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समाचार विचार 9.6.21 पार्ट 2

लक्षद्वीप में सुधार की राह में चुनौतियों से निपटने को प्रफुल्ल पटेल तैयार

(आदिति फडणीस)

(साभार बिजनस स्टैन्डर्ड )


जुलाई 2010 में गुजरात के तत्कालीन गृह मंत्री अमित शाह को जेल जाना पड़ा था। सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने सोहराबुद्दीन शेख और उसकी पत्नी कौसर बी की मौत की जांच की कमान अपने हाथ में ले ली थी। इस मामले के आरोप पत्र में शाह का नाम था। शाह तीन महीने बाद जमानत पर रिहा हो गए लेकिन राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने एक प्रश्न खड़ा था कि आखिर शाह की जगह किसे गृह मंत्रालय सौंपा जाए। मोदी ने दूसरे वरिष्ठ भाजपा नेताओं के दावों को नकारते हुए प्रफुल्ल के पटेल को गृह मंत्री नियुक्त कर दिया। वह 2012 के विधानसभा चुनाव तक अपने पद पर रहे। पटेल गुजरात के हिम्मतनगर विधानसभा क्षेत्र से एक बार विधायक रहे और मोदी लहर के बावजूद 2012 में राज्य विधानसभा चुनाव में हार गए। कई लोगों का कहना है कि उनकी पार्टी ही उन्हें हराना चाहती थी। सूत्रों के अनुसार पटेल भी जानते थे कि वह नहीं जीत पाएंगे लेकिन मैदान छोडऩे के बजाय उन्होंने मुकाबला करने का निर्णय लिया। पटेल भाजपा में अपनी जगह और मोदी से नजदीकी का श्रेय अपने पिता एवं सफल सिविल कॉन्ट्रैक्टर खोदाभाई पटेल को देते हैं। पटेल के पिता राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े थे और मोदी अक्सर उनसे मिलने जाते थे। पटेल भी अपने पिता के व्यवसाय से जुड़े थे और निर्माण कार्यों का तजुर्बा हासिल कर चुके थे।


वर्ष 2016 में जब केंद्र ने दमन एवं दीव और दादरा एवं नगर हवेली को मिलाकर एक केंद्र शासित प्रदेश बनाने का निर्णय किया तो पटेल इसके प्रशासक नियुक्त किए गए। प्रशासक के तौर पर उनका कार्यकाल विवादों से अछूता नहीं रहा है। आईएएस अधिकारी और दमन-दीव और दादरा एवं नगर हवेली के विभागों में सचिव कन्नन गोपीनाथन के इस्तीफे में पटेल की भूमिका प्रश्न खड़े करती है। गोपनीथन ने पटेल का आदेश मानने से इनकार कर दिया और पद से इस्तीफा दे दिया। कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। इस क्षेत्र से निर्दलीय लोकसभा सदस्य मोहन डेलकर ने मुंबई में आत्महत्या कर ली। डेलकर के पुत्र अभिनव ने अपने पिता द्वारा आत्महत्या से पहले छोड़े एक पत्र (सुसाइड नोट) के आधार पर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई कि पटेल उन्हें प्रताडि़त किया करते थे। शिकायत में कहा गया कि पटेल ने डेलकर को रिश्वत नहीं देने पर आपराधिक मामलों का सामना करने की धमकी दी थी।


एक प्रशासक के तौर पर पटेल ने वही किया, जिस कार्य में उन्हें विशेषज्ञता हासिल थी। उन्होंने दमन एवं दीव में पुल, सड़क और फ्लाईओवरों के निर्माण का आदेश दिए। डेलकर छह बार सांसद रह चुके थे और इस वजह से डेलकर के साथ पटेल के कुछ मतभेद रहे होंगे या हितों के टकराव की बात भी उठी होगी। महाराष्ट्र पुलिस इस मामले की जांच कर रही है।


पटेल ने पूरे उत्साह के साथ लक्षद्वीप का कायाकल्प करना शुरू कर दिया। लक्षद्वीप में 32 वर्ग किलोमीटर में 10 आबादी वाले और कई बिना आबादी वाले द्वीप हैं और यहां की कुल आबादी करीब 80,000 है। यहां मिनीकॉय द्वीप समूह सबसे खूबसूरत है और मात्र 30 मिनट में यहां से हेलीकॉप्टर से मालदीव पहुंच जा सकता है। यह द्वीप समूह अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्ग के बीच में है जो दक्षिण एशियाई देशों को चीन से जोड़ता है। ज्यादातर सिविल सेवा के अधिकारी ही इसके प्रशासक नियुक्त किए गए हैं। पटेल की नियुक्ति राजनीतिक थी। पटेल से पहले सिविल सेवा के अधिकारी और इंटेलीजेंस ब्यूरो के पूर्व प्रमुख दिनेश्वर शर्मा इसके प्रशासक थे।


मादक पदार्थों की तस्करी और बंदूकों के अवैध कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए पटेल ने सबसे पहले असामाजिक गतिविधि निरोधक अधिनियम (पासा) जारी किया। सुरक्षा एजेंसियों ने लक्षद्वीप के आस-पास मादक पदार्थों के तस्करों की गतिविधियां होने की सूचना दी थी और इसके बाद पटेल यह कानून लेकर आए। पटेल से पहले किसी प्रशासक ने यह कदम क्यों नहीं उठाया यह सोचकर आपको हैरानी जरूर हो रही होगी। उन्होंने पंचायतों में 50 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित कर दीं। उन्होंने एक आदेश पारित कर उन लोगों के स्थानीय निकायों के चुनाव लडऩे पर पाबंदी लगा दी है जिनकी दो से अधिक संतान हैं। हालांकि उनका चौथा बदलाव थोड़ा विवादित रहा। पटेल ने गोकशी पर रोक लगा दी। इसका असर यह हुआ कि लक्षद्वीप, जहां 97 प्रतिशत आबादी मुसलमानों की है, में गोमांस पर प्रतिबंध लग गया। इस पर कश्मीर से लेकर केरल तक भारी विरोध हुआ।


पटेल ने लक्षद्वीप को मालदीव की तरह पर्यटन का केंद्र बनाने का लक्ष्य रखा है। हालांकि बिना बुनियादी सुविधाओं के यह सपना कैसे पूरा हो सकता है? यहां ऐसी कोई जगह नहीं है जहां बोइंग जैसे बड़े विमान उतर सकते हैं। इस द्वीप समूह में काफी खूबसूरत सफेद समुद्री किनारे हैं, लेकिन वहां ठहरने की कोई जगह नहीं है। इस क्षेत्र का कुल बजट 1,200 करोड़ रुपये है जिनमें 450 करोड़ रुपये केवल केवल इस द्वीपसमूह को 25 नावों और तीन पवन हंस हेलीकॉप्टर के जरिये जोडऩे में खर्च हो जाते हैं। यहां अक्षय ऊर्जा की कोई व्यवस्था नहीं है। 9 मेगावॉट बिजली की जरूरत डीजल से चलने वाले जेनरेटरों के जरिये पूरी की जाती है। इससे यहां के पारिस्थितिकी-तंत्र को कितना नुकसान पहुंचान है इसका अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। पटेल इसकी जगह सौर और पवन ऊर्जा से बिजली उत्पादन करना चाहते हैं और बड़े विमानों के लिए बेहतर हवाई पट्टी बनाना चाहते हैं। उनकी योजना से आप असहमत हो सकते हैं लेकिन उनके पास वाकई एक सोच है। सुधार की दिशा में कई चुनौतियां आती हैं और हितों के टकराव से भी निपटना होता है। पटेल की राह में भी चुनौतियां हैं। हालांकि उनके पास एक ब्रह्मास्त्र मौजूद है और वह हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। प्रधानमंत्री का विश्वास उनके साथ है। यही वजह है कि आने वाले समय में अच्छे या खराब कारणों से लक्षद्वीप चर्चाओं में बना रहेगा।

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