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समाचार 12.6.21

करेंट अफेयर्स एक पंक्ति को नए रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है, इसमें भारतीय रिजर्व बैंक और कोरोना वायरस आदि को सम्मलित किया गया है. • भारतीय रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर महेश कुमार जैन का कार्यकाल जितने साल के लिए बढ़ा दिया गया है- दो साल • भारतीय रिजर्व बैंक ने चंद्रशेखर घोष को तीन साल की अवधि के लिए जिस बैंक के एमडी और सीईओ के रूप में फिर से नियुक्त करने की मंजूरी दे दी है- बंधन बैंक • अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाईडेन ने महामारी को जल्द से जल्द समाप्त करने हेतु दुनिया भर के सबसे गरीब देशों को फाइजर COVID-19 वैक्सीन की जितने मिलियन खुराक दान करने की घोषणा की है-500 मिलियन • हाल ही में जिस देश ने विदेशी प्रतिबंधों के खिलाफ एक नया कानून पारित किया है- चीन



• इलाहाबाद हाईकोर्ट के नए चीफ जस्टिस के रूप में जिसे नियुक्त किया गया है- जस्टिस संजय यादव • इंग्लैंड के जिस बॉलर ने एलिस्टर कुक के रिकॉर्ड को तोड़कर देश के लिए सबसे ज्यादा मैच खेलने का नया रिकॉर्ड बनाया है- जेम्स एंडरसन • वह राज्य सरकार जिसने असंगठित क्षेत्रों के श्रमिकों के लिए ‘ई-निर्माण’ पोर्टल एवं मोबाईल ऐप को लॉन्च किया है- गुजरात • विश्व बैंक ने भारत की अर्थव्यवस्था को 2022 में जितने प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान लगाया है-7.5 प्रतिशत

📣टॉप हिन्दी करेंट अफ़ेयर्स, 12 जून 2021 के अंतर्गत आज के शीर्ष करेंट अफ़ेयर्स को शामिल किया गया है जिसमें मुख्य रूप से उत्तर पूर्वी अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र और कोरोना वायरस आदि शामिल हैं. पूर्वोत्तर क्षेत्र में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का उपयोग अब रेलवे, कृषि, चिकित्सा प्रबंधन, सड़कों और पुलों, समय पर उपयोग प्रमाणपत्रों की खरीद, टेलीमेडिसिन, मौसम, आपदा पूर्वानुमान और प्रबंधन, बाढ़ पूर्वानुमान, बारिश सहित विभिन्न क्षेत्रों में किया जा रहा है. उत्तर पूर्वी अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र (NESAC) को पूर्वोत्तर राज्यों से कई प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं. एक बार पहचान हो जाने के बाद, ऐसी सभी परियोजनाओं को NESAC और संबंधित राज्यों द्वारा संयुक्त रूप से वित्त पोषित किए जाने की संभावना है. मालदीव के विदेश मंत्री और संयुक्त राष्ट्र महासभा के प्रेसिडेंट चुने गए अब्दुल्ला शाहिद ने उन्हें यह जिम्मेदारी दी है. अगले एक साल तक के. नागराज नायडू अब्दुल्ला शाहिद के सहायक के तौर पर कामकाज देखेंगे. मालदीव के विदेश मंत्री अब्दुल्ला शाहिद ने ट्वीट कर नागराज को यह जिम्मेदारी दिए जाने की जानकारी दी है.



संयुक्त राष्ट्र (यूएन) में इस पद के लिए नागराज नायडू का मुकाबला अफगानिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री डा. जालमाई रसूल से था. इस क्रम में नागराज नायडू को 143 वोट हासिल हुए वहीं रसूल को केवल 48 वोट मिले. नियुक्ति के बाद नागराज नायडू ने वर्तमान महासभा अध्यक्ष वोल्कन बोजकिर से मुलाकात की. कोरोना महामारी के खिलाफ जंग में अब भारत और ब्रिटेन दोनों देश साथ मिलकर लड़ाई लड़ रहे हैं. इसी क्रम में भारतीय और ब्रिटिश वैज्ञानिकों ने एक ऐसा सेंसर विकसित किया जो सीवेज के पानी में कोरोना वायरस की मौजूदगी का पता लगा सकता है. फिलहाल, इसका परीक्षण मुंबई में किया जा रहा है. दोनों देशों के वैज्ञानिकों द्वारा संयुक्त तौर पर तैयार इस सेंसर की लागत भी कम है. इससे इसका उपयोग भारत जैसे विशाल आबादी वाले देश में आसानी से किया जा सकता है. शोधकर्ताओं ने पाया कि सेंसर 10 पिकोग्राम प्रति माइक्रोलीटर जितने सूक्ष्म स्तर पर भी वायरस की आनुवंशिक सामग्री का पता लगाने में सक्षम था. ब्रिटेन इस शिखर सम्मेलन की दक्षिण-पश्चिम इंग्लैंड में मेजबानी कर रहा है. इस सम्मेलन में ब्रिटेन, अमेरिका, कनाडा, जापान, जर्मनी, फ्रांस, इटली और यूरोपीय संघ शामिल हैं. शिखर सम्मेलन में भारत, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका को अतिथि देशों के रूप में आमंत्रित किया गया है. सात राष्ट्रों का समूह जी7 पूरी दुनिया के साथ कोरोना वायरस के टीकों की कम से कम एक अरब खुराकें साझा करने का संकल्प लेगा. ये घोषणा ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने की है. इनमें से लगभग आधी खुराकें अमेरिका दान देगा जबकि 10 करोड़ खुराकें ब्रिटेन की तरफ से दी जाएंगी.

📣संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से एक बार फिर अपने लिए समर्थन हासिल किया है, जिसने 08 जून, 2021 को उन्हें इस पोस्ट के लिए पांच साल का कार्यकाल दुबारा सौंपने के लिए मतदान किया था. 72 वर्षीय एंटोनियो गुटेरेस वर्ष, 2017 से संयुक्त राष्ट्र के महासचिव के तौर पर कार्य कर रहे हैं. उनका मुख्य एजेंडा ‘संघर्ष का समाधान’ रहा है. अपने पहले कार्यकाल के दौरान, उन्होंने अमेरिका और उसके प्रमुख प्रतिद्वंद्वियों, रूस और चीन के बीच गहरी दरारों के बीच राजनयिक समझौता करवाने के लिए संघर्ष किया. उनका एक अन्य प्रमुख फोकस जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण के पतन से निपटने के प्रयासों के लिए पूरी दुनिया को एकजुट करना है. मुख्य विशेषताएं • गुटेरेस को ऑफिस में अपने दूसरे कार्यकाल के लिए किसी प्रतिस्पर्धा का सामना नहीं करना पड़ा. हालांकि, लगभग 10 अन्य लोगों ने इस पोस्ट की मांग की थी, वे औपचारिक उम्मीदवार नहीं थे क्योंकि संयुक्त राष्ट्र के 193 सदस्य देशों में से किसी ने भी उन लोगों का समर्थन नहीं किया था. • संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा गुटेरेस को एक बार फिर कार्यकाल सौंपने की सिफारिश करने के लिए सुरक्षा परिषद ने 08 जून को बंद कमरे में, एक संक्षिप्त सत्र के दौरान सर्वसम्मति से मतदान किया था. इस बारे में UNSC के वर्तमान अध्यक्ष, एस्टोनियाई राजदूत स्वेन जर्गेन्सन द्वारा सूचित किया गया था. • महासभा से अनुमोदन को एक औपचारिकता के तौर पर देखा जाता है और इसके द्वारा जल्द ही अनुमोदन दिए जाने की उम्मीद है. • संयुक्त राष्ट्र महासभा से हरी झंडी मिलने के बाद गुटेरेस को उनके दूसरे कार्यकाल के लिए नियुक्त किया जाएगा. • गुटेरेस को अपने पहले कार्यकाल के दौरान, पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की एकतरफा, राष्ट्रवादी और गठबंधन से सावधान विदेश नीति से संभावित नुकसान को सीमित करने पर अपना ध्यान केंद्रित करने के लिए मजबूर किया गया था. एंटोनियो गुटेरेस के बारे में • एंटोनियो गुटेरेस ने 01 जनवरी, 2017 को संयुक्त राष्ट्र के नौवें महासचिव के तौर पर अपना पदभार ग्रहण किया था. • वे एक पुर्तगाली राजनीतिज्ञ हैं जिन्होंने वर्ष, 1995 से 2002 तक पुर्तगाल के प्रधानमंत्री के तौर पर कार्य किया था. • उन्होंने वर्ष, 2002 में पुर्तगाली प्रधानमंत्री के तौर पर अपना इस्तीफा दे दिया, जब उनकी सोशलिस्ट पार्टी वर्ष, 2001 के पुर्तगाली स्थानीय चुनाव, जोस मैनुअल बारोसो के नेतृत्व वाली सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी के खिलाफ़ हार गई थी. • गुटेरेस ने वर्ष, 1999 से 2005 तक सोशलिस्ट इंटरनेशनल के अध्यक्ष के तौर पर भी कार्य किया था. • बाद में उन्होंने वर्ष, 2005 से 2015 तक शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र के उच्चायुक्त के तौर पर भी कार्य किया था.

📣ब्रिटेन और भारत के वैज्ञानिकों ने हाल ही में संयुक्त रूप से एक कम लागत वाला सेंसर विकसित किया है, जो गंदे पानी में कोरोना वायरस के अंशों का पता लगा सकता है. इससे स्वास्थ्य अधिकारियों को यह समझने में सहायता मिलेगी कि यह बीमारी कितने हिस्से में फैल चुकी है. कोरोना महामारी के खिलाफ जंग में अब भारत और ब्रिटेन दोनों देश साथ मिलकर लड़ाई लड़ रहे हैं. इसी क्रम में भारतीय और ब्रिटिश वैज्ञानिकों ने एक ऐसा सेंसर विकसित किया जो सीवेज के पानी में कोरोना वायरस की मौजूदगी का पता लगा सकता है. फिलहाल, इसका परीक्षण मुंबई में किया जा रहा है. स्ट्रैथसाइडल विश्वविद्यालय और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी)-बॉम्बे द्वारा विकसित इस तकनीक का इस्तेमाल निम्न और मध्यम आय वाले देशों में कोविड-19 के व्यापक प्रसार पर नजर रखने में किया जा सकता है, जो बड़े पैमाने पर लोगों की जांच करने हेतु संघर्ष कर रहे हैं. दोनों देशों के वैज्ञानिकों द्वारा संयुक्त तौर पर तैयार इस सेंसर की लागत भी कम है. इससे इसका उपयोग भारत जैसे विशाल आबादी वाले देश में आसानी से किया जा सकता है. शोधकर्ताओं ने पाया कि सेंसर 10 पिकोग्राम प्रति माइक्रोलीटर जितने सूक्ष्म स्तर पर भी वायरस की आनुवंशिक सामग्री का पता लगाने में सक्षम था. हाल ही में ''सेंसर्स एंड एक्चुएटर्स बी: कैमिकल'' नामक पत्रिका में प्रकाशित इस अनुसंधान के मुताबिक सेंसर का पोर्टेबल उपकरण के साथ इस्तेमाल किया जा सकता है. इसमें सार्स-कोव-2 वायरस का पता लगाने के लिये मानक पॉलीमरेज चेन रिएक्शन (पीसीआर) जांच का उपयोग किया जाता है.



इसमें समयबद्ध गुणवत्तापूर्ण पीसीआर जांच के लिये महंगे रसायनों और प्रयोगशाला की जरूरत नहीं होती. अपशिष्ट जल में वायरस के अंशों के बारे में पता चलने से सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिकारियों को यह समझने में मदद मिलेगी कि यह बीमारी कितने बड़े क्षेत्र में कितनी फैली है. 📣ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने उम्मीद जताई है कि जी-7 देश दुनिया के गरीब देशों को कोरोना वैक्सीन की लगभग 100 करोड़ डोज़ देने के लिए राज़ी हो जायेंगे ताकि वो अपने यहाँ टीकाकरण अभियान तेज़ कर सकें. ब्रिटेन ने घोषणा की है कि ग्रुप ऑफ सेवन (G7) साल 2022 के अंत तक दुनिया को कोरोना वैक्सीन की 100 करोड़ डोज प्रदान करेगा. ब्रिटेन इस शिखर सम्मेलन की दक्षिण-पश्चिम इंग्लैंड में मेजबानी कर रहा है. इस सम्मेलन में ब्रिटेन, अमेरिका, कनाडा, जापान, जर्मनी, फ्रांस, इटली और यूरोपीय संघ शामिल हैं. शिखर सम्मेलन में भारत, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका को अतिथि देशों के रूप में आमंत्रित किया गया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी-7 (ग्रुप ऑफ सेवन) शिखर सम्मेलन के संपर्क (आउटरीच) सत्रों को 12 और 13 जून को संबोधित करेंगे. वे ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन के आमंत्रण पर डिजिटल माध्यम से इस सम्मेलन में शिरकत करेंगे. यह दूसरा मौका होगा जब प्रधानमंत्री जी-7 की बैठक में शामिल होंगे। वर्ष 2019 में फ्रांस की अध्यक्षता में हुए जी-7 के शिखर सम्मेलन में भारत को आमंत्रित किया गया था. दुनिया भर में अब तक कोरोना की चपेट में आने से 37 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हुई है. इसके अतिरिक्त इस बैठक में कोरोना वैक्सीन और जलवायु परिवर्तन पर भी चर्चा होगी. सात राष्ट्रों का समूह जी7 पूरी दुनिया के साथ कोरोना वायरस के टीकों की कम से कम एक अरब खुराकें साझा करने का संकल्प लेगा. ये घोषणा ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने की है. इनमें से लगभग आधी खुराकें अमेरिका दान देगा जबकि 10 करोड़ खुराकें ब्रिटेन की तरफ से दी जाएंगी.



इससे पहले राष्ट्रपति जो बाइडन ने कहा था कि कि अमेरिका 50 करोड़ वैक्सीन दान करेगा. इसका लाभ दुनिया के 92 देशों को मिलने वाला है. ये वैक्सीन कोवैक्स के जरिए गरीब देशों को दी जाएगी. इसके अतिरिक्त अफ्रीकी संघ को भी मुफ्त में वैक्सीन दिए जाएंगे. इसके लिए अमेरिका फाइजर के टीके की 50 करोड़ खुराकें खरीदेगा. टीके की 20 करोड़ खुराकें इस साल दान दी जाएंगी जबकि बाक़ी खुराकें 2022 के पहले छह महीनों के दौरान दान दी जाएंगी. जलवायु परिवर्तन को लेकर चिंता के बीच अलग-अलग देशों के 70 से अधिक मुख्य कार्यपालक अधिकारियों (सीईओ) ने 10 जून को विकसित देशों के समूह जी-7 के नेताओं से विभिन्न क्षेत्रों के बीच मजबूत सहयोग पर चर्चा की. इसके जरिए जरिये शुद्ध रूप से शून्य कार्बन उत्सर्जन व्यवस्था की दिशा में ठोस और तेजी से कदम उठाने का आग्रह किया. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, कोरोना संक्रमण को बढ़ने से रोकने के लिए दुनिया की 70 प्रतिशत आबादी को वैक्सीन दी जानी ज़रूरी है जिसके लिए कम से कम 1100 करोड़ डोज़ जुटानी होंगी. जी-7 अर्थात ‘ग्रुप ऑफ सेवन’ (Group of Seven) फ्राँस, जर्मनी, इटली, यूनाइटेड किंगडम, जापान, संयुक्त राज्य अमेरिका और कनाडा जैसे देशों का एक समूह है. यह एक अंतर सरकारी संगठन है. इसे वर्ष 1975 में उस समय की शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं द्वारा विश्व के विभिन्न मुद्दों पर चर्चा करने के लिये एक अनौपचारिक मंच के रूप में गठित किया गया था. जी-7 देशों के राष्ट्राध्यक्ष वार्षिक शिखर सम्मेलन में मिलते हैं जिसकी अध्यक्षता सदस्य देशों के नेताओं द्वारा एक ‘रोटेशनल बेसिस’ पर की जाती है.

📣संयुक्त राष्ट्र महासभा के 76वें सत्र के मनोनीत अध्यक्ष मालदीव के विदेश मंत्री अब्दुल्ला शाहिद ने यूएन में भारत के उप स्थायी प्रतिनिधि के. नागराज नायडू को अपना ‘शेफ डी कैबिनेट’ नियुक्त किया है. भारतीय विदेश सेवा अधिकारी के. नागराज नायडू को अगले एक साल के लिए संयुक्त राष्ट्र की ब्यूरोक्रेसी का नेतृत्व करने के लिए चुना गया है. मालदीव के विदेश मंत्री और संयुक्त राष्ट्र महासभा के प्रेसिडेंट चुने गए अब्दुल्ला शाहिद ने उन्हें यह जिम्मेदारी दी है. अगले एक साल तक के. नागराज नायडू अब्दुल्ला शाहिद के सहायक के तौर पर कामकाज देखेंगे. मालदीव के विदेश मंत्री अब्दुल्ला शाहिद ने ट्वीट कर नागराज को यह जिम्मेदारी दिए जाने की जानकारी दी है. बता दें कि शेफ डु कैबिनेट फ्रेंच शब्द है, जिसका अर्थ मुख्य सहायक या निजी सचिव होता है. संयुक्त राष्ट्र में यह महत्वपूर्ण पद होता है. यूएन में नौकरशाही 'शेफ डी कैबिनेट' के नियंत्रण में ही होती है. 'शैफ डी कैबिनेट' किसी भी अंतरराष्ट्रीय संगठन में वरिष्ठ नौकरशाह होता है. जो संगठन के शीर्ष पद पर बैठने वाले शख्स के निजी सचिव के तौर पर काम करता है. संयुक्त राष्ट्र (यूएन) में इस पद के लिए नागराज नायडू का मुकाबला अफगानिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री डा. जालमाई रसूल से था. इस क्रम में नागराज नायडू को 143 वोट हासिल हुए वहीं रसूल को केवल 48 वोट मिले. नियुक्ति के बाद नागराज नायडू ने वर्तमान महासभा अध्यक्ष वोल्कन बोजकिर से मुलाकात की. उन्होंने कहा कि यह मेरे लिए सौभाग्य की बात है कि मुझे संयुक्त राष्ट्र महासभा अध्यक्ष के नेतृत्व में काम करने का मौका मिलेगा. अब एक साल तक के लिए नागराज नायडू बतौर सहायक अब्दुल्ला शाहिद के साथ कामकाज देखेंगे. नए महासभा अध्यक्ष अब्दुल्ला शाहिद 7 जून को नए अध्यक्ष पद के लिए चुने गए थे. वे सितंबर में अपना कार्यभार ग्रहण करेंगे. नागराज नायडू भारत के राजदूत हैं.



इसी साल जनवरी में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत का दो साल का अस्थायी कार्यकाल शुरू हुआ है. यह 8वां मौका है, जब भारत को सुरक्षा परिषद में रखा गया है. यही नहीं दुनिया के कई बड़े देश ने भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन किया है.


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