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समाचार 27.5.21 जागरण जोश से साभार

🛑महिला और बाल विकास मंत्रालय (WCD), भारत सरकार ने 26 मई, 2021 को यह घोषणा की है कि, सार्वजनिक या निजी स्थानों पर हिंसा से प्रभावित भारतीय महिलाओं को समर्थन और सहायता प्रदान करने के लिए WCD विदेश मंत्रालय (MEA) के सहयोग से 09 देशों में 10 'वन-स्टॉप सेंटर' स्थापित करेगा. WCD के सचिव राम मोहन मिश्रा ने यह बताया कि, जिन 09 देशों में 'वन-स्टॉप सेंटर' हैं, वे हैं: ऑस्ट्रेलिया, बहरीन, कनाडा, कुवैत, ओमान, कतर, सिंगापुर, सऊदी अरब और यूएई. सऊदी अरब को छोड़कर हर देश में एक केंद्र होगा. सऊदी अरब में दो केंद्र स्थापित किए जाएंगे. ये वन स्टॉप सेंटर (OSC) क्या हैं? • वन-स्टॉप सेंटर राष्ट्रीय महिला सशक्तिकरण मिशन के तहत एक ऐसी योजना है जो सार्वजनिक और निजी जगहों पर हिंसा से प्रभावित महिलाओं को एक एकीकृत सहायता प्रणाली प्रदान करती है. • OSC योजना निर्भया कोष द्वारा वित्त पोषित है. केंद्र सरकार OSC के लिए राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों को 100 प्रतिशत वित्तीय सहायता प्रदान करती है. • दिसंबर, 2012 में निर्भया गैंगरेप के बाद उषा मेहरा आयोग ने फरवरी, 2013 में 'वन स्टॉप सेंटर' की सिफारिश की थी. • वर्तमान में, भारत में 700 वन स्टॉप सेंटर हैं. भारत की योजना वर्ष, 2021 तक पूरे देश में 300 और OSC स्थापित करने की है. वन-स्टॉप सेंटर: उद्देश्य • निजी या सार्वजनिक स्थानों पर हिंसा का शिकार बनने वाली महिलाओं को आवश्यक सहायता प्रदान करना. • हिंसा से प्रभावित महिलाओं की तत्काल आपातकालीन प्रतिक्रिया और बचाव सेवायें, चिकित्सा सहायता, प्राथमिकी दर्ज करने में महिलाओं की सहायता, मनोवैज्ञानिक या परामर्श सहायता, कानूनी सहायता, रहने के लिए आश्रय सुविधा, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधा के साथ-साथ मुफ्त पुलिस और अदालती कार्यवाही के दौरान सहायता करना है.

🛑इस 22 मई, 2021 को लगभग दो दशकों के बाद कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में माउंट न्यारागोंगो ज्वालामुखी फट गया, जिससे हजारों लोगों को अपने घरों से पलायन करना पड़ा. इस लावे ने गोमा शहर के बाहरी इलाके में 500 से अधिक घरों को नष्ट कर दिया लेकिन गामा शहर को बड़े पैमाने पर बचा लिया गया है. ज्वालामुखी का लावा मुख्य शहर को अपनी चपेट में लेने से रुक गया, जो लगभग 02 मिलियन लोगों का घर है. हालांकि, रात में ज्वालामुखी फटने पर हजारों लोग दहशत में आकर इस शहर से भाग गए. संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने ट्वीट करके यह कहा है कि, वे कांगो में न्यारागोंगो ज्वालामुखी के विस्फोट से हुई जानमाल की क्षति और नुकसान से बहुत दुखी हैं. I'm deeply saddened by the lives lost and the damage caused by the eruption of the Nyiragongo volcano in the Democratic Republic of the Congo.@UN staff are supporting the Government’s efforts to assist those affected, through the provision of emergency humanitarian aid.



• इस 22 मई, 2021 को बिना किसी चेतावनी के माउंट न्यारागोंगो में विस्फोट हो गया, जिससे लगभग 5000 लोगों को गोमा शहर में अपने घरों को खाली करने और सीमा पार पड़ोसी देश रवांडा में भागने के लिए मजबूर होना पड़ा. • रवांडा के आपातकालीन प्रबंधन मंत्रालय के अनुसार, विस्फोट के बाद कम से कम 8,000 लोगों ने सीमा पार कर उनके देश में प्रवेश किया है. • अन्य 25,000 ने कथित तौर पर सेंक में उत्तर-पश्चिम में शरण ली है. कांगो के अधिकारियों ने कोई निकासी आदेश जारी नहीं दिया था. • यूनिसेफ के अनुसार, लगभग 170 बच्चों के लापता होने की आशंका है. यूनिसेफ इस आपदा के मद्देनजर अकेले बच्चों की मदद के लिए ट्रांजिट सेंटरों का आयोजन कर रहा था. •सौभाग्य से, गोमा शहर इस समय बड़े पैमाने पर विनाश से बच गया, जिसे पिछली बार वर्ष, 2002 में यह ज्वालामुखी फटने के कारण भारी विनाश झेलना पड़ा था. • रिपोर्टों के अनुसार, गोमा शहर के पास बुहेन इलाके में इस ज्वालामुखी के लावे के सुलगते ढेर से धुआं लगातार उठ रहा है. बुहेन के आस-पड़ोस के लगभग सभी घर जल गए हैं. • माउंट न्यारागोंगो एक सक्रिय स्ट्रैटोज्वालामुखी है, जो कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में विरुंगा राष्ट्रीय उद्यान के अंदर स्थित है. • यह ज्वालामुखी कई महीनों की बढ़ी हुई भूकंपीय और फ्यूमरोलिक गतिविधि के बाद वर्ष, 2002 में अंतिम बार फटा था. गोमा शहर में तब इस ज्वालामुखी के लावे के माध्यम से बहुत विनाश हुआ था. • उस समय चेतावनी जारी की गई थी और ज्वालामुखी के हुए विस्फोट के दौरान लगभग 400,000 लोगों को गोमा शहर से रवांडा सीमा के पार पड़ोसी देश गिसेनी में भेजा गया था. • इस विस्फोट के दौरान सैकड़ों लोग मारे गए थे और लगभग 100,000 लोग बेघर हो गए थे.

🛑भारतीय सेनाओं को चीन से लगनी वाली सीमा पर निगरानी रखने में विशेष मदद मिलने वाली है. दरअसल जल्द ही इजरायल के हेरॉन ड्रोन (Heron Drone) भारत को मिल जाएंगे. इस ड्रोन के जरिए सेनाएं वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) और लद्दाख में और पैनी निगरानी कर पाएंगी. इन ड्रोन का इस्तेमाल पूर्वी लद्दाख और चीन की सीमा के साथ अन्य क्षेत्रों में दुश्मन की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखने के लिए किया जाएगा. भारतीय सेना को पूर्वी लद्दाख और अन्य क्षेत्रों में तैनाती के लिए जल्द ही चार इजरायली ड्रोन मिलने जा रहे हैं. हालांकि, कोरोना महामारी की वजह से ड्रोन की डिलीवरी में देरी हुई है. जल्द ही भारत आने वाले ये ड्रोन मौजूदा इन्वेंट्री में हेरॉन की तुलना में ज्यादा एडवांस हैं और उनकी एंटी-जैमिंग क्षमता उनके पिछले वर्जन की तुलना में काफी बेहतर है. चीन की तरफ से पूर्वी लद्दाख में जारी तनाव के बीच भारत ने सितंबर माह में इजरायल के बने हेरॉन ड्रोन को अपग्रेड करने के लिए अनुरोध किया था. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, केंद्र सरकार ने चीन से जारी विवाद के बीच 500 करोड़ रुपये का इमरजेंसी फंड जारी किया था. इन ड्रोन की खरीद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार की तरफ से दिए गए आपात वित्तीय अधिकार के तहत की गई है. इजरायल एरोस्पेस इंडस्ट्रीज (IAI) ने निगरानी करने वाले उपकरणों में खास ड्रोन तैयार किए हैं. इन खास एयरक्राफ्ट को आज के आधुनिक युद्ध स्थलों से खुफिया जानकारी हासिल करने में महारत है. हेरॉन या माकात्ज एक मीडियम एल्टीट्यूड का मानव रहित विमान (UAV) है. इसे खास तौर पर निगरानी और सर्विलियंस ऑपरेशन्स के लिए बनाया गया है. इसे आईएआई ने अपने माल्टा विभाग में बनाया है.



यह सिस्टम पूरी तरह से स्वचालित है और इसके उड़ान भरने और उतरने के दौरान विपरीत मौसमी हालातों में भी कोई परेशानी नहीं होती है. हेरॉन 30 हजार फीट की ऊंचाई तक उड़ सकता है और यह इसे चलाने वालों को युद्ध के मैदान पर रियल टाइम जानकारी उपलब्ध कराता है. यह जीपीएस नेवीगेशन सिस्टम के जरिए निगरानी का काम करता है.

🛑कोरोना वायरस महामारी की दूसरी लहर से संक्रमित लोग अब हैप्पी हाइपोक्सिया जानलेवा बीमारी के शिकार हो रहे हैं. कोरोना की दूसरी लहर में बदले लक्षणों ने सबसे ज्यादा युवाओं को अपनी चपेट में लिया है. कोरोना संक्रमितों में हैप्पी हाइपोक्सिया जानलेवा साबित हो रहा है. विशेषज्ञ कोरोना मरीजों की अचानक बिगड़ती तबियत के पीछे हैप्पी हाइपोक्सिया को मान रहे हैं. सामान्य कोरोना मरीजों में ये लक्षण ज्यादा हैं और बुखार, खांसी नहीं होने की वजह से जब तब आक्सीजन का स्तर कम होता है, तब तक हालत ज्यादा ही बिगड़ जाती है. ब्लड में ऑक्सीजन सेचुरेशन कम हो जाता है, लंग्स में ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाता है. इससे ब्लड वेसल्स में क्लॉट भी जम जाते हैं. इसमें ऑक्सीजन सेचुरेशन 50 तक भी पहुंच जाता है. नॉर्मल ऑक्सीजन 95 से 100 तक होना चाहिए. ऑक्सीजन सेचुरेशन कम होता है उसे हैप्पी हाइपोक्सिया कहते हैं. हैप्पी हाइपोक्सिया के लक्षण में स्किन का रंग हल्का नीले रंग का दिखना, पसीना आना, बॉडी का रंग बदलना, चक्कर आना और सिरदर्द, होठ काले पड़ना तथा चिड़चिड़ापन होना इत्यादि है. हैप्पी हाइपोक्सिया के लक्षण सामने नहीं आते हैं इसलिए सावधान रहें. शरीर में, रंग में बदलाव होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें. ऑक्सीमीटर से सेचुरेशन लेवल चेक करें और डॉक्टर से संपर्क करें. इस बीमारी को साइलेंट किलर कहा गया है क्योंकि इसमें ऑक्सीजन सेचुरेशन लेवल कम हो जाता है और एकदम से उसकी मृत्यु हो जाती है.



यह बीमारी कोविड से जुड़ी है. कोविड मरीज में सबसे पहले ऑक्सीजन लेवल कम होता है. यह एक तरह का साइलेंट किलर है. शुरुआत में इस बीमारी को समझ नहीं पाते हैं. लक्षण साफ नजर नहीं आते हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, हैप्पी हाइपोक्सिया का प्रमुख कारण फेफड़ों में खून की नसों में थक्के जम जाने को माना जाता है. इसकी वजह से फेफड़ों को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं मिल पाती और खून में ऑक्सीजन सेचुरेशन कम होने लगता है. विशेषज्ञों का कहना है कि हाइपोक्सिया की वजह से दिल, दिमाग, किडनी जैसे शरीर के प्रमुख अंग काम करना बंद कर सकते हैं.

🛑अमेरिका की दिग्गज दवा निर्माता कंपनी फाइजर ने केंद्र सरकार से कहा है कि उसका कोविड वैक्सीन भारत में कोरोनावायरस के वैरियंट के खिलाफ "उच्च प्रभावशीलता" दिखाता है. विशेषज्ञों का मानना ​​​​है कि देश में संक्रमण और मौतों की विनाशकारी दूसरी लहर के पीछे यही वैरिएंट है. फाइजर ने अपनी वैक्सीन के बारे में बताते हुए कहा कि उनका ये टीका 12 साल और उससे अधिक उम्र के लोगों को दिया जा सकता है. इसके साथ ही इसे स्टोर करना भी आसान है. इसे एक महीने के लिए 2-8 डिग्री के तापमान में रखा जा सकता है. इतना ही नही कंपनी का कहना ये भी है कि फाइजर भारत में फैले कोरोना स्ट्रेन पर काफी प्रभावी है. वैक्सीन को जल्द मंजूरी देने की मांग फाइजर ने भारत में उसकी कोविड-19 वैक्सीन को जल्द मंजूरी देने की मांग करते हुए भारतीय अधिकारियों से कहा है कि उसका टीका भारत में फैले कोरोना वैरियंट के खिलाफ काफी असरदार है और यह 12 वर्ष से अधिक आयु के बच्चो को भी लगाया जा सकता है. अमेरिका सहित 116 देशों से क्षतिपूर्ति फाइजर ने अमेरिका सहित 116 देशों से क्षतिपूर्ति के करार किये हैं. दुनियाभर में फाइजर टीके की अब तक 14.7 करोड़ खुराक दी जा चुकी हैं. देश में इस समय दो वैक्सीन भारत बायोटेक की कोवैक्सीन और सीरम इंस्टीट्यूट की कोविशील्ड लोगों को दी जा रही है. सरकार ने स्पुतनिक V को भी मंजूरी दी है हालांकि यह आम लोगों के लिए उपलब्ध नहीं है. देश में कोविड-19 टीके की 20 करोड़ से अधिक खुराक दी जा चुकी है. हर्जाना समेत कुछ अन्य छूट फाइजर जुलाई से अक्टूबर 2021 के बीच भारत को फाइजर वैक्सीन की पांच करोड़ खुराक देने के लिए तैयार है. लेकिन उसके लिए उसने नुकसान होने पर हर्जाना समेत कुछ अन्य छूट मांगी है. फाइजर ने कहा है कि भारत सरकार को 44 देशों समेत डब्ल्यूएचओ से मिले अनुमोदन पर भरोसा करना चाहिए.




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