सच्चाई ये है कि सड़कों पर चारों लोग फैले हुए हैं जो कि मानते नहीं हैं। जिन्हें न समारोह के बिना चैन है न रेस्टोरेंट में खाए बिना रह सकते हैं। ना लोगों से मिले बिना रह सकते हैं ।आज भी बहुत से स्टूडेंट मुझसे ऑफलाइन क्लास के बारे में पूछते हैं यानी क्लास में मस्ती आवारागर्दी करने की तमन्ना आज भी वर्तमान है । घर में मां बाप के सामने क्लास करते हैं तो यार दोस्त बाज़ी कैसे होगी। वह स्वच्छंदता ऑफलाइन क्लास में ही मिल सकती है ।हालांकि ऑफलाइन शब्द मैं गलत मानता हूं फेस टू फेस क्लास कहना ज्यादा सही है या फिजिकल क्लास कहना ज्यादा सही है ।आज भी लोगों की तमन्ना एक दूसरे से मिलने की है ।

मुझे तो लगता है कि व्हाट्सएप द्वारा फैलाया गया जाल है या सरकार के कुछ निकृष्ट विरोधियों द्वारा फैलाई गई अफवाह है जो सरकार को काम नहीं करने देना चाहते हैं ।

लोकतंत्र स्पष्ट है अगर स्पष्ट ना होता तो बंगाल में सत्ताधारी दल ही जीता होता। ईवीएम मैनिपुलेट हो गया होता ।फिर भी लोग फालतू की बातें करते हैं, इसलिए बचाव करिए अफवाहों में मत आइए। यदि रेडिएशन की बात होगी तो कोई ना कोई इस बात पर शोध जरूर कर लेगा और आपको सूचित कर दिया जाएगा ।भारत के वैज्ञानिक कोई कम नहीं है और भी निश्चित रूप से इस बात पर शोध करने में सक्षम है।

पहले भी ऐसी फर्जी बातें हुई हैं कि मोबाइल फोन के आगे मक्के के दाने रख दिए गए मोबाइल पर कॉल करते ही मक्के के दाने पॉपकॉर्न बन गए। यह सब फर्जी वीडियो थे ।रेडिएशन के अंतरराष्ट्रीय मानक हैं और उससे ज्यादा रेडिशन हमारे फोन रिसीव नहीं करते ।ऐसा नहीं है कि 5जी पूरी दुनिया को भाड़ बना देगा जिस भाड़ में हम सब भूने जाएंगे ।

यह सब मूर्खतापूर्ण बातें हैं आप समझदार बनिए और इन मूर्खतापूर्ण बातों से दूर रहे इस संकट की घड़ी में सरकार का सहयोग कीजिये।

सरकार ही आपके साथ है केवल ,दूसरा कोई नहीं। इसलिए उसमें भरोसा रखिए आस्था रखिए ।सरकारी अधिकारी सरकार की नीतियों को लागू करते हैं ।उनके सामने हजार हजार परेशानियां होती हैं अतः उन्हें सहयोग करें ना कि उन्हें परेशान करें और उनकी मजबूरी भी समझिए ।वह इंसान हैं कोई रोबोट नहीं है। उनके भी परिवार है। कोरोनावायरस का डर उनको भी है ।यह कहां का कम है कि वे इस संकट काल में आपके लिए सब कुछ करने के लिए अपने अपने दफ्तरों में मौजूद हैं ।यदि वह भी दफ्तर छोड़कर भाग जाए तब आप क्या करेंगे एक बार यह विचार करके देखिए

डॉ आनंद प्रदीक्षित

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