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समाचार विचार

🛑दैनिक समसामयिकी


07 June 2021 (Monday)


INTERNATIONAL


1. लक्ष्य हासिल करने में पिछड़ा भारत:17 सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स में 2 स्थान खिसककर 117वें नंबर पर पहुंचा, नेपाल-बांग्लादेश से भी खराब प्रदर्शन:-

• कोरोना की वजह से इकोनॉमी के मसले पर लड़खड़ा रहा भारत अब बेहतर जीवन से जुड़े मामलो में भी पिछड़ रहा है। यूनाइटेड नेशंस के 193 देशों की ओर से अपनाए गए 17 सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स (SDG) की ताजा रैंक में भारत 2 स्थान खिसककर 117वें नंबर पर आ गया है। UN के सदस्य देशों ने 2015 में इन 17 SDG को स्वीकार किया था। इन लक्ष्यों को 2030 तक पूरा करने का टारगेट तय किया गया है।

इन वजहों से गिरी भारत की रैंकिंग


• 2021 की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि भारत प्रमुख चुनौतियों जैसे भुखमरी को खत्म करना और फूड सिक्योरिटी को हासिल करना (SDG2), लैंगिक समानता (SDG5), लचीले बुनियादी इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण, इन्क्लूसिव एंड सस्टेनेबल इंडस्ट्रियलाइजेशन को बढ़ावा देना और इनोवेशन को बढ़ावा देने (SDG9) की कसौटी पर खरा नहीं उतरा है।

• इन्हीं कारणों से भारत की रैंकिंग गिरी है। 2021 में भारत का कुल SDG स्कोर 100 में से 61.9 पॉइंट रहा है। इस मामले में भारत भूटान, नेपाल, श्रीलंका और बांग्लादेश जैसे देशों से भी पिछड़ गया है।

बिहार और झारखंड सबसे ज्यादा पीछे


• रिपोर्ट में देश के राज्यों की तैयारियों का भी ब्योरा दिया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2030 तक SDG के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए बिहार और झारखंड की तैयारियां सबसे पीछे हैं। झारखंड 5 SDG में और बिहार 7 SDG में पिछड़ा हुआ है। SDG के लक्ष्यों को तय समय पर पूरा करने को लेकर केरल, हिमाचल प्रदेश और चंडीगढ़ सही दिशा में काम कर रहे हैं।

इन 17 SDG पर काम कर रहे हैं सभी देश

• SDG1 गरीबी नहीं

• SDG2 भूखमरी खत्म

• SDG3 गुड हेल्थ

• SDG4 क्वॉलिटी एजुकेशन

• SDG5 जेंडर इक्वलिटी

• SDG6 साफ पानी और सफाई

• SDG7 ग्रीन एनर्जी

• SDG8 अच्छा काम और आर्थिक विकास

• SDG9 इंडस्ट्री, इनोवेशन एंड इंफ्रास्ट्रक्चर

• SDG10 असमानता में कमी

• SDG11 स्थायी शहर और समुदाय

• SDG12 खपत और उत्पादन

• SDG13 क्लाईमेट

• SDG14 जलीय जीवन

• SDG15 जमीन पर जीवन

• SDG16 पीस एंड जस्टिस

• SDG17 लक्ष्यों को पूरा करने के लिए ग्लोबल भागीदारी को मजबूत करना

एनवायरनमेंटल परफॉर्मेंस इंडेक्स में भारत की 168वीं रैंक


• रिपोर्ट के मुताबिक, एनवायरनमेंटल परफॉर्मेंस इंडेक्स (EPI) में भारत की 180 देशों में 168वीं रैंक रही है। EPI की गणना कई इंडिकेटर्स के जरिए होती है। इसमें क्लाईमेट हेल्थ, जलवायु, वायु प्रदूषण, स्वच्छता और पीने का पानी, इकोसिस्टम से जुड़ी सेवाएं और बायोडायवर्सिटी शामिल हैं।

• पर्यावरण हेल्थ कैटेगिरी में भारत की रैंक 172 रही है। यह कैटेगिरी बताती है कि कैसे देश अपनी आबादी को पर्यावरण हेल्थ से जुड़े जोखिमों से बचा रहे हैं।

2020 में EPI में पाकिस्तान से पीछे था भारत


• येल यूनिवर्सिटी की ओर से जारी EPI 2020 रिपोर्ट में भारत की रैंक 148 थी। तब भारत EPI में पाकिस्तान से 21 स्थान पिछड़ गया था। EPI 2020 में पाकिस्तान की रैंक 127 थी।


2. राष्ट्रपति पुतिन ने कहा- मोदी और जिनपिंग जिम्मेदार नेता, दोनों आपसी मसलों को सुलझा लेंगे:-

• भारत और चीन के बीच चल रहे आपसी विवाद पर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने शनिवार को एक बयान दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग जिम्मेदार नेता हैं। वे दोनों आपसी मसलों को सुलझाने में सक्षम हैं।

• पुतिन ने न्यूज एजेंसी से कहा कि भारत और चीन के बीच किसी के दखल की जरूरत नहीं है। रूसी राष्ट्रपति के इस बयान को इशारों में अमेरिका को दी गई सलाह माना जा रहा है।

• दरअसल हाल में बने 4 देशों भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के बनाए संगठन क्वॉड से चीन को आपत्ति है।

• उसका कहना है कि इसके जरिए अमेरिका इस क्षेत्र में दखल बढ़ा रहा है। इस संगठन के जरिए वह रणनीतिक रूप से अहम हिंद-प्रशांत क्षेत्र में पेइचिंग के प्रभाव को नियंत्रित करना चाहता है। इस संगठन में अमेरिका का होना ही चीन की आपत्ति की वजह है, क्योंकि चीन से भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया की सीमा लगती है, लेकिन अमेरिका की नहीं।

रूस भी क्वॉड संगठन का आलोचक


• रूस पहले ही इस संगठन की आलोचना कर चुका है। अब पुतिन ने कहा है कि कोई राष्ट्र किन्हीं दो या उससे ज्यादा देशों के बीच मामलों में पहल करने के लिए किस तरह शामिल होता है या उन देशों से किस तरह रिश्ते बनाता है। यह तय करना या आकलन करना रूस का काम नहीं है। हालांकि, कोई भी पार्टनरशिप किसी दूसरे देश के खिलाफ की जाए, यह भी सही नहीं है।

• क्वॉड संगठन में भारत के शामिल होने पर पुतिन ने कहा कि चीन का दावा है कि यह संगठन उसके खिलाफ और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बीजिंग के प्रभाव को नियंत्रित करने के लिए बनाया गया है। हालांकि, इससे रूस के भारत और चीन के साथ जो आपसी रिश्ते हैं, उस पर असर नहीं पड़ेगा। इनमें कोई विरोधाभास नहीं होगा।

पड़ोसी देशों के बीच कुछ मुद्दों पर अनबन बनी रहती है: पुतिन


• रूसी राष्ट्रपति ने कहा कि मैं जानता हूं कि भारत और चीन के बीच कुछ मुद्दों को लेकर रिश्ते सही नहीं हैं। लेकिन पड़ोसी देशों के बीच ऐसी बातें चलती रहती हैं। मैं व्यक्तिगत तौर पर प्रधानमंत्री मोदी और चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग को जानता हूं। उनका स्वभाव भी जानता हूं। दोनों ही जिम्मेदार नेता हैं और एकदूसरे के साथ पूरे सम्मान के साथ पेश आते हैं। वे एकदूसरे की गरिमा बनाए रखते हैं।

• मुझे पूरा यकीन है कि दोनों के सामने या बीच में कोई भी मुद्दा आ जाए, वे उसका समाधान निकाल ही लेंगे। इसमें सबसे जरूरी बात यह है कि किसी दूसरे क्षेत्र के देश के बीच में नहीं आना चाहिए।

अमेरिका भारत को अहम साझेदार मानता है


• हाल ही में अमेरिकी रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चुनौतियों का सामना करने के लिए भारत को एक अहम साझेदार बताया था। साथ ही दोनों देशों के आपसी संबंधों को प्राथमिकता देने की बात कही थी।

• पेंटागन के प्रवक्ता जॉन कर्बी ने ऑस्टिन की राय पर कहा था कि वह ऐसा करने की पहल पर काम करने के लिए बहुत उत्सुक हैं। उन्होंने कहा कि ऑस्टिन भारत को एक अहम साझीदार मानते हैं, खासकर जब आप हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सभी चुनौतियों पर विचार करते हैं।

भारत-रूस के रिश्ते का आधार विश्वास है


• हाल ही में देखा गया है कि रूस और चीन के बीच रिश्ते काफी मजबूत हुए हैं। इसका भारत और रूस के बीच रिश्तों पर क्या असर होगा, इस सवाल के जवाब में पुतिन ने कहा कि इंडिया और रूस के बीच रिश्ते का आधार विश्वास है।

• दोनों देशों के बीच रिश्ते काफी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। हमारे बीच अर्थव्यव्यवस्था से लेकर ऊर्जा और हाई टेक्नोलॉजी तक कई चीजों तक सहयोग है। रक्षा के क्षेत्र में भी सिर्फ रूसी हथियारों तक ही नहीं बल्कि आपसी गहरे और मजबूत रिश्ते हैं।

• पुतिन ने कहा कि भारत इकलौता ऐसा साझेदार है, जिसके साथ रूस उसी के देश में मिलकर अत्याधुनिक हथियार बना रहा है। हमारे रिश्ते यहीं सीमित नहीं हैं। इससे भी काफी आगे तक के हैं।


3. जी7 देशों में ग्लोबल टैक्सेशन सिस्टम पर सहमति:भारत भी गूगल-फेसबुक जैसी मल्टीनेशनल कंपनियों पर 15% टैक्स लगा सकेगा, विदेशी निवेश आकर्षित करने में मदद मिलेगी:-

• दुनिया की 7 बड़ी अर्थव्यवस्थाओं वाले देशों में ग्लोबल टैक्सेशन सिस्टम पर सहमति बन गई है। इन देशों को ग्रुप ऑफ सेवन यानी जी7 कहा जाता है। इनमें अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस, कनाडा, इटली और जापान जैसे विकसित देश शामिल हैं।

• हाल ही में लंदन में जी7 देशों के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंकों के गवर्नर की दो दिवसीय बैठक में 15% ग्लोबल मिनिमम कॉरपोरेट टैक्स को लेकर सहमति बनी है। इसका मतलब यह है कि यह देश गूगल, फेसबुक और ट्विटर जैसी मल्टीनेशनल कंपनियों से कम से कम 15% टैक्स ले सकेंगे।

इस समझौते से भारत को भी फायदा मिलेगा

• जी7 देशों के बीच ग्लोबल मिनिमम कॉरपोरेट टैक्स को लेकर हुए समझौते से भारत को भी फायदा मिलेगा। जानकारों का कहना है कि भारत का मौजूदा टैक्स रेट ग्लोबल मिनिमम टैक्स रेट से ज्यादा है। इससे भारत में कारोबार करने वाली कंपनियों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

• नांगिया एंडर्सन इंडिया के चेयरपर्सन राकेश नांगिया का कहना है कि इससे भारत अपने बड़े बाजार के लिए विदेशी निवेश आकर्षित कर सकेगा। उन्होंने कहा कि भारत के पास कंपटीटिव दरों पर अच्छी लेबर, निर्यात के लिए रणनीतिक लोकेशन और एक संपन्न प्राइवेट सेक्टर है।

टेक कंपनियों के लिए बड़ा बाजार है भारत

• कंसल्टिंग फर्म एकेएम ग्लोबल टैक्स पार्टनर के अमित माहेश्वरी का कहना है कि जी7 देशों के बीच हुए समझौते से भारत को लाभ मिलने की उम्मीद है। इसका कारण यह है कि भारत टेक कंपनियों के लिए बड़ा बाजार है।

• यह देखा जाना बाकी है कि देशों के बीच बाजार का आवंटन कैसा होगा। कम से कम 15% ग्लोबल मिनिमम टैक्स का मतलब है कि भारत की टैक्स प्रणाली अभी काम करती रहेगी और भारत निवेश को लगातार आकर्षित करता रहेगा।

भारत जैसे देशों के लिए मार्गदर्शक रहेगा ग्लोबल मिनिमम कॉरपोरेट टैक्स


• ईवाई इंडिया नेशनल टैक्स लीडर के सुधीर कपाड़िया का कहना है कि ग्लोबल मिनिमम कॉरपोरेट टैक्स रेट भारत जैसे बड़े और विकासशील देशों के लिए मार्गदर्शक साबित होगा। इसका कारण यह है कि भारत जैसे देशों को प्रत्यक्ष विदेशी निवेश बढ़ाने के लिए कॉरपोरेट टैक्स दरों को कम रखना काफी कठिन होता है।

• यहां तक कि भारत का नई मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स के लिए घोषित किया गया 15% टैक्स रेट भी ग्लोबल मिनिमम कॉरपोरेट टैक्स रेट से मेल खाता है। इससे भारत में मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के प्रयासों पर भी असर नहीं पड़ेगा।

ग्लोबल मिनिमम कॉरपोरेट टैक्स रेट की जरूरत क्यों पड़ी?

• मल्टीनेशनल कंपनियां कम टैक्स रेट वाले देशों में लाभ छिपाकर टैक्स देने से बचती हैं। इसको रोकने के लिए समान टैक्स लगाया गया है।

• इस कदम से सभी कंपनियों को कारोबार के समान अवसर मिलेंगे और टैक्स चोरी पर लगाम लगाई जा सकेगी।

• कई कंपनियों क्रॉस-बॉर्डर टैक्सेशन की कमियों का लाभ उठाते हुए टैक्स देने से बचती हैं। नए समझौते से इस पर भी रोक लग सकेगी।

भारत ने सितंबर 2019 में घटाया था कॉरपोरेट टैक्स

• भारत ने सितंबर 2019 में कॉरपोरेट टैक्स की दरों में कटौती की थी। मौजूदा कंपनियों के लिए टैक्स की दरों को घटाकर 25% किया गया था। वहीं नई घरेलू मैन्युफैक्चरिंग यूनिट लगाने पर टैक्स की दर को 22% से घटाकर 15% किया गया था।


4. नए शांति मिशन पर काबुल में खलीलजाद, अफगानिस्तान के राष्ट्रपति ने की मुलाकात

• अफगानिस्तान के राष्ट्रपति मोहम्मद अशरफ गनी (Afghan President Mohammad Ashraf Ghani) ने काबुल पहुंचे अमेरिका के अंतर मंत्रालयी प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व अफगानिस्तान शांति प्रक्रिया के लिए नियुक्त वाशिंगटन के विशेष प्रतिनिधि जलमय खलीलजाद (Zalmay Khalilzad) कर रहे हैं। राष्ट्रपति के कार्यालय के अनुसार, रविवार को दोनों पक्षों की मुलाकात के दौरान सहयोग बढ़ाने व द्विपक्षीय राजनीतिक, सुरक्षा व आर्थिक संबंधों को बनाए रखने समेत अनेक मुद्दों पर चर्चा की गई।

• पिछले माह के अंत में अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जैक सुलिवन ने अफगानिस्तान के अपने समकक्ष हमदुल्लाह मोहिब से बात की थी। शांति प्रक्रिया पर चर्चा करते हुए उन्होने जोर दिया कि अफगानिस्तान से अमेरिकी सेना की वापसी के बावजूद उनका देश अफगानिस्तान की सरकार और उसके लोगों के साथ खड़ा रहेगा। उन्होंने


5. हंगरी में चीनी यूनिवर्सिटी बनाने के विरोध में हजारों लोग सड़कों पर उतरे; कहा- इससे कम्युनिस्ट हावी हो जाएंगे

• हंगरी में चीन की फुदान यूनिवर्सिटी का कैम्पस खोले जाने का विरोध शुरू हो गया है। लोगों का आरोप है कि हंगरी सरकार ने चीन के दबाव में आकर राजधानी बुडापेस्ट में इस कैम्पस को खोले जाने की मंजूरी दी थी। विरोध करने वालों का आरोप है कि अगर चीनी यूनिवर्सिटी का कैम्पस देश में खुलेगा तो इससे कम्युनिस्ट विचारधारा को बढ़ावा मिलेगा और कम्युनिस्ट हावी हो जाएंगे।

• एक महीने में दूसरा मौका है जब चीन को यूरोप में विरोध का सामना करना पड़ा है। इसके पहले लिथुआनिया ने चीन के 17+1 संगठन से अलग होने का फैसला किया था। लिथुआनिया ने बाकी देशों से भी ऐसा ही करने की अपील की थी। लिथुआनिया सरकार ने कहा था- चीन बंटवारे की रणनीति अपना रहा है।

हंगरी में क्या हुआ


• हंगरी सरकार ने राजधानी बुडापेस्ट में चीन की फुदान यूनिवर्सिटी का कैम्पस खोलने की मंजूरी दी थी। इसका काम भी शुरू हो गया था। प्रधानमंत्री विक्टर ओरबन ने इसे शिक्षा में सुधार के लिए जरूरी फैसला बताया था। विक्टर को चीन का करीबी माना जाता है। पहले तो इसका मामूली विरोध हुआ। अब हजारों लोग सड़कों पर उतर आए हैं।

• CNN से बातचीत में 22 साल के स्टूडेंट पैट्रिक ने कहा- हमारी सरकार ही देशद्रोह कर रही है। उसके इस कदम से हमारी एजुकेशन की क्वॉलिटी खराब होगी और इसका सीधा असर पूरी यूरोपीय यूनियन पर पड़ेगा। मैं तो चाहता हूं कि हमारी सरकार चीन से रिश्ते ही न रखे।

हमारी यूनिवर्सिटी को ही बेहतर बनाया जाए...


• पैट्रिक कहते हैं- जो फंड चीनी यूनिवर्सिटी को तैयार करने पर खर्च किया जा रहा है, वो हमारी यूनिवर्सिटीज की बेहतरी पर खर्च किया जाए तो इससे देश और यूरोपीय यूनियन को फायदा होगा।

• एक और छात्र ने कहा- जो जगह यूनिवर्सिटी के लिए दी गई है, वहां हमारे हॉस्टल बनने थे। हमारे रहने की जगह चीन जैसी किसी विदेशी ताकत को कैसे दी जा सकती है। चीन में तानाशाही हो सकती है, यहां तो ऐसा मुमकिन नहीं है।

• खास बात यह है कि बुडापेस्ट के मेयर भी सरकार का विरोध कर रहे हैं और उन्होंने प्रदर्शनकारियों के साथ उनके मार्च में भी हिस्सा लिया। उन्होंने कहा- हमारी सरकार चीन की तानाशाही को यहां लेकर आना चाहती है, हम ये कभी नहीं होने देंगे।

सरकार ने क्या किया


• अप्रैल के पहले हफ्ते में हंगरी सरकार ने बुडापेस्ट के बाहरी इलाके में फुदान यूनिवर्सिटी का कैम्पस खोलने को मंजूरी दी। यहां मंजूरी मिली, और वहां काम भी शुरू हो गया। यानी पहले से काफी कुछ पक रहा था। सरकार का कहना है कि फुदान वर्ल्ड क्लास यूनिवर्सिटी है और इससे एजुकेशन लेवल इम्प्रूव होगा। विरोध प्रदर्शन के बाद सरकार इसे फिजूल और सियासी पैंतरा बता रही है।

दलाई लामा और उईगर मुस्लिमों का मुद्दा भी उठा


• चीन के लिए इन प्रदर्शनों में परेशानी की एक और वजह भी है। प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने बैनर्स लिए हुए थे। इनमें दलाई लामा और शिनजियांग प्रांत के उईगर मुस्लिमों के साथ हो रही ज्यादती का जिक्र था। चीन इन दोनों ही मुद्दा पर बचाव की मुद्रा में होता है।

• बुडापेस्ट के मेयर जर्गेली कार्कोनी ने तो यहां तक कहा कि शहर की दो सड़कों के नाम दलाई लामा और उईगर मुस्लिमों के शहीदों के नाम पर रखे जाएंगे।

• चीन का आरोप है कि हंगरी के कुछ नेता लोकप्रियता पाने के लिए इस तरह की हरकतें कर रहे हैं और ये लोग दोनों देशों के रिश्ते खराब करना चाहते हैं। हंगरी सरकार का चीन के प्रति झुकाव इस कदर है कि पिछले हफ्ते जब हॉन्गकॉन्ग के मुद्दे पर यूरोपीय यूनियन चीन के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाना चाहती थी तो हंगरी सरकार ने इसका विरोध किया था।


NATIONAL


6. Performance Grading Index: यूपी, बिहार सहित कई राज्यों ने स्कूली शिक्षा में सुधारा प्रदर्शन; पंजाब, केरल शीर्ष पर

• स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में सुधार के लिए उठाए गए कदमों का असर अब साफ दिखने लगा है। शिक्षा मंत्रालय की ओर से स्कूली शिक्षा में होने वाले बदलावों को लेकर जारी परफारमेंस ग्रेडिंग इंडेक्स से यह बात सामने आई है।

• उत्तर प्रदेश, बिहार सहित ज्यादातर राज्यों ने अपने पिछले प्रदर्शन में सुधार किया है। स्कूलों से जुड़ी इस रिपोर्ट में पंजाब, चंडीगढ़, तमिलनाडु, केरल व अंडमान-निकोबार सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में शीर्ष पर रहे हैं। यहां स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में तेजी से बदलाव देखा गया है।


पीजीआइ में शिक्षा की गुणवत्ता, इंफ्रास्ट्रक्चर, पुस्तकालय, छात्र-शिक्षक अनुपात शामिल हैं

• स्कूली शिक्षा में होने वाले बदलावों का अध्ययन करने के लिए शिक्षा मंत्रालय की ओर से सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का हर साल परफारमेंस ग्रेडिंग इंडेक्स (पीजीआइ) तैयार किया जा रहा है। इस कड़ी में मंत्रालय ने रविवार को वर्ष 2019-20 का इंडेक्स जारी किया है। जो मंत्रालय की ओर से जारी की गई स्कूलों के प्रदर्शन से जुड़ी तीसरी रिपोर्ट है।

• इससे पूर्व 2017-18 से जुड़ी पीजीआइ रिपोर्ट 2019 में जारी की गई थी। यह इंडेक्स सभी राज्यों में स्कूली शिक्षा से जुड़ी गतिविधियों का 70 मानकों पर अध्ययन के बाद तैयार किया जाता है। जिसमें शिक्षा की गुणवत्ता, इंफ्रास्ट्रक्चर, पुस्तकालय, छात्र-शिक्षक अनुपात आदि शामिल हैं।

स्कूली शिक्षा में प्रदर्शन की पहली कैटेगरी में कोई राज्य नहीं


• स्कूली शिक्षा से जुड़ी वर्ष 2019-20 की पीजीआइ रिपोर्ट में स्कूली शिक्षा में प्रदर्शन के आधार पर राज्यों की दस कैटेगरी बनाई गई हैं। इसकी पहली कैटेगरी में फिलहाल कोई राज्य नहीं आ सका है।

दूसरी कैटेगरी


• इंडेक्स की दूसरी कैटेगरी में पंजाब, चंडीगढ़, केरल, तमिलनाडु और अंडमान-निकोबार शामिल हैं। पंजाब और अंडमान-निकोबार ने अपने पिछले प्रदर्शन में करीब 20 फीसद से ज्यादा सुधार कर यह जगह बनाई है।

तीसरी कैटेगरी


• तीसरी कैटेगरी में गुजरात, हरियाणा, महाराष्ट्र, दिल्ली, राजस्थान, पुडुचेरी और दादर और नगर हवेली शामिल हैं।

चौथी कैटेगरी


• चौथी कैटेगरी में आंध्र प्रदेश, बंगाल, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, त्रिपुरा, ओडिशा, हिमाचल प्रदेश और दमन व दीव शामिल हैं।

पांचवी कैटेगरी


• पांचवी कैटेगरी में गोवा, उत्तराखंड, झारखंड, मणिपुर, सिक्किम, तेलंगाना और जम्मू-कश्मीर जैसे राज्य हैं।

छठी कैटेगरी


• छठी कैटेगरी में असम, बिहार, मध्य प्रदेश और मिजोरम हैं।

सातवीं कैटेगरी


• सातवीं कैटेगरी में छत्तीसगढ़, नगालैंड, अरुणाचल प्रदेश शामिल हैं।

आठवीं कैटेगरी


• आठवीं कैटेगरी में मेघालय शामिल है।


• खासबात यह है कि इस दौरान मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ को छोड़ दें, तो सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने पिछले साल यानी वर्ष 2018-19 की पीजीआइ के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया है। उत्तर प्रदेश ने अपने पिछले प्रदर्शन में करीब बीस फीसद का सुधार किया है। वहीं बिहार ने भी अपने प्रदर्शन में करीब दस फीसद सुधार किया है।


ECONOMY


7. बदलेगा थोक मूल्य सूचकांक


• जल्द ही ग्रीन टी, सौर ऊर्जा, सैनिटाइजर, कॉर्न फ्लेक्स, ब्राउन राइस, मशरूम, तरबूज, विकेट कीपिंग दस्ताने, बांसुरी, बिजली की इस्तरी (इलेक्ट्रिक आयरन), एलोवेरा जैसे कई उत्पाद संशोधित थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) में शामिल हो सकते हैं। महंगाई की तस्वीर बताने वाले इस सूचकांक में बदलाव होने जा रहा है और उसका आधार वर्ष 2011-12 की जगह 2017-18 किया जाएगा।

• नीति आयोग के सदस्य प्रोफेसर रमेश चंद की अगुआई वाले डब्ल्यूपीआई संशोधन कार्यदल की प्रारूप रिपोर्ट के मुताबिक इस सूचकांक में शामिल उत्पादों की संख्या मौजूदा 692 से बढ़ाकर 1,196 किए जाने के आसार हैं, जिससे यह सूचकांक ज्यादा समावेशी बनेगा। डब्ल्यूपीआई सूचकांक में खाद्य सूचकांक का हिस्सा मौजूदा 24 फीसदी से बढ़कर 27 फीसदी होने के आसार हैं।

• इसमें ईंधन एवं ऊर्जा का हिस्सा घटकर 11 फीसदी रह सकता है, जो 2011-12 की शृंखला में 13 फीसदी था। इस उच्च स्तरीय समूह ने छह कारोबारी सेवा कीमत सूचकांक- बैंकिंग,