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रेडियो-डेमिक क्या होगा

भविष्य की आहट

डॉ आनंद प्रदीक्षित

धीरे धीरे हम वायरस की भांति रेडिएशन से भी घिरते चले जा रहे हैं ।2G 3G 4G 5G के बाद और न जाने कितनी जेनरेशन आने वाली हैं जिनमें रेडिएशन की इंटेंसिटी बढ़ती जाएगी ।इसका एंप्लीट्यूड भी बढ़ता जाएगा और इफेक्टिव पावर कोफिशिएंट भी तेजी से बढ़ेगा अर्थात सीधे शब्दों में मानव शरीर पर इसका प्रभाव बढ़ेगा।कितना नुकसान होगा यह तो शोध करके ही वैज्ञानिक पता लगाएंगे किंतु यह शोध एक बहुत बड़ी रेडिएशन -मारी के बाद ही हो पाएगा रेडिएशन- मारी अर्थात रेडिएशन के कारण उत्पन्न महामारी। इसे रेडियो -डेमिक भी भी कह सकते हैं ।

रेडिएशन शरीर को तपाता है जलाता है स्किन को बीमार करता है। लॉर्ड रदरफोर्ड जब मैडम क्यूरी के दिए हुए 1 सैंपल को रॉयल सोसायटी ले गए और वह सैंपल उन्होंने कोर्ट की जेब में रखा हुआ था ।उनके शरीर में घाव हो गए थे क्योंकि तब यह पता नहीं था कि यह अल्फा बीटा गामा रेडिएशन शरीर के लिए कितना भयानक है।

आज भी यह चर्चा होने की आवश्यकता है कि क्या हम रेडिएशन को इतनी छूट दे रहे हैं कि यह हमारे शरीरों के लिए घातक होता चला जा रहा है ?क्या यह भविष्य में एक विकिरण महामारी का रूप धारण नहीं करेगा? अभी हम बाहर मास्क लगाकर निकलते हैं क्या भविष्य में हम लेड के बने हुए कवच पहन के निकलेंगे ?और घरों में लैड के बने हुए रोधक लगाएंगे? बाहर क्या सड़कों पर निकल पाएंगे ?क्या धनवान लोगों के लिए घर के अंदर से ही सुरंगों की व्यवस्था होगी जिन से निकलकर लोग जमीन के अंदर बनी हुई हाईवे तक पहुंचेंगे ?

घर में वायर्ड इंटरनेट ही प्रयोग हो पाएगा और यह तार घर के बाहर लगे हुए रेडिएशन ग्राही से निकल कर आएंगे जैसे टीवी एंटीना से टीवी तक आते हैं ।

क्या रिमोट कंट्रोल ब्लूटूथ और वाईफाई के वायर्ड वर्जन सामने आ जाएंगे क्योंकि वायरलेस से दुनिया डरने लगेगी ।

क्या रेडिएशन के कारण एक समय ऐसा नहीं आएगा कि सड़क पर चलते हुए लोग तरह-तरह की बीमारियों से ग्रस्त होकर गिरते चले जाएंगे क्योंकि लालची लाला सिर्फ अपना लाभ देख रहे हैं और हमें प्रगति के नाम पर अस्वास्थ्य कर उपकरणों में झोंकते चले जा रहे हैं।

रेडिएशन के खतरे को समय रहते पहचान लिया जाना चाहिए यह बहुत पुराना खतरा है कुछ लोग कहते हैं कि जो करंट महसूस हो रहा है चीजों में वह 5 जी के कारण है ।फिलहाल तो ऐसा नहीं लगता है यह करंट तो स्टैटिक है और सस्ते नकली चमड़े के जूते पहनने पर यह करंट महसूस होता है ।कपड़े या असली चमड़े के जूते पहनने पर यह नहीं महसूस होता ।रबर की चप्पल क्रॉक्स आदि पहनने पर नहीं महसूस होता किंतु यदि आप नकली घास पर चलेंगे तो यह करंट महसूस होता है ।

मेरे ध्यान कक्ष में आर्टिफिशियल ग्रास का फर्श है तो मुझे यह करंट महसूस होता है इसका 5जी से कोई संबंध नहीं है ।जब मैं कपड़े के जूते पहन कर उस घास पर टहलता हूं आता जाता हूं तो कोई करंट महसूस नहीं होता यह करंट दरवाजे के हैंडल आदि छोटे समय अनुभव होता है ।

किसी अफवाह मे न आये ।यह 5 जी के कारण नहीं है ।

लेकिन 5G या आगे आने वाली जनरेशन अधिक पेनिट्रेटिंग होगी और हमारे शरीर के अंदर तक बुरी तरह प्रवेश करेगी।

क्या सड़कों पर हम स्पेस सूट पहने हुए लोगों को देखना चाहते हैं? बड़ी कंपनियां सोलर पावर से चलने वाले एयर कंडीशन बॉडी सूट बनाने लगेंगे जिनमें रेडिएशन का प्रवेश नहीं हो पाएगा ।

क्या होगा सौंदर्य का ?क्या होगा सिक्स पैक वालों का ?क्या होगा चांद से चेहरों का ?और क्या होगा घनेरी जुल्फों का ?

चेहरा अभी से मास्क में ढक गया है अब आगे पूरा शरीर ढकने वाला है ।

कुछ बुजुर्ग कहेंगे कि हम तो पहले ही कहते थे कि शरीर ढक कर चलना चाहिए लोग नहीं माने तो प्रकृति ने ढकवा दिया ।

अब बुजुर्ग बुजुर्ग हैं कहते ही रहते हैं कौन सुनता है।

वैसे भी कोविड में बच कहां रहे हैं बुजुर्ग ?

बहरहाल रेडिएशन पर चिंतन और सार्वभौमिक बहस बहुत आवश्यक है हालांकि कोई फायदा नहीं है क्योंकि चीन अमेरिका के फर्जी ट्रेड वार, दिखावे के संघर्ष के बीच हम सब बलि के बकरे हैं और निरंतर हमारी बलि चढ़ाई जा रही है डॉ आनंद प्रदीक्षित


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