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सावधान संसार,अभी भी वक़्त है-डॉ आनंद प्रदीक्षित

सतर्क और सावधान

डॉ आनंद प्रदीक्षित

इस समय यह बात कहने में थोड़ी अटपटी लगेगी ।कहते हैं वक्त और मौका देखकर ही कहना चाहिए लेकिन यह कहने के पहले मैं बहुत दुखी क्षुब्ध और चिंतित होकर ही यह कहना चाह रहा हूं कि ईश्वर कब तक वह सब बर्दाश्त करता जो हम सब उसके विरुद्ध कर रहे हैं?

यह सही है कि ईश्वर ने संसार बनाया और इसमें बुराइयां और अच्छाइयां दोनों ही सम्मिलित कीं। कर्मों का दंड देने के लिए कुछ बुरे लोग चाहिए होते हैं वह अपनी बुराई के कारण जो कुछ करते हैं उससे कुछ अच्छे लोगों को उनके किन्ही कर्मों का दंड मिलता है चाहे वह कर्म उन्होंने इस जन्म किए हो या पिछले जन्म में किए हो। ऐसा कर्म सिद्धांत के प्रतिपादक मानते हैं ।मुझे यह सिद्धांत बहुत उलझा हुआ लगता है और इसमें कोई तर्क मैं ढूंढ नहीं पाता हूं क्योंकि बहुत से विशुद्ध पापी लोग इस संसार में पूर्ण सुख उठाते देखे जाते हैं और बहुत से सीधे सज्जन सरल व्यक्ति बहुत दुख पाते हैं ।इसको संत लोग ईश्वर द्वारा लिया गया इम्तहान कह देते हैं पर मुझे नहीं लगता कि ऐसा कोई इम्तहान ईश्वर लेते होंगे। यह कैसी परीक्षा है जिसके ना तो पिछले वर्ष के प्रश्न पत्र मिलते हैं ना इसका कोई सिलेबस है बस सीधे परीक्षा ले डालते हैं और सीधे सरल व्यक्ति इसमें कष्ट पाते हैं।

एक मासूम बच्चे का भविष्य चौपट हो जाता है क्योंकि उसके माता पिता अचानक इस कोरोना की चपेट में आ जाते हैं। पहले ऐसी दुर्घटनाएं बहुत ही कम हुआ करती थी यद्यपि होती तो थी किंतु अब ऐसी दुर्घटनाएं आए दिन बड़ी तादाद में हो रही हैं ।

परिवार का सहारा चला जाता है ।परिवार सड़क पर आ जाता है परिवार की सहायता करने भी कोई सामने नहीं आता क्योंकि इसको कोरोना ने अपनों को अपनों से दूर कर दिया है ।पति ,पत्नी की और पत्नी, पति की, माता-पिता बच्चों की और बच्चे माता-पिता की यदि देखभाल करते हैं तो वह भी इसकी चपेट में आ जाते हैं और बहुत से मामलों में तीमारदार ही बीमार पड़े और उनकी मृत्यु हो गई। चिकित्सकों की मृत्यु हो गई ।आखिर यह भयावह स्थिति ईश्वर ने पृथ्वी के निमित्त क्यों आरक्षित की हुई है?

इस का उत्तर देते हुए मुझे बहुत संकोच हो रहा है और बहुत क्षोभ और बहुत क्रोध भी है क्योंकि यह सारी स्थितियां संसार ने अपनी मनमानी कर के पैदा की हैं ।

मैं जिन चीजों को सदैव से मना करता हूं ,इस संसार ने वह बातें मान ली होती तो ये हालात न होते।

1.दिखावा न कीजिए

2.ईर्ष्या ना कीजिए

3.दूसरों को दिखाने के लिए अंधाधुंध पैसे की दौड़ में मत भागिए।4.नैतिक रहिए, आर्थिक नैतिकता और यौन नैतिकता का पालन कीजिए ।यौन संबंध केवल सामाजिक रूप से स्वीकार्य पार्टनर के साथ ही बनाइए यह लिविंग इन , यह बॉयफ्रेंड गर्लफ्रेंड कल्चर यह अवैध संबंध अपने पार्टनर को धोखा देना इतना अधिक बढ़ गया और यह कोई रोकेगा भी नहीं ,तो भुगतो।

कोरोना थमते ही इन सब की रफ्तार फिर बहुत तेजी पकड़ेगी,क्योंकि लोग बेताब बैठे हैं कि कब कोरोनावायरस थमे और कब वो अवैध धन अर्जन और अवैध संबंधों में फिर से पूरे जोश और खरोश से टूट पड़े ।

व्यापारियों के बहुत बड़ी संख्या तो इस कोरोना काल में ही अवैध धन कमाने में लगी हुई है ।और उनमें ना भावना है ना मानवता है। ऐसे संसार को ईश्वर दंड नहीं देगा तो क्या करेगा ?ईश्वर ने कब चाहा कि लोग इतने अधिक पाप करें , कि लोग उसी का व्यापार करें ?धर्म स्थलों में ईश्वर का व्यापार हो रहा है। ईश्वर से मिलने की मोटी मोटी फीस तय कर दी गई है। ब्रांडेड बाबा ईश्वर के नाम का व्यापार कर रहे हैं और अवैध धन और अवैध संबंध बना रहे हैं ।ऐसी स्थिति में ईश्वर का क्रोध पूरे जोर से प्रकट हुआ है और पूरे संसार को ईश्वर के क्रोध ने हिला कर रख दिया है लेकिन मनुष्य इतना निकृष्ट और नीच है कि अभी भी कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। हम इन जमाखोर व्यापारियों का उदाहरण देख सकते हैं ।मानवता के नाम पर कलंक ये राक्षस कोरोना का भरपूर लाभ उठा रहे हैं। ईश्वर क्षुब्ध है ईश्वर नाराज है और यह नाराजगी दूर नहीं होगी ।

वक्त रहते संभल जाओ निकृष्ट मनुष्य !

अगर अभी नहीं समझे तो बहुत बड़ा विनाश आएगा और पृथ्वी की जनसंख्या बेहद कम रह जाएगी क्योंकि पाप की चरम सीमा पार हो चुकी है। पाप का घड़ा भर चुका है और यह घड़ा विकास के नाम पर भरा गया है विकास के नाम पर हमने अभक्ष्य खाया है ,अश्रव्य सुना है अनुचित बोला है अश्लील कृत्य किया है ।

हम सिर्फ सुख के गुलाम बन चुके हैं सिर्फ अवैध सुख के ।नैतिक सुख क्या होता है हम भूल चुके हैं।

परिणाम उठाने के लिए तैयार रहिए ।तीसरी वेव तीसरे विश्वयुद्ध से ज्यादा भयानक होगी।

अभी भी समय है सुधर जाओ नहीं सुधरे तो ईश्वर के क्रोध से बच नहीं पाओगे और बहुत बुरी तरह मारे जाओगे।

कहना मेरा फर्ज था मैंने कह दिया मां का आदेश है जो मुझे समय-समय पर दर्शन देती हैं ।आजकल मां बहुत क्रोधित और दुखी है उनका सिंह मुस्कुरा नहीं रहा है वह पूरे संसार को फाड़ खाने के लिए तैयार है।

हमला करने के लिए वह पीछे दो कदम उठा चुका है। सिंह दो कदम पीछे हटकर और फिर बहुत तेजी से वार करता है। कोरोना की पहली लहर के बाद जो शांति दिखाई दी थी वह वही दो कदम पीछे हटा था ईश्वर ना करें दोबारा सिंह दो कदम पीछे उठाकर पूरी सृष्टि को खा जाए क्योंकि पाप कम नहीं हो रहे हैं ,बढ़ रहे हैं।

इस दूसरी लहर में राक्षस व्यापारियों का तांडव दिखाई दे रहा है। सरकारें विफल हो रही हैं क्योंकि जनता ने तय कर रखा है कि सरकार की सहायता नहीं करनी है बल्कि सरकार को हर तरह से असफल करना है ।जनता ,अधिकारी व्यापारी सिर्फ लालच और स्वार्थ में पागल है और मासूम मारे जा रहे हैं ,दुख उठा रहे हैं ।

लाशें नदियों में बह रही हैं शमशान पर जगह नहीं है। मरने के लिए भी समय और स्थान उपलब्ध नहीं है ।दाह संस्कार में लाइन लगी हुई है ।

नीच इंसान लाशों को नोच रहे हैं। मुझे लगता है कि कोई कल्कि अवतार नहीं होगा क्योंकि ईश्वर के लिए हमने जगह नहीं छोड़ी है ना अपने हृदय में ना संसार में अतः सिर्फ विनाश विनाश और विनाश दिखाई दे रहा है ।

अभी भी समय है मेरी बात मान लो अंतरात्मा में झांक लो।

ईश्वर से क्षमा मांगो अवैध संबंधों से हट जाओ। कोई मर नहीं जाएगा अगर आप संबंध छोड़ देंगे ।और अगर मरता है तो मर जाए कोरोना से मरने से अच्छा है कि वियोग में मर जाए ।

प्रतीक्षा कर लीजिए विवाह हो जाएगा मर नहीं जाएंगे। विवाह पूर्व और विवाह पश्चात यौन संबंध बना बना कर पूरे संसार को इतना गंदा कर दिया है लोगों ने कि चारों तरफ सिर्फ सेक्स और पैसा दो ही चीजों का बोलबाला है।

चेतावनी दे रहा हूं ईश्वर की बहुत बुरी मार पड़ने वाली है शायद इससे भी कहीं ज्यादा भयानक।

सतर्क और सावधान


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