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हिंदी लेख 9.6.21

लक्षद्वीप के बिखरे टापुओं को ज्यादा संवेदना चाहिए

(ओमेश सैगल, पूर्व प्रशासक, लक्षद्वीप )


(साभार हिंदुस्तान )


लक्षद्वीप गलत कारणों से चर्चा में है। लोगों के कल्याण से जुडे़ किसी भी सार्वजनिक कार्यालय में पहले कुछ महीने स्व-शिक्षा में व्यतीत होते हैं। उन क्षेत्रों को समझने में और अधिक समय लगता है, जो अलग-अलग द्वीपों में बंटे होते हैं। लेकिन लक्षद्वीप के नए प्रशासक प्रफुल्ल खोड़ा पटेल के लिए ऐसा नहीं है। अपने पहले पांच महीनों में ही इस प्रशासक ने कई ऐसे कठोर कदम उठाए हैं, जिसने क्षेत्र के शांत पानी में तरंगें पैदा कर दी हैं। यहां सरकार ने आंगनबाड़ियों को बंद कर दिया, वर्षों से इनमें काम करने वाले दर्जनों कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया, स्कूलों से मांसाहार परोसने पर रोक लगा दी गई, दर्जनों मछुआरों के शेड ध्वस्त कर दिए गए। पंचायत नियमों में संशोधन किया गया, और लोक निर्माण विभाग के अनुबंधों के साथ छेड़छाड़ की गई। सभी फैसलों में सबसे ज्यादा परेशान करने वाले लक्षद्वीप विकास प्राधिकरण विनियमन 2021 के मसौदे के प्रावधान हैं।

मसौदे के कुछ हिस्से सिर्फ कट-एंड-पेस्ट का काम लगते हैं, निश्चित रूप से इस क्षेत्र के लिए तैयार नहीं हैं। उदाहरण के लिए, यह मसौदा ‘शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के व्यवस्थित और प्रगतिशील विकास’ और ‘नगरों व ग्रामीण इलाकों के विकास’ की बात करता है (सभी द्वीप ग्रामीण क्षेत्र में हैं); यह ‘भूमि के अधिग्रहण के लिए अतिरिक्त शक्तियों’ को संदर्भित करता है (लगभग सभी 10 द्वीप आबादी क्षेत्र हैं, जहां भूमि का अधिग्रहण नहीं किया जा सकता)। इसमें आबादी के स्थानांतरण का उल्लेख है, कहां? समुद्र में? और ये एक खराब सोचे-समझे मसौदे के कुछ उदाहरण हैं।

लक्षद्वीप के द्वीपों का एक दिलचस्प ऐतिहासिक और पौराणिक परिदृश्य है। प्रारंभिक खोजकर्ता ‘महिला द्वीपों’ की बात करते हैं। यदि आप किसी भी बसे हुए द्वीप, विशेष रूप से मिनिकॉय की यात्रा करते हैं, तो आपको केवल महिलाएं ही दिखाई देंगी। दिन के दौरान पुरुष मछली पकड़ने के लिए बाहर जाते हैं या अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र में नौकायन कर रहे होते हैं। लक्षद्वीप में बाहरी लोगों के आने पर प्रतिबंध क्यों है और बगैर पाबंदी पर्यटन की अनुमति क्यों नहीं दी जा सकती, इसके कई कारण हैं। अक्सर तर्क दिया जाता है कि मालदीव पर्यटकों को आकर्षित कर सकता है, तो लक्षद्वीप क्यों नहीं? मालदीव में 1,200 द्वीप हैं, जिनमें से 1,000 निर्जन हैं, जबकि लक्षद्वीप में केवल 26 हैं; द्वीप के एक जोडे़ को छोड़कर जो पहले से ही पर्यटन स्थल हैं, अन्य बहुत छोटे हैं या उनसे संपर्क करना बहुत मुश्किल है। लक्षद्वीप देश का सबसे घनी आबादी वाला क्षेत्र भी है, जहां प्रति वर्ग किमी 2,000 लोग रहते हैं। इसके अलावा, यह एक भौगोलिक इकाई नहीं है, बल्कि इसमें 10 जन-आबादी वाले द्वीप और कई निर्जन द्वीप शामिल हैं। यह देश की सबसे छोटी प्रशासनिक इकाई है, लेकिन आर्थिक क्षमता के मामले में इसका योगदान बहुत बड़ा है। लक्षद्वीप अरब सागर में देश को लगभग 50,000 वर्ग किमी आर्थिक क्षेत्र जोड़ता है। छोटे पैमाने पर मछली पकड़ने को छोड़कर इसकी क्षमता का दोहन नहीं किया गया है। हम सब जानते हैं कि समुद्र भविष्य हैं; यदि कोई प्राधिकरण स्थापित करना है, तो वह लक्षद्वीप सागर विकास प्राधिकरण होना चाहिए। इसका द्वीपवासियों द्वारा स्वागत किया जाएगा, क्योंकि यह उन्हें रोजगार के बड़े अवसर प्रदान करेगा। यह स्पष्ट है कि लक्षद्वीप में पहले से विकसित की गई क्षमता से अधिक पर्यटन क्षमता नहीं है। मालदीव के साथ तुलना सतही है। एक अलग देश के रूप में मालदीव के पास कोई विकल्प नहीं है, पर लक्षद्वीप की अर्थव्यवस्था भारत की मुख्य भूमि से घनिष्ठ रूप से जुड़ी हुई है। जैसे, मिनिकॉय, अगत्ती व अन्य द्वीपों के सैकड़ों द्वीपवासी नाविक हैं और वे कोलकाता में जहाजरानी दल के रूप में कार्यरत हैं। यहां के छात्र मुख्य भूमि पर इंजीनियरिंग, चिकित्सा व अन्य उच्च अध्ययन के लिए जाते हैं। वे केंद्रीय नौकरियों के हकदार हैं। इन संबंधों को मजबूत करने की जरूरत है, कमजोर करने की नहीं। जैसे, घर से काम करना अब एक आदर्श बन गया है; यदि इन द्वीपों में आईटी क्षेत्र को मजबूत किया जाता है, तो बड़ी संख्या में युवाओं को घर से काम करके लाभकारी रोजगार मिल सकता है। इन द्वीपों की खासियत के मुताबिक, नए प्रशासक को अपनी प्राथमिकताओं को ठीक करना चाहिए।

(ये लेखक के अपने विचार हैं)


INTERNATIONAL


1.गुतेरस का संयुक्त राष्ट्र का दोबारा महासचिव बनना तय, सुरक्षा परिषद ने प्रस्ताव किया मंजूर

• संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंतोनियो गुतेरस के 18 जून को दोबारा इस विश्व निकाय के प्रमुख बनने का रास्ता साफ हो गया है। शक्तिशाली सुरक्षा परिषद के लगातार दूसरी बार पांच साल के लिए महासचिव बनाने का प्रस्ताव निर्विरोध रूप से मंजूर हो गया है।

• उनका दूसरा कार्यकाल एक जनवरी, 2022 से शुरू होना है। भारत ने यह प्रस्ताव पारित होने पर खुशी जाहिर की है। 15 देशों की सुरक्षा परिषद ने मंगलवार को एक बैठक करके 193 सदस्यीय महासभा के लिए दूसरी बार गुतेरस को महासचिव बनाए जाने की सिफारिश को सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया है।

• संयुक्त राष्ट्र में एस्टोनिया के राजदूत और जून महीने में परिषद के अध्यक्ष वेन जर्गुसन ने बैठक के बाद मीडिया को बताया कि सुरक्षा परिषद ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के प्रमुख के पद के लिए 72 वर्षीय गुतेरस के नाम की सिफारिश की है।

• गुतेरस का नया कार्यकाल एक जनवरी, 2022 से शुरू होकर 31 दिसंबर, 2026 तक चलेगा।

• इस फैसले के बाद गुतेरस ने भी खुशी जताते हुए कहा कि वह बहुत सम्मानित महसूस कर रहे हैं। वह उनमें दोबारा विश्वास जताने के लिए सुरक्षा परिषद के सदस्यों के बेहद आभारी हैं। वहीं, जर्गुसन ने कहा कि गुतेरस के महासभा में पुनर्निर्वाचन के लिए मतदान 18 जून को होगा।

• इस बीच, संयुक्त राष्ट्र में भारत के राजदूत टीएस त्रिमूर्ति ने ट्वीट करके कहा, 'भारत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव को अंगीकार करने का समर्थन करता है।'


2. आसियान सम्मेलन की मेजबानी करेगा चीन, पर्यटन और कोरोना से प्रभावित अन्य आर्थिक गतिविधियों की बहाली पर होगी चर्चा


• आसियान देशों में अपना प्रभाव बढ़ाने के लिए अमेरिका से प्रतिस्पर्धा के बीच चीन इस सप्ताह अपने यहां इन देशों के विदेश मंत्रियों का सम्मेलन आयोजित कर रहा है।

• चीन के सरकारी मीडिया ने बताया कि यह सम्मेलन मंगलवार को देश के चोंगकिंग शहर में आयोजित किया जाएगा। इस दौरान पर्यटन और कोरोना से प्रभावित अन्य आर्थिक गतिविधियों की बहाली पर चर्चा की जाएगी।

• महामारी से निपटने के लिए समन्वित रणनीति अपनाने और इन देशों में मुक्त आवागमन के लिए वैक्सीन पासपोर्ट की संभावना पर भी विचार किया जाएगा।

• चीन के विदेश मंत्री वांग यी सम्मेलन से इतर इन देशों के विदेश मंत्रियों के साथ द्विपक्षीय बैठक भी कर सकते हैं। दक्षिण चीन सागर में परस्पर दावे को लेकर कई देशों के साथ मतभेद के बावजूद चीन आसियान में अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।

• फिलीपींस एक द्वीप पर अपना दावा कर रहा है और कई बार यहां चीनी नाव की मौजूदगी का विरोध कर चुका है। इसी तरह मलेशिया ने पिछले सप्ताह अपनी वायुसीमा में चीन के 16 सैन्य विमानों के अतिक्रमण पर विरोध जताया था।

• इसे उसने उड़ान सुरक्षा और राष्ट्रीय संप्रभुता के लिए गंभीर चुनौती बताया था। चीन की आर्थिक और कूटनीतिक ताकत ने इस तरह की चिंताओं को बढ़ाने में मदद की है। हालांकि, कंबोडिया जैसे चीन के सहयोगियों के कारण यह समूह एकीकृत रणनीति अपनाने में असमर्थ रहा है।


3. सदी के अंत तक 30% से अधिक स्थानीय बोलियां खत्म होंगी, इससे औषधीय पौधों का ज्ञान खतरे में

• दुनिया में औषधीय पौधों पर तेजी से गायब होने का खतरा मंडरा रहा है, इससे कई सदियों पुराने उपचारों का ज्ञान खतरे में है। क्योंकि, दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में स्थानीय बोलियां खत्म हो जाएंगी। इस वजह से कई ऐसे औषधीय पौधे हैं जिनकी जानकारी दोबारा कभी नहीं मिल सकेगी।

• यह जानकारी ज्यूरिख विश्वविद्यालय के शोध में सामने आई है। शोध के लिए टीम ने भाषाई और जैविक विविधता के आधार पर उत्तरी अमेरिका, उत्तर-पश्चिम अमेजोनिया और न्यू गिनी में 230 स्थानीय बोलियों से जुड़े 12,000 औषधीय पौधों का अध्ययन किया।

• उन्होंने पाया कि उत्तरी अमेरिका में 73% औषधीय ज्ञान केवल एक भाषा में उत्तर-पश्चिम अमेजोनिया में 91%, और न्यू गिनी में 84% ज्ञान एक ही भाषा में पाया जाता है।

• डॉ. रॉड्रिगो कहते हैं, ‘बोलियों के खत्म होने से औषधीय पौधों का पारंपरिक ज्ञान तो खत्म होगा ही साथ ही पूरा तंत्र भी इससे प्रभावित होगा। क्योंकि हम उनके संरक्षण के लिए कुछ खास नहीं कर पाएंगे।

• बोलियों में प्रकृति में मिलने वाले औषधीय पौधों का बड़ी मात्रा में ज्ञान होता है। ऐसे में स्थानीय बोली के खत्म होने से किस पौधे को क्या कहते हैं और उसकी विशेषता क्या है यह बताने वाला ही कोई नहीं मिलेगा।

• यूएन के अनुसार दुनिया में 7,400 भाषाओं में से 30% से अधिक के सदी के अंत तक गायब होने की आशंका है।

2022-32 स्वदेशी भाषाओं का अंतर्राष्ट्रीय दशक

• वर्तमान में बोली जाने वाली 1,900 से अधिक स्थानीय बोलियों के 10,000 से कम वक्ता हैं। संयुक्त राष्ट्र ने 2022-32 को स्वदेशी भाषाओं का अंतर्राष्ट्रीय दशक घोषित किया है।

• केंट यूनिवर्सिटी के मानवविज्ञानी और संरक्षणवादी डॉ. जोनाथन लोह कहते हैं कि स्थानीय बोलियों में अज्ञात दवाओं का मूल्यवान ज्ञान हो सकता है। देशी बोली एक बार खो गई तो फिर कभी वापस नहीं मिलती।


NATIONAL


4.यूपी कैडर के रिटायर आइएएस अनूप चंद्र पांडे बने तीसरे चुनाव आयुक्त, सुनील अरोड़ा के रिटायर होने के बाद पद था खाली

• यूपी कैडर के आईएएस अधिकारी (सेवानिवृत्त) अनूप चंद्र पांडे को मंगलवार को चुनाव आयुक्त नियुक्त किया गया। सुनील अरोड़ा के मुख्य चुनाव आयुक्त के पद से रिटायर होने के बाद आयोग में पद खाली था।

• कानून मंत्रालय में विधायी विभाग ने कहा कि राष्ट्रपति इससे प्रसन्न हैं कि 1984 बैच के सेवानिवृत्त भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी पांडे को उनके पदभार ग्रहण करने की तारीख से चुनाव आयुक्त के रूप में नियुक्त करेंगे।

• भारतीय चुनाव आयोग के पैनल में जगह खाली थी। सुनील अरोड़ा ने 12 अप्रैल को मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) के पद से इस्तीफा दे दिया। सुशील चंद्रा वर्तमान में सीईसी हैं, जबकि राजीव कुमार अन्य चुनाव आयुक्त हैं।

• सुशील चंद्रा ने 13 अप्रैल को देश के 24वें मुख्य चुनाव आयुक्त के रूप में पद ग्रहण कर लिया था। 12 अप्रैल को सरकार की तरफ से भी सुशील चंद्रा के नाम पर मुहर लगा दी गई थी।

• राष्ट्रुपति संविधान के अनुच्छे द 324 के खंड (2) के तहत अनूप चंद्र पांडेय को उस तिथि से निर्वाचन आयुक्तन के पद पर नियुक्तु करते हैं, जिस दिन से वह अपना कार्यभार ग्रहण करेंगे।

• बता दें कि इससे पहले सुनील अरोड़ा मुख्य चुनाव आयुक्त पद की जिम्मेदारी निभा रहे थे। अब सुशील चंद्रा की इस पद तैनाती होगी। उनका यह कार्यकाल 13 मई 2022 तक रहेगा।

• निर्वाचन आयोग में कार्यभार संभालने से पूर्व चंद्रा CBDT के अध्यक्ष थे। मालूम हो कि सुशील चंद्रा की अगुवाई में निर्वाचन आयोग मणिपुर, उत्तराखंड, गोवा, पंजाब और यूपी में विधानसभा चुनाव कराएगा।


5. चुनावी हलफनामों में गलत जानकारी देने वालों के लिए हो दो साल की सजा, सुशील चंद्रा ने कानून मंत्री को लिखा पत्र


• लंबित चुनाव सुधारों को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त सुशील चंद्रा ने कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद को पत्र लिखा है। मुख्य चुनाव आयुक्त ने लंबित चुनाव सुधार प्रस्तावों पर तेजी से कार्रवाई करने का अनुरोध किया है।

• उन्होंने कहा मैंने इन प्रस्तावों में तेजी लाने के लिए कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद को लिखा है और उम्मीद है कि मंत्रालय इन पर जल्द विचार करेगा।

• मुख्य चुनाव आयुक्त ने यह पत्र पिछले महीने पत्र भेजा था। जिसमें उन्होंने चुनावी हलफनामों में गलत जानकारी देने वालों के लिए कारावास की अवधि मौजूदा छह महीने से बढ़ाकर दो साल करने का प्रमुख चुनाव सुधार प्रस्ताव रखा है।

• इसके साथ दो साल की जेल की सजा वाले उम्मीदवार को छह साल के लिए चुनाव लड़ने से रोक लगाए जाने की मांग की गई है।

• कानून मंत्री को लिखे पत्र में सुशील चंद्रा ने चुनाव प्रचार के अंतिम और मतदान वाले दिन समाचार पत्रों में राजनीतिक विज्ञापनों पर प्रतिबंध लगाने का भी प्रस्ताव किया है ताकि मतदाता प्रभावित न हों और स्वतंत्र दिमाग से अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें।

• अभी तक, केवल इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को मतदान के खत्म होने से 48 घंटे पहले चुनावी प्रचार सामग्री दिखाने से रोक दिया गया है। लेकिन समिति ने जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 126 के दायरे में अब प्रिंट मीडिया को भी लाने की सिफारिश की है।

• इसके साथ ही मुख्य चुनाव आयुक्त सुशील चंद्रा ने कहा कि सुधारों में एक और प्रस्ताव मतदाता सूची को आधार से जोड़ने का है। उन्होंने कहा कि ऐसा करने पर मतदाता का एक से अधिक स्थान पर मतदाता सूचियों में नाम होने पर रोक लगाई जा सकेगी।

• चंद्रा ने कहा कि इसको लेकर कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने हाल ही में लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा था कि चुनाव आयोग का प्रस्ताव सरकार के विचाराधीन है और इसके लिए चुनावी कानूनों में संशोधन की आवश्यकता होगी।


Source of the News (With Regards):- compile by Dr Sanjan,Dainik Jagran(Rashtriya Sanskaran),Dainik Bhaskar(Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara(Rashtriya Sanskaran) Hindustan dainik(Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times(Hindi& English)

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