top of page

समाचार 19.5.21

🛑करेंट अफेयर्स एक पंक्ति को नए रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है, इसमें विश्व उच्च रक्तचाप दिवस और कोरोना वायरस आदि को सम्मलित किया गया है.

जागरण जोश से साभार

• कोरोना वायरस के खिलाफ जंग में निर्णायक भूमिका निभाने हेतु जिस संगठन की ओर से एंटी-कोविड मेडिसिन, 2-डीजी लॉन्च कर दी है- डीआरडीओ • संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मलेन के लिए जिस देश ने प्रख्यात प्राकृतिक इतिहासकार सर डेविड एटनबरो को ‘सीओपी26 पीपल्स एडवोकेट’ नामित किया है- ब्रिटेन • राज्यसभा सांसद राजीव सातव का 16 मई 2021 को कोरोना से निधन हो गया. वह जिस राजनीतिक दल के सदस्य थे- कांग्रेस • नए निर्देशों के अनुसार, कोविशील्ड वैक्सीन की दूसरी खुराक अब जितने दिनों के बाद दी जाएगी-84 दिन



• आंध्र प्रदेश सरकार ने कोरोना की वजह से अनाथ बच्चों को जितने लाख रुपये देने की घोषणा की है-10 लाख रुपये • विश्व उच्च रक्तचाप दिवस (World Hypertension Day) जिस दिन मनाया जाता है-17 मई • इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) के पूर्व अध्यक्ष और पदमश्री से सम्मानित जिस डॉक्टर का कोरोना संक्रमण की वजह से निधन हो गया- केके अग्रवाल • अंतरराष्ट्रीय प्रकाश दिवस (International Day of Light) जिस दिन मनाया जाता है-16 मई

🛑टॉप हिन्दी करेंट अफ़ेयर्स, 19 मई 2021 के अंतर्गत आज के शीर्ष करेंट अफ़ेयर्स को शामिल किया गया है जिसमें मुख्य रूप से जल जीवन मिशन और कोरोना वायरस आदि शामिल हैं. जल जीवन मिशन के अंतर्गत आवंटित केंद्रीय निधि में से 93 फीसदी जल आपूर्ति बुनियादी ढांचे के विकास पर, पांच फीसदी समर्थन गतिविधियों पर और दो फीसदी जल गुणवत्ता की निगरानी और निगरानी गतिविधियों पर उपयोग किया जाना है. पेयजल सप्लाई के लिए अवसंचना सृजन, संचालन और रखरखाव, धूसर जल शोधन और पुनः उपयोग के संदर्भ में बढ़ाए गए बजटीय आवंटन का प्रभाव ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा. इससे विशाल अवसंचना गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगी. इससे गांवों में उत्पादक संपत्तियां पैदा होंगी. रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने पाया कि कोरोना मरीजों के इलाज में प्लाज्मा थेरेपी गंभीर बीमारी को दूर करने और मौत के मामलों में कमी लाने में मददगार साबित नहीं हुई है. भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) की तरफ से बताया गया है कि कोविड-19 मरीजों के उपचार के लिए प्लाज्मा थेरेपी के उपयोग को नैदानिक प्रबंधन दिशा-निर्देश से हटाया गया है.



कोरोना मरीजों के इलाज के लिए गठित राष्ट्रीय कार्य बल के सभी सदस्य आईसीएमआर की पिछले हफ्ते हुई बैठक के दौरान प्लाज्मा थेरेपी को इलाज के दिशा-निर्देश से हटाने पर सहमत हुए थे. पिछली गाइडलाइंस में मध्यम स्तर की बीमारी के शुरआती दौर में (लक्षण दिखने के सात दिनों के भीतर) प्लाज्मा थेरेपी के 'आफ लेबल' इस्तेमाल की सिफारिश की गई थी. सितंबर, 2020 में हैदराबाद स्थित डॉ रेड्डीज़ लैबोरेटरीज़ ने रूस के स्पुतनिक V कोविड-19 वैक्सीन के क्लिनिकल परीक्षण के साथ-साथ भारत में इसके वितरण अधिकारों के लिए रूसी प्रत्यक्ष निवेश कोष के साथ भागीदारी की थी. रूस की स्पुतनिक V कोविड-19 वैक्सीन को 12 अप्रैल, 2021 को भारत में उपयोग के लिए मंजूर किया गया था और इस वैक्सीन को आपातकालीन उपयोग प्राधिकरण दिया गया था. भारत को रूस की स्पुतनिक V वैक्सीन की दूसरी खेप 16 मई, 2021 को मिली है. हैदराबाद में डॉ रेड्डीज़ लैबोरेटरी ने जानकारी दी है कि, इस दूसरी खेप में स्पुतनिक V की 60,000 खुराक की है. स्पुतनिक V वैक्सीन की आयातित खुराक की पहली खेप 01 मई, 2021 को भारत में उतरी थी. इसे 13 मई को हिमाचल प्रदेश में केंद्रीय औषधि प्रयोगशाला से नियामक मंजूरी मिली थी. यह जानकारी अग्रवाल के आधिकारिक ट्विटर अकांउट पर एक बयान में दी गई. इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष केके अग्रवाल को पिछले सप्ताह एम्स में भर्ती कराया गया था और वह वेंटिलेटर पर थे. बयान के मुताबिक, कोविड-19 से लंबी लड़ाई लड़ने के बाद सोमवार (17 मई) देर रात साढ़े 11 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली. पद्मश्री सम्मानित और वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. केके अग्रवाल ने पिछले दिनों एक वीडियो भी शेयर किया था. उन्होंने इसमें इस बात की जानकारी दी है कि कोरोना का संक्रमण किन-किन लोगों को परेशान नहीं करता है और किन्हें इसका सबसे ज्यादा खतरा है. 🛑 अमेरिकी राष्ट्रपति जो बिडेन ने 14 मई, 2021 को पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा जारी वर्ष, 2019 की उस घोषणा को रद्द कर दिया है, जिसमें अप्रवासियों को वीजा प्राप्त करने से रोका गया था, जब तक कि वे यह सत्यापित नहीं कर सकते कि, अमेरिका में यह एक स्वीकृत स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत कवर किया जाएगा या स्वास्थ्य सेवा का खर्च वहन करेगा. बिडेन ने एक बयान में यह कहा है कि, पिछली घोषणा अमेरिका के हितों को आगे बढ़ाने में मदद नहीं करती है. बिडेन ने पिछली उद्घोषणा को रद्द करने के दौरान यह कहा कि, यह उद्घोषणा 9945 में व्यक्त किए गए कारण 'संयुक्त राज्य के हितों के लिए हानिकारक नहीं हैं'. अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी उल्लेख किया कि, उनका प्रशासन ऐसे किसी भी आदेश, मार्गदर्शन दस्तावेजों, विनियमों, नीतियों और किसी भी अन्य समान एजेंसी के कार्यों की समीक्षा करेगा जो उद्घोषणा 9945 के लिए शुरू किए गए हैं, और संशोधित मार्गदर्शन जारी किये जायेंगे. पदभार ग्रहण करने के समय से, बिडेन ने मुस्लिम-बहुल देशों पर ध्यान केंद्रित करते हुए ट्रम्प के यात्रा प्रतिबंध को निरस्त करने और ओबामा-युग के डिफर्ड एक्शन फॉर चाइल्डहुड अराइवल्स (DACA) कार्यक्रम को रोकने के आदेशों पर हस्ताक्षर किए हैं. बिडेन ने 'नेशनल गार्डन ऑफ अमेरिकन हीरोज' को भी रद्द कर दिया था जिसके लिए ट्रंप प्रशासन ने पिछले साल आदेश जारी किया था.



• पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने वर्ष, 2019 में उन अप्रवासियों पर प्रतिबंध लगा दिया था जो अमेरिका में स्वास्थ्य सेवा का खर्च नहीं उठा सकते. इस प्रतिबंध को उद्घोषणा 9945 के तौर पर भी जाना जाता था. • उद्घोषणा 9945 ने ऐसे अप्रवासियों के प्रवेश को निलंबित करने की घोषणा की थी जो अमेरिकियों के लिए स्वास्थ्य देखभाल लाभों की उपलब्धता की रक्षा के लिए अमेरिकी स्वास्थ्य प्रणाली पर आर्थिक रूप से बोझ डालेंगे. • पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने उद्घोषणा 9945 जारी करने के दौरान यह कहा था कि, अमेरिका में स्वास्थ्य देखभाल के लिए भुगतान करने की क्षमता की कमी वाले अप्रवासियों का अप्रतिबंधित प्रवेश संयुक्त राज्य के हितों के लिए हानिकारक होगा. • ट्रम्प प्रशासन द्वारा जारी की गई उद्घोषणा 9945 में गैर-नागरिकों को अमेरिका में प्रवेश करने के 30 दिनों के भीतर, यह सत्यापित करने की आवश्यकता है कि वे स्वास्थ्य बीमा प्राप्त कर सकते हैं या इसके तहत कवर किए जाएंगे. • शरणार्थियों और अमेरिकी नागरिकों के बच्चों को इस उद्घोषणा से छूट दी गई थी.

🛑भारत के कोविड-19 टीकाकरण प्रयासों को गति देने के लिए एक अन्य भारतीय कंपनी, शिल्पा मेडिकेयर भी स्पुतनिक V वैक्सीन की निर्माण क्षमता बढ़ाने के प्रयासों में शामिल हो गई है. सितंबर, 2020 में हैदराबाद स्थित डॉ रेड्डीज़ लैबोरेटरीज़ ने रूस के स्पुतनिक V कोविड-19 वैक्सीन के क्लिनिकल परीक्षण के साथ-साथ भारत में इसके वितरण अधिकारों के लिए रूसी प्रत्यक्ष निवेश कोष के साथ भागीदारी की थी. रूस की स्पुतनिक V कोविड-19 वैक्सीन को 12 अप्रैल, 2021 को भारत में उपयोग के लिए मंजूर किया गया था और इस वैक्सीन को आपातकालीन उपयोग प्राधिकरण दिया गया था. स्पुतनिक V ने ट्विटर पर इस खबर को साझा करते हुए यह घोषणा की है कि, भारतीय कंपनी शिल्पा मेडिकेयर स्पुतनिक V निर्माण क्षमता बढ़ाने के प्रयासों में शामिल हो गई है. शिल्पा मेडिकेयर अगले 12 महीनों में स्पुतनिक V वैक्सीन की 50 मिलियन खुराक का उत्पादन करेगी. फर्म स्पुतनिक लाइट नामक सिंगल-शॉट वैक्सीन के निर्माण की संभावना भी तलाश रही है. भारत को रूस की स्पुतनिक V वैक्सीन की दूसरी खेप 16 मई, 2021 को मिली है. हैदराबाद में डॉ रेड्डीज़ लैबोरेटरी ने जानकारी दी है कि, इस दूसरी खेप में स्पुतनिक V की 60,000 खुराक की है. स्पुतनिक V वैक्सीन की आयातित खुराक की पहली खेप 01 मई, 2021 को भारत में उतरी थी. इसे 13 मई को हिमाचल प्रदेश में केंद्रीय औषधि प्रयोगशाला से नियामक मंजूरी मिली थी. 01 मई, 2021 को भारत में रूस की इस वैक्सीन के पहले बैच के आने के बाद, हैदराबाद में रूस की स्पुतनिक V वैक्सीन के साथ टीकाकरण शुरू हुआ. स्पुतनिक V कोविड-19 वैक्सीन भी भारत में इस्तेमाल होने वाली पहली विदेश निर्मित वैक्सीन बन गई है, जो दुनिया में सबसे बड़े कोविड-19 टीकाकरण अभियान में अपना योगदान दे रही है. अब तक, दो मेक इन इंडिया टीके - कोविशील्ड और कोवैक्सिन - का उपयोग भारतीयों को टीका लगाने के लिए किया जा रहा है. कोवैक्सीन को भारत बायोटेक द्वारा ICMR के सहयोग से विकसित किया गया है, जबकि कोविशील्ड का निर्माण सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया, पुणे द्वारा किया गया है. भारत में रूसी राजदूत निकोले कुदाशेव ने 16 मई को कोरोना वायरस महामारी के खिलाफ लड़ाई में इसे रूसी-भारतीय सहयोग करार दिया है. उन्होंने इसे एक प्रभावी अंतर्राष्ट्रीय महामारी विरोधी सहयोग भी कहा है.

🛑केंद्र सरकार ने जल जीवन मिशन के कार्यान्वयन के लिए 15 राज्यों को 5,968 करोड़ रुपये जारी किए हैं जो इस वित्त वर्ष में जारी की जाने वाली चार किश्तों में से पहली किश्त है. केंद्र चालू वित्त वर्ष में कुल चार किश्त जारी करेगा. अन्य 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को राशि जारी किये जाने के लिए अपने प्रस्ताव राष्ट्रीय जल जीवन मिशन को भेजने को कहा गया है. केंद्रीय कोष भारत सरकार द्वारा राज्यों/ केंद्र शासित प्रदेशों दिए गए नल के पानी के कनेक्शन और उपलब्ध केंद्रीय और समतुल्य राज्य हिस्सा के उपयोग के आधार पर जारी किया जाता है. इस पैसे का उपयोग पेयजल आपूर्ति के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने और शुद्ध पानी मुहैया कराने पर होगा. यह पहली किश्त राशि है. इसके बाद भी तीन किश्तें और जारी होंगी. • जल जीवन मिशन के अंतर्गत आवंटित केंद्रीय निधि में से 93 फीसदी जल आपूर्ति बुनियादी ढांचे के विकास पर, पांच फीसदी समर्थन गतिविधियों पर और दो फीसदी जल गुणवत्ता की निगरानी और निगरानी गतिविधियों पर उपयोग किया जाना है. • राज्यों को केंद्रीय निधि जारी होने के 15 दिनों के भीतर उनके हिस्से के साथ जारी केंद्रीय धन को एकल नोडल खाते में स्थानांतरित करना होगा. • राज्यों के समतुल्य राज्य हिस्से के लिए प्रावधान करना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि कार्यान्वयन एजेंसियों को धन की कमी का सामना न करना पड़े.



• पूरे वर्ष खर्च समान रूप से वितरित हो यह सुनिश्चित करने के लिए राज्य स्तर पर एक उचित व्यय योजना तैयार करनी होगी. पेयजल सप्लाई के लिए अवसंचना सृजन, संचालन और रखरखाव, धूसर जल शोधन और पुनः उपयोग के संदर्भ में बढ़ाए गए बजटीय आवंटन का प्रभाव ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा. इससे विशाल अवसंचना गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगी. इससे गांवों में उत्पादक संपत्तियां पैदा होंगी. जल जीवन मिशन के तहत मोटरों, टोटियों, नलों तथा पाइप आदि की मांग में वृद्धि से मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा क्योंकि सभी शेष गांवों में काम शुरु होंगे. गावों में जलापूर्ति व्यवस्था के विकास एवं अनुरक्षण, रोजगार के विशाल अवसर उपलब्ध कराने के लिए राजमिस्त्री, पलंबर, पंप संचालकों आदि का संवर्ग तैयार करने के लिए ग्रामीण लोगों को कौशल प्रदान किया जाएगा. • सरकार द्वारा उच्च प्राथमिकता दिए जाने के कारण जल जीवन मिशन का बजटीय आवंटन 2021-22 में महत्वपूर्ण रूप से बढ़ कर 50,011 करोड़ रुपए हो गया है. • इसके अतिरिक्त 15वें वित्त आयोग से जुड़ा 26,940 करोड़ रुपए का अनुदान पीआरआई को जल तथा स्वचछता सेवाओं के लिए उपलब्ध होगा. कोष समतुल्य राज्य हिस्सा और बाह्य सहायता परियोजनाओं के माध्यम से भी उपलब्ध होगा. • इस तरह 2021-22 में ग्रामीण घरों में नल से पानी की सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए 1 लाख करोड़ रुपए से अधिक निवेश करने की योजना है. • आशा है कि इस तरह का निवेश अगले तीन वर्षों तक जारी रहेगा ताकि ‘हर घर जल’ का लक्ष्य हासिल किया जा सके. जल जीवन मिशन का मुख्य उद्देश्य 2024 तक हर ग्रामीण घर में नल से जलापूर्ति सुनिश्चित करना है. जल जीवन मिशन की प्राथमिकता देश भर के सभी भागों में सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराना है. जल जीवन मिशन की घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2019 को की थी. इस मिशन के तहत कृषि में पुन: उपयोग के लिये वर्षा जल संचयन, भू-जल पुनर्भरण और घरेलू अपशिष्ट जल के प्रबंधन हेतु स्थानीय बुनियादी ढाँचे के निर्माण पर भी ध्यान दिया जाएगा. कोविड-19 की चुनौतियों और उसके बाद के लॉकडाउन के वावजूद 4.17 करोड़ से अधिक परिवारों (21.76 प्रतिशत) को नल से पानी की सप्लाई दी गई है. अब देश में 7.41 करोड़ (38.62 प्रतिशत) से अधिक ग्रामीण परिवारों को उनके घरों में सुनिश्चित नल का पानी मिल रहा है.

🛑इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के पूर्व अध्यक्ष और पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित डॉ केके अग्रवाल का कोरोना संक्रमण की वजह से निधन हो गया. उन्होंने दिल्ली के एम्स अस्पताल में आखिरी सांस ली. कोरोना से लंबी लड़ाई के बाद आखिरकार वे जिंदगी की जंग हार गए. डॉक्टर अग्रवाल 62 साल के थे जो पिछले कई दिनों से भर्ती थे. यह जानकारी अग्रवाल के आधिकारिक ट्विटर अकांउट पर एक बयान में दी गई. इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष केके अग्रवाल को पिछले सप्ताह एम्स में भर्ती कराया गया था और वह वेंटिलेटर पर थे. बयान के मुताबिक, कोविड-19 से लंबी लड़ाई लड़ने के बाद सोमवार (17 मई) देर रात साढ़े 11 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली. उनका निधन चिकित्सा जगत के लिए बहुत बड़ी क्षति है. केके अग्रवाल को साल 2010 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था. केके अग्रवाल ने अपने ट्विटर अकाउंट पर बीते 28 अप्रैल 2021 को जानकारी दी थी कि वह कोरोना संक्रमित हैं. देशभर में चिकित्सा के लिए मशहूर डॉ. केके अग्रवाल के निधन की जानकारी उनके ट्विटर हैंडल से ही साझा की गई.


पद्मश्री सम्मानित और वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. केके अग्रवाल ने पिछले दिनों एक वीडियो भी शेयर किया था. उन्होंने इसमें इस बात की जानकारी दी है कि कोरोना का संक्रमण किन-किन लोगों को परेशान नहीं करता है और किन्हें इसका सबसे ज्यादा खतरा है. डॉ. केके अग्रवाल सोशल मीडिया के जरिए लोगों को लगातार अलग-अलग बीमारियों को लेकर जागरुक किया करते थे. वे कोरोना काल में भी लगातार अपने फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के जरिए कोरोना संक्रमण के बारे में आगाह करते रहते थे. वे वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर पोस्ट किया करते थे. डॉ. केके अग्रवाल को साल 2010 में मेडिकल क्षेत्र में योगदान हेतु भारत सरकार की ओर से पद्मश्री से सम्मानित किया गया था. उन्होंने साल 1979 में नागपुर यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की. इसके बाद इसी विश्वविद्यालय से साल 1983 में एमएस की डिग्री हासिल की. केके अग्रवाल को साल 2005 में डॉ. बीसी रॉय पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है. ये पुरस्कार मेडिकल के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान हेतु दिया जाता है. उन्होंने पुरातन वैदिक दवाओं और आधुनिक दवाओं के मेलजोल को लेकर कई किताबें लिखी हैं. वे जब से डॉक्टर बने थे, उन्होंने अपना जीवन लोगों और स्वास्थ्य जागरूकता को लेकर समर्पित कर दिया था. डॉक्टर अग्रवाल एक कॉर्डियोलॉजिस्ट थे और हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया के प्रमुख थे.

49 views0 comments

Recent Posts

See All
bottom of page