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श्रीनिवास रामानुजम

इतिहासनामा से साभार


सन 1895 में मद्रास के एक गाँव में एक गणित के मास्टर जी पांचवी क्लास के बच्चों को पढ़ाने के लिए कक्षा में पंहुचे उस दिन मास्टर साब का मूड पढ़ाने का नहीं था और वो कुछ देर कुर्सी पर ढेर हो कर सोना चाह रहे थे सो उन्होंने ब्लैक_बोर्ड पर लिखा 1 +2 +3 +4 + .......98 +99 +100 और कहा की इसको जोड़ कर बताओ उन्होंने सोचा कि कम से कम एक घंटा तो सोने को मिल ही जाएगा .......


और मेज पर पैर पसार कर कुर्सी पर फ़ैल कर सोने कि कोशिश करने लगे ....अभी सवाल लिखे हुए पांच मिनट ही बीते होंगे कि एक बालक तख्ती पर सवाल हल कर के ले आया ....उत्तर बिलकुल सही था मगर जिस तरह से उसे हल किया गया था वह मास्टर जी के पल्ले नहीं पड़ा ...उस पांचवी क्लास के बालक ने सिगमा N = N (N + 1 )/2 सूत्र का आविष्कार (**) किया और फिर उस लम्बी जोड़ कि गणना को पूरा किया .....यह विचित्र प्रतिभावान बालक था श्रीनिवास रामानुजन जो 26 अप्रैल के दिन , इस

नश्वर संसार को छोडकर चल बसे थे ।....


12 वर्ष कि अवस्था तक उन्होंने लोनी कि trigonometry सहित अन्य सभी लोनी कि पुस्तकें ख़त्म कर चुके थे !! 13 वर्ष कि अवस्था तक वह अपने घर में किराये पर रहने वाले दो विद्यार्थी जो #ग्रेजुएशन कर रहे थे उनकी गणित कि किताबें ख़त्म कर के उन्हें पढ़ाने भी लग गए थे !! यदि उन्हें पुस्तक में दी हुयी कोई थ्योरम समझ में नहीं आती थी तो वह उसको समझने के लिए अपनी एक नयी थ्योरम ईजाद कर लेते थे .....!!


उनका जीवन काल सिर्फ 32 साल का था इस अल्प जीवन में उन्होंने करीब 3900 #थ्योरम , 200 #इनफिनिटी सिरीज और नंबर थ्योरी पर सैकड़ों पेपर लिखे ....दुर्भाग्य से अब इनमे से ज्यादातर कि पांडुलिपि नष्ट हो चुकी है ....जीवन के कुछ वर्ष इन्होने इंग्लॅण्ड में प्रोफ़ेसर #हार्डी के साथ बिताए जो कि खुद एक गणितज्ञ थे ....एक बार प्रोफ़ेसर हार्डी रामानुजन से मिलने अस्पताल आये (रामानुजन बीमारी कि वजह से अस्पताल में भर्ती थे ) ........


रामानुजन का मन बहलाने के लिए उन्होंने कहा कि जिस टैक्सी से वो आये हैं उसक नंबर 1729 है जो कि बहुत ही uninteresting नंबर है ....रामानुजन ने लेटे लेटे ही जवाब दिया नहीं सर यह बहुत ही रोचक नंबर है ये वह सबसे छोटा नंबर है जिसे दो संख्याओं के #क्यूब के रूप में दो तरह से लिखा जा सकता है 1729 = cube 1 + cube 12 और 1729 = cube 9 + cube 10 इसके बाद प्रोफ़ेसर हार्डी काफी देर तक कुछ न बोल सके !!


रामानुजन की मृत्यु #संक्रमण और #कुपोषण कि वजह से हुयी ....पूरी उम्र वह रोजी रोटी कि समस्या से जूझते रहे ....


एक महान गणितज्ञ जिसकी कीमत हिन्दुस्तानियों ने न जानी ....भारत सरकार भी ऐसी विभूतियों के लिए बस डाक टिकट जारी कर के अपने कर्त्तव्य की #इतिश्री कर लेती है ....

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