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समाचार विचार 9.6.21



INTERNATIONAL


1.UNGA को मिला नया अध्यक्ष, मालदीव के विदेश मंत्री अब्दुल्ला शाहिद ने जीता चुनाव

• मालदीव के विदेश मंत्री अब्दुल्ला शाहिद को सोमवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 76वें सत्र का अध्यक्ष चुना गया और उन्हें 143 मत मिले जबकि 191 सदस्यों ने मतदान में भाग लिया। शाहिद सितंबर में शुरू होने वाले संयुक्त राष्ट्र महासभा के 76वें सत्र की अध्यक्षता करेंगे। 193 सदस्यीय महासभा ने अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए सोमवार को मतदान किया। चुनाव में शाहिद के साथ ही अफगानिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री डॉ जलमई रसूल भी उम्मीदवार थे और उन्हें 48 मत मिले।

• संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन ने ट्वीट कर शाहिद को उनकी जीत पर बधाई दी। महासभा के अध्यक्ष पद के लिए हर साल गुप्त मतदान के जरिए चुनाव किया जाता है और जीत के लिए साधारण बहुमत की आवश्यकता होती है। शाहिद तुर्की के राजनयिक वोल्कान बोज़किर का स्थान लेंगे जो संयुक्त राष्ट्र महासभा के 75वें सत्र के अध्यक्ष थे।

• मालदीव ने दिसंबर 2018 में शाहिद के नामांकन की घोषणा कर दी थी और भारत ने भी उन्हें समर्थन देने का पहले ही ऐलान कर दिया था। तब अफगानिस्तान ने अपना दावा तक पेश नहीं किया था। शाहिद के अलावा अफगानिस्तान के विदेश मंत्री ज़ाल्मे रसूल ने भी नामांकन किया था लेकिन तब तक शाहिद जबरदस्त समर्थन जुटा चुके थे। चुनाव में जीत पर भारत ने मालदीव के विदेश मंत्री को बधाई दी है और काम करने के लिए उत्सुकता भी जताई है।


2. संयुक्त राष्ट्रज में अहम रोल निभाने के लिए हुआ भारत का चयन, ECOSOC में दो वर्ष का होगा कार्यकाल

• भारत संयुक्त् राष्ट्रज के एक अहम ऑर्गेन आर्थिक और सामाजिक परिषद (इकनॉमिक एंड सोशल कांउसिल) के लिए चुना गया है। ये यूएन प्रमुख छह भागों में से एक है। भारत को वर्ष 2022-2024 के लिए चुना गया है। भारत अब इसके 54 सदस्यों में से एक है।

• संयुक्ते राष्ट्रद में भारत के राजदूत टीएस त्रीमूर्ति ने इसमें चयन को लेकर सभी का धन्येवाद किया है। अपने एक ट्वीट में उन्होंने लिखा है कि वो उन सभी का धन्येवाद अदा करते हैं जिन्होंीने भारत में पक्ष में वोट दिया। ये परिषद संयुक्त‍ राष्ट्र के विभिन्नं लक्ष्योंष की प्राप्ति के लिए एक अहम भूमिका अदा करती है।

• ये संयुक्ती राष्ट्र् का एक ऐसा केंद्र है जहां पर डिबेट के जरिए विचारों का आदान-प्रदान किया जाता है कि आगे बढ़ने और यूएन के लक्ष्या पूरा करने का मार्ग तय किया जाता है। ये संयुक्तग राष्ट्रक की बैठकों और सम्मेवलनों के लिए भी उत्त ररादयी होती है।

• सोमवार को हुए चुनाव में भारत को इस परिषद का सदस्यक एशिया प्रशांत क्षेत्र के तौर पर चुना गया है। इसमें अफगानिस्तासन, कजाखिस्ताेन और ओमान शामिल थे।

• अफ्रीकी देशों में से मॉरिशस, ट्यूनेशिया, तंजानिया, एसवाटिनी और कोट डी आईवोरे को, पूर्वी यूरोपीय देशों में से क्राेएशिया, चेक रिपब्लिक, दक्षिण अमेरिका और केरेबियन देशों से बेल्जीद, चिली और पेरू को इसके लिए चुना गया है। सोमवार को हुए एक चुनााव में जनवरी से दिसंबर 2022 के लिए ग्रीस, न्यू जीलैंड, डेनमार्क ओर इजरायल को 1 जनवरी 2022 से 31 दिसंबर 22 तक के लिए चुना गया है।

• आपको बता दें कि भारत फिलहाल में वर्ष 2021-22 के लिए यूएन सुरक्षा परिषद में अस्थाायी सदस्य् के तौर पर अपनी सेवाएं दे रहा है। जहां तक इकोसोक की बात है तो आपको बता दें कि इसका गठन 45 में किया गया था। ये यूएन के छह प्रमुख भागों में से एक है।

• इसके 54 सदस्योंग को जनरल असेंबली द्वारा तीन वर्ष के लिए चुना जाता है। क्षेत्रिय आधार पर इसमें किसी को सदस्यसता मिलती है। जैसे अफ्रीकी देशों के लिए 14, एशियाई देशों के लिए 11, यूरोपीय देशों के लिए 6, दक्षिण अमेरिकी देशों के लिए 10, केरिबियाई और पश्चिमी यूरोप समेत कुछ अन्यम क्षेत्रों के लिए 13 सीटें हैं।


NATIONAL


3. लक्षद्वीप में संशोधन कानूनों के विरोध में 12 घंटे की भूख हड़ताल, लक्षद्वीप बचाओ मोर्चा ने किया प्रदर्शन

• लक्षद्वीप के निवासियों ने प्रशासन द्वारा लागू की गई नीतियों के विरोध में सोमवार को 12 घंटे की भूख हड़ताल की। प्रदर्शनकारियों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे। अपने घरों के बाहर सभी ने हाथों में तख्तियां लेकर धरना दिया। प्रदर्शनकारियों ने कठोर कानून वापस लेने की मांग की है। यह प्रदर्शन लक्षद्वीप बचाओ मोर्चा ने आहूत किया था।

• द्वीप के लोग प्रशासक प्रफुल्ल खोडा पटेल द्वारा लाए गए नए संशोधनों का विरोध कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि ये संशोधन द्वीप के लोगों के हितों के खिलाफ है। द्वीप के निवासी लक्षद्वीप समाज विरोधी गतिविधि रोकथाम नियम (गुंडा अधिनियम), लक्षद्वीप पशु संरक्षण नियम और लक्षद्वीप पंचायत नियम 2021 एवं अन्य का विरोध कर रहे हैं।

• विरोध प्रदर्शन में हिस्सा ले रहे लोगों ने कहा कि हम इन द्वीपों में हितों की सुरक्षा चाहते हैं। प्रशासन हमारी मांगों को नजरअंदाज कर रहा है, इसलिए हमने विरोध प्रदर्शन किया है।

• मामला दरअसल शराब पर लगा प्रतिबंध हटा देने का और बीफ को प्रतिबंधित कर देने का है। बताया गया कि लक्षद्वीप में कुछ फीसद लोगों को छोड़कर सभी मुस्लिम आबादी के लोग बसे हुए हैं। वहां पर बीफ पर प्रतिबंध नहीं था, लेकिन शराब पर प्रतिबंध था, लेकिन अब लक्षद्वीप के प्रशासक ने बीफ को प्रतिबंधित करते हुए शराब पर लगा प्रतिबंध हटा दिया है।



ECONOMY


4. विश्व बैंक की तरफ से भारत को 50 करोड़ डॉलर की मदद का ऐलान

• विश्व बैंक ने देश में कोरोना महामारी के बीच 50 करोड़ डॉलर की मदद का ऐलान किया है। इस रकम का इस्तेमाल छोटे लघु और मझोले उद्योगों यानी एमएसएमई को हुए नुकसान से उबारने के लिए किया जाएगा। इससे पहले जुलाई 2020 में भी विश्व बैंक ने 75 करोड़ डॉलर की वित्तीय मदद की थी।

• विश्व बैंक के मुताबिक इस कदम से देश के 5.5 लाख एमएसएमई कारोबारियों को फायदा पहुंचेगा। छोटे कारोबारियों की वित्तीय मदद कार्यक्रम आरएएमपी के तहत पहले चरण में इस सेक्टर में कैश फ्लो बढ़ाने और कर्ज की जरूरतों को पूरा करने पर फोकस होगा। इसके अलावा आर्थिक सुधार के लिए विश्व बैंक एमएसएमई में उत्पादकता और वित्तपोषण बढ़ाने में भारत सरकार के प्रयासों का भी समर्थन करेगा।

• भारत में विश्व बैंक के कंट्री डायरेक्टर जुनैद अहमद ने कहा कि एमएसएमई सेक्टर देश की अर्थव्यवस्था की एक महत्वपूर्ण रीढ़ है, जो कोविड -19 महामारी से बुरी तरह प्रभावित हुआ है। उन्होंने कहा आरएएमपी कार्यक्रम के जरिए एमएसएमई क्षेत्र में लंबी अवधि के लिए उत्पादकता आधारित विकास की नींव रखनी बेहद जरूरी है। साथ ही नौकरियों के सृजन की भी पड़े पैमाने पर जरूरत है।

• इन प्रयासों के जरिए ही विश्व बैंक उत्पादन और रोजगार के मोर्चो पर कोरोना के पहले के स्तर पर लौटने के लिए फर्मों का समर्थन करने के प्रयासों को तेज करेगा। ये भी जानकारी दी गई है कि राष्ट्रीय स्तर की गतिविधियों के अलावा यह कार्यक्रम राज्यों में भी चलेगा, जिसमें पंजाब, तमिलनाडु, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र में में कार्यक्रम लागू किए जाएंगे। साथ ही दूसरे राज्यों को भी आगे इसमें शामिल किया जाएगा।

• विश्वबैंक के मुताबिक देश में एमएसएमई सेक्टर आर्थिक गतिविधियों का प्रमुख हिस्सा है। देश की जीडीपी में इसका 30 फीसदी योगदान है वहीं निर्यात में 40 फीसदी हिस्सा रहता है।

• साथ ही देश के कुल 5.8 करोड़ एमएसएई कारोबारियों में से 40 फीसदी को औपचारित तौर पर वित्तीय सहायता नहीं मिल पाती है। ऐसे में विश्वबैंक और उसकी सहायक शाखा इंटरनेशनल फाइनेंस कॉरपोरेशन इस सेक्टर की मजबूती में सहायता करेगी।


5. थोक महंगाई की गणना का फार्मूला बदलेगा, शामिल उत्पादों की संख्या 1196 किए जाने के आसार

• सरकार थोक महंगाई सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) की गणना का फार्मूला बदलने जा रही है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, डब्ल्यूपीआई को वित्त वर्ष 2017-18 से आंकने की योजना है जो अभी वित्त वर्ष 2011-12 से आंका जाता है। इसके साथ ही इस सूचकांक में शामिल उत्पादों की संख्या मौजूदा 692 से बढ़ाकर 1,196 किए जाने के आसार हैं, जिससे यह सूचकांक ज्यादा सटीक बन सके।

• नीति आयोग के सदस्य प्रोफेसर रमेश चंद की अगुआई वाले डब्ल्यूपीआई संशोधन कार्यदल की प्रारूप रिपोर्ट के मुताबिक, जल्द ही ग्रीन टी, सौर ऊर्जा, सैनिटाइजर, कॉर्न फ्लेक्स, ब्राउन राइस, मशरूम, तरबूज, विकेट कीपिंग दस्ताने, बांसुरी, बिजली की इस्तरी (इलेक्ट्रिक आयरन), एलोवेरा जैसे कई उत्पाद संशोधित थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) में शामिल हो सकते हैं।

• साथ ही आधार वर्ष 2011-12 की जगह 2017-18 किया जाएगा। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार की यह तैयारी तेजी से बढ़ती महंगाई पर अंकुश लगाने की दिशा में है। इस बदलाव से वस्तुओं की कीमतों पर नजर रखने में आसानी होगी जिससे महंगाई पर लगाम लागना मुश्किल नहीं होगा।

मौजूदा सूचकांक के भारांश में भी हेरफेर

• डब्ल्यूपीआई के नए सूचकांक में शामिल वस्तुओं के भारांश में भी हेरफेर करने की तैयारी है। जानकारी के मुताबिक, खाद्य सूचकांक का हिस्सा मौजूदा 24 फीसदी से बढ़कर 27 फीसदी होने के आसार हैं। इसमें ईंधन एवं ऊर्जा का हिस्सा घटकर 11 फीसदी रह सकता है, जो 2011-12 की शृंखला में 13 फीसदी था। इस उच्च स्तरीय समूह ने छह कारोबारी सेवा कीमत सूचकांक- बैंकिंग, बीमा, प्रतिभूति, हवाई परिवहन, दूरसंचार, रेलवे भी जारी करने की सिफारिश की है।

महंगाई की ज्यादा साफ तस्वीर सामने आएगी

• मौजूदा डब्ल्यूपीआई का आधार वर्ष 2011-12 है। इसमें शामिल उत्पादों की संख्या सीमित है, इसलिए यह हाल के वर्षों में उत्पादन रुझान में हुए बदलाव को पूरी तरह से पकड़ने में नाकाम रहा है। उत्पाद की संख्या बढ़ने से बीते वर्षों के दौरान उपभोग के तरीके में बदलाव वाले ज्यादा उत्पादों का पता लगाने में मदद मिल सकती है। ऐसे में महंगाई की ज्यादा साफ तस्वीर सामने आएगी। उत्पादन काफी हद तक उपभोग से ही तय होता है।

अहमियत के आधार पर उत्पादों का चयन

• मसौदा कहता है कि संशोधित शृंखला में उत्पादों का चयन उनकी अर्थव्यवस्था में तुलनात्मक अहमियत के आधार किया गया है। उत्पादन में अहम मूल्य वाले सभी महत्त्वपूर्ण उत्पादों को चुना गया है। कृषि जिंसों में ईसबगोल, एलोवेरा एवं मेंथॉल जैसे औषधीय पौधे, सौंफ एवं मेथी (मसाले) मोठ (दाल) मशरूम (सब्जी) और तरबूज (फल) जैसे नए उत्पाद शामिल किए गए हैं।

पत्तेदार सब्जियां को शामिल नहीं किया गया

• कीमतें पता करने में तकनीकी दिक्कत के कारण पत्तेदार सब्जियों को इसमें शामिल नहीं किया गया है। पत्तेदार सब्जियां खास मौसम में ही उपलब्ध होने, आम तौर पर इनकी खरीद-बिक्री किलोग्राम जैसे मानक में नहीं होने और किस्मों में समानता न होने के कारण इनकी कीमतें पता करना मुश्किल होता है।

सौर ऊर्जा को पहली बार किया गया शामिल

• सरकार नवीकरणीय ऊर्जा पर जोर दे रही है, इसलिए संशोधित डब्ल्यूपीआई में सौर ऊर्जा की कीमतों में बदलाव भी शामिल होगा। पवन ऊर्जा सूचकांक के बारे में भी विचार किया गया, लेकिन आधार वर्ष के लिए आंकड़े उपलब्ध नहीं होने के कारण इस पर आगे विचार नहीं किया गया।

• देश में अब खुदरा महंगाई का मापक है, लेकिन डब्ल्यूपीआई ज्यादा पुराना होने से इसे अब भी महंगाई में कीमतों का व्यापक मापक माना जाता है। डब्ल्यूपीआई राष्ट्रीय लेखा सांख्यिकी के संकलन में मदद देता है।

• इसका व्यापक इस्तेमाल कच्चे माल, संयंत्र एवं मशीनरी, निर्माण, बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को खरीदने में एस्केलेशन क्लॉज में भी होता है। इसे टोल दरों, आवश्यक दवाओं की कीमतों, प्रमुख बंदरगाहों, बिजली आदि की शुल्क दरें तय करने में भी अपनाया जाता है।


SCIENCE


6. 'डेल्टा' वैरिएंट से महामारी की तीसरी लहर का खतरा, 40 फीसद अधिक खतरनाक

• देश में महामारी की दूसरी लहर के जिम्मेवार डेल्टा वैरिएंट B.1.617.2 का असर अब कमजोर होने लगा है लेकिन दुनिया के अन्य देशों में अभी यह परेशानी का सबब बना हुआ है। इस वैरिएंट को विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 'डेल्टा' नाम दिया है। इस वैरिएंट से संक्रमण का पहला मामला पिछले साल अक्टूबर में भारत में ही आया था।

• कोरोना वायरस के इस डबल म्यूटेंट वैरिएंट 'डेल्टा' ने देश में तबाही मचा दी, और लाखों लोगों को चपेट में ले लिया। बता दें कि डेल्टा वैरिएंट के बाद अब नए वैरिएंट के आने की खबरें हैं।

• WHO का कहना है कि वायरस के अन्य वैरिएंट अल्फा, बीटा, गामा की तुलना में डेल्टा अधिक खतरनाक है और यह कई गुना तेजी से फैलता है। संगठन ने यह भी कहा जिंदगियों के लिए सबसे अधिक घातक भी यही वैरिएंट है।

• ब्रिटेन में भी डेल्टा वैरिएंट का खौफ है। यहां महामारी की तीसरी लहर का जिम्मेवार भी इसी वैरिएंट को बताया गया है। यहां के स्वास्थ्य मंत्री मैन हेनकॉक के अनुसार बाकी दोनों वैरिएंट की तुलना में डेल्टा 40 फीसद अधिक खतरनाक है।

• वहीं सीनियर कैबिनेट मंत्री ने कहा कि देश में कोरोना वायरस संक्रमण के मामलों में हालिया बढ़ोतरी के पीछे 'डेल्टा' है। इसने 21 जून से निर्धारित अनलॉक योजना को और मुश्किल बना दिया है। उन्होंने बताया कि डेल्टा से संक्रमित अस्पताल में भर्ती अधिकतर लोगों को वैक्सीन की डोज नहीं मिली थी।

• ब्रिटेन में जिन लोगों को वैक्सीन की खुराक दी जा चुकी है उनपर भी इसका खतरा है जो चिंता का विषय है। ब्रिटेन में डेल्टा वैरिएंट के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। यहां इस वैरिएंट के अब तक कुल 12 हजार से ज्यादा केस मिले हैं।


Source of the News (With Regards):- compile by Dr Sanjan,Dainik Jagran(Rashtriya Sanskaran),Dainik Bhaskar(Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara(Rashtriya Sanskaran) Hindustan dainik(Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times(Hindi& English)

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