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समसामयिकी 24.4.21

Jagran josh se sabhaar

चुनाव आयोग ने कहा कि किसी भी सभा में 500 से अधिक लोग शामिल नहीं हो सकते हैं. आयोग ने राजनीतिक पार्टियों के किए जाने वाले रोड शो और कार रैलियों पर तुरंत प्रभाव से रोक लगा दी है. यह आदेश 22 अप्रैल 2021 को शाम सात बजे से लागू हो गया. चुनाव आयोग ने अपने आदेश में यह भी कहा कि कई राजनीतिक दल/उम्मीदवार अभी भी सार्वजनिक समारोहों के दौरान निर्धारित सुरक्षा मानदंडों का पालन नहीं कर रहे हैं. इसलिए कोरोना के बढ़ते खतरों को देखते हुए बड़ी रैली और रोड शो को प्रतिबंधित किया गया है. इस दिन को लेकर देशभर के छात्रों और लेखकों में काफी उत्साह रहता है. इस दिन विद्यालयों तथा पुस्तक विक्रेता संघों द्वारा विभिन्न प्रकार के कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाता है. इस दिन, यूनेस्को और प्रकाशक एक साल के लिए वर्ल्ड बुक कैपिटल का चयन करते हैं.



हर साल 23 अप्रैल को 'विश्व पुस्तक दिवस' मनाया जाता है. इसे विश्व पुस्तक और कॉपीराइट दिवस (World Book and Copyright Day) कहा जाता है. दुनियाभर में किताबों की अहमियत को दर्शाने के लिए विश्व पुस्तक दिवस मनाया जाता है. दुनिया के विभिन्न देशों में वर्ल्ड बुक डे को अलग-अलग तरीके से मनाया जाता है. सूचकांक में शीर्ष दस देशों में पश्चिमी और उत्तरी यूरोप के देश हैं. सूची में स्वीडन पहले स्थान पर जबकि नार्वे और यूरोप क्रमश: दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, चीन (68) और भारत (87) की कुल वैश्विक ऊर्जा मांग में सामूहिक रूप से एक तिहाई हिस्सेदारी है. रिपोर्ट के अनुसार चीन का सुधार मुख्य रूप से अर्थव्यवस्था में ऊर्जा गहनता में कमी, नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार के साथ ऊर्जा क्षेत्र में कार्बन उत्सर्जन में कमी तथा निवेश एवं ढांचागत सुविधाओं के जरिये अनुकूल माहौल सृजित करने का परिणाम है. इस रोवर को लाल ग्रह पर प्रचुर मात्रा में मौजूद कार्बन डाई ऑक्साइड से सांस लेने योग्य आक्सीजन बनाने में पहली बड़ी सफलता मिली है. हालांकि बहुत थोड़ी मात्रा में आक्सीजन तैयार हुई है, लेकिन यह उपलब्धि दूरगामी मानी जा रही है. इससे मंगल पर मानव बस्ती बसाने की राह खुल सकती है. नासा का मकसद साल 2033 तक मंगल पर मानव को पहुंचाने का है और वह यहां आने वाली इससे संबंधित तमाम चुनौतियों से निपटने की तैयारी कर रहा है. इसमें से एक चुनौती मंगल ग्रह पर ऑक्सीजन का निर्माण करना होगा क्योंकि पृथ्वी से आठ माह के सफर में मंगल ग्रह तक इतनी बड़ी मात्रा में ऑक्सीजन ले जाना संभव नहीं होगा.


प्रधानमंत्री मोदी ने संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति जो बिडेन द्वारा आयोजित दो दिवसीय शिखर सम्मेलन के उद्घाटन दिवस पर संबोधन किया. जलवायु संकट पर शिखर सम्मेलन 22-23 अप्रैल, 2021 को एक आभासी मोड में आयोजित किया गया. अमेरिकी राष्ट्रपति बिडेन ने 40 विश्व नेताओं को आमंत्रित किया है, जिनमें रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, प्रधानमंत्री मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग शामिल हैं. प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन के दौरान यह बताया कि, वे राष्ट्रपति बिडेन के साथ 'भारत-अमेरिका जलवायु और स्वच्छ ऊर्जा एजेंडा 2030 भागीदारी' का शुभारंभ करेंगे. विश्व के प्रमुख नेता इन दो दिनों में वैश्विक जलवायु कार्रवाई पर चर्चा कर रहे हैं, प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी बताया कि, भारत का प्रति व्यक्ति कार्बन फूटप्रिंट वैश्विक औसत से 60% कम है क्योंकि भारत की जीवन शैली अभी भी स्थायी पारंपरिक प्रथाओं पर आधारित है. President Biden and I are launching 'India-US climate & clean energy Agenda 2030 partnership'. We will help mobilise investments, demonstrate clean technologies and enable green collaborations: Prime Minister Narendra Modi during Leaders' Summit on Climate



अमेरिका द्वारा आयोजित इस आभासी शिखर सम्मेलन में भाग लेने वाले लगभग 40 विश्व नेता जलवायु कार्यों, जलवायु परिवर्तन, प्रकृति आधारित समाधानों को बढ़ाने, जलवायु शमन और अनुकूलन के लिए वित्त जुटाने, स्वच्छ ऊर्जा के लिए तकनीकी नवाचारों के साथ-साथ जलवायु सुरक्षा पर विचारों का आदान-प्रदान कर रहे हैं. • इस शिखर सम्मेलन में भाग लेने वाले नेता उन देशों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं जो मेजर इकोनॉमीज़ फोरम के सदस्य हैं, जिनमें से भारत भी एक सदस्य है, और जो अन्य देशों के बीच जलवायु परिवर्तन के प्रति संवेदनशील हैं. • यह जलवायु परिवर्तन अमेरिकी राष्ट्रपति बिडेन के लिए भी फोकस का एक क्षेत्र रहा है. राष्ट्रपति के तौर पर कार्यभार संभालने के बाद, उन्होंने 20 जनवरी, 2021 को यह घोषणा की थी कि, अमेरिका पेरिस जलवायु समझौते में पुनः शामिल हो जाएगा. यह शिखर सम्मेलन जलवायु मुद्दों पर केंद्रित वैश्विक बैठकों की एक श्रृंखला का हिस्सा है. यह नवंबर, 2021 में संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (COP26) से पूर्व आयोजित किया जा रहा है. इससे पहले अप्रैल, 2021 में जलवायु के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति के विशेष दूत जॉन केरी ने भारत का दौरा किया था और इस शिखर सम्मेलन सहित जलवायु से संबंधित मुद्दों पर भारतीय नेताओं के साथ चर्चा की थी. हमारे नेताओं ने उन्हें पेरिस जलवायु समझौते के तहत भारत द्वारा अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने और उत्सर्जन को कम करने के प्रयासों की जानकारी दी थी.



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