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हिंदी समाचार 12 अप्रैल 21

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.अमेरिकी नौसेना के 'फ्रीडम ऑफ नेविगेशन' ऑपरेशन को लेकर भारत ने जाहिर की अपनी चिंताएं

• भारत ने शुक्रवार को देश के विशेष आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) में अमेरिकी नौसेना के ’फ्रीडम ऑफ नेविगेशन ऑपरेशन' पर अपनी चिंताएं व्यक्त की हैं। विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि अमेरिकी जहाज जॉन पॉल जोन्स पर फारस की खाड़ी से मलक्का जलडमरूमध्य की ओर जाने के दौरान लगातार नज़र रखी गई थी तथा इसके भारत के विशेष आर्थिक क्षेत्र से गुजरने को लेकर देश की चिंताओं से अमेरिकी सरकार को राजनयिक माध्यम से अवगत करा दिया गया है।

• विदेश मंत्रालय के एक बयान में कहा गया कि भारत सरकार का समुद्र से जुड़े कानून के बारे में संयुक्त राष्ट्र संधि को लेकर स्पष्ट रूख है कि यह किसी अन्य देश को संबंधित तटीय देश की अनुमति के बिना विशेष आर्थिक क्षेत्र में या महाद्वीपीय क्षेत्र में सैन्य अभ्यास करने को अधिकृत नहीं करता है, विशेष तौर पर ऐसे अभ्यास जिसमें हथियार या विस्फोटक शामिल हों।

• मंत्रालय ने कहा, ''अमेरिकी जहाज जॉन पॉल जोन्स पर फारस की खाड़ी से मलक्का जलडमरूमध्य की ओर जाने पर लगातार नज़र रखी गई थी। अमेरिकी जहाज के हमारे विशेष आर्थिक क्षेत्र से गुजरने के बारे में हमने अपनी चिंताओं के बारे में राजनयिक चैनलों के माध्यम से अमेरिका को अवगत कराया है।"

• गौरतलब है कि अमेरिकी नौसेना ने भारत की पूर्वानुमति के बिना बुधवार को लक्षद्वीप द्वीपसमूह के निकट भारतीय जलक्षेत्र में नौपरिवहन स्वतंत्रता अभियान शुरू कर दिया। अमेरिकी नौसेना की सातवीं फ्लीट के कमांडर की ओर से जारी बायन में कहा गया है कि मिसाइल भेदी यूएसएस जॉन पॉल जोन्स के जरिये सात अप्रैल को यह अभियान शुरू किया गया।

• अमेरिकी कमांडर के बयान में कहा गया है कि सात अप्रैल, 2021 को यूएसएस जॉन पॉल जोन्स (डीडीजी 53) ने भारत की अनुमति के बिना, अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुरूप उसके विशेष आर्थिक क्षेत्र लक्षद्वीप द्वीपसमूह के पश्चिम से लगभग 130 समुद्री मील दूर नौपरिवहन अधिकार एवं स्वतंत्रता अभियान शुरू किया।''

• बता दें कि भारत के विशेष आर्थिक क्षेत्र या उपमहाद्वीपीय इलाके में सैन्य अभ्यास या अभियान के लिये उससे पूर्वानुमति लेनी होती है। लेकिन अमेरिकी बयान में दावा किया गया है कि यह अभियान अंतरराष्ट्रीय कानूनों के अनुरूप शुरू किया गया है।

• बयान के अनुसार, ''नौपरिवहन स्वतंत्रता अभियान के तहत भारत के अत्यधिक समुद्री दावों को अंतरराष्ट्रीय मान्यता कानूनों के जरिये चुनौती देकर समुद्र के कानून संगत इस्तेमाल का अधिकार और स्वतंत्रता है।


2. भारत-श्रीलंका के बीच भी हुआ एयर बबल समझौता, अब 28 देशों में जा सकते हैं भारतीय

• भारत सरकार ने विशेष अंतरराष्ट्रीय यात्री उड़ानों के लिए श्रीलंका के साथ एयर बबल समझौता किया है। उड्डयन मंत्रालय ने इस बारे में जानकारी दी है। इसके तहत निकट भविष्य में सभी पात्र यात्री दोनों देशों के बीच यात्रा कर सकेंगे।

• उड्डयन मंत्रालय ने ट्वीट के जरिए इसकी जानकारी दी। इसके साथ ही भारत अब तक कुल 28 देशों के साथ एयर बबल समझौता कर चुका है। यानी अब भारतीय यात्री कोरोना के दौर में भी 28 देशों में जा सकते हैं।

इन देशों में शर्तों के साथ कर सकते हैं यात्रा


• अफगानिस्तान, अमेरिका, ब्रिटेन, बहरीन, बांग्लादेश, भूटान, कनाडा, इथोपिया, फ्रांस, जर्मनी, इराक, जापान, कुवैत, मालदीव, नेपाल, नीदरलैंड्स, नाइजीरिया, ओमान, कतर, रूस, सेशेल्स, तंजानिया, उक्रेन, यूएई, उज्बेकिस्तान ।

क्या समझौते वाले देशों में कोई प्रतिबंध हैं?


• हां, देश सभी श्रेणियों के वीसा वालों को अनुमति नहीं दे रहे हैं। यह सिर्फ एयर बबल समझौते वाले देशों के ही बीच है। देश के भीतर, बाहर उड़ान के लिए ऑनलाइन और दूतावास में खुद को पंजीकरण की जरूरत नहीं है।

क्या होता है एयर बबल समझौता?


• एयर बबल समझौता एक द्विपक्षीय समझौता है जो नियमित अंतरराष्ट्रीय उड़ानें बंद होने पर कमर्शियल पैसेंजर सर्विस को दोबारा शुरू करने दो देशों के बीच किया जाता है।


NATIONAL


3. इलेक्शन कमिश्नर सुशील चंद्रा अगले CEC बनेंगे, उनके कार्यकाल में यूपी और पंजाब समेत 5 राज्यों में चुनाव होंगे

• चुनाव आयुक्त सुशील चंद्रा देश के अगले चीफ इलेक्शन कमिश्नर होंगे। सूत्रों के मुताबिक, रविवार को सरकार ने निर्वाचन आयोग के सबसे बड़े पद के लिए उनके नाम को मंजूरी दे दी। इसका सिर्फ ऑर्डर आना रह गया है, जो कभी भी जारी हो सकता है।

• 15 मई 1957 को जन्मेी सुशील चंद्रा 1980 बैच के IRS अधिकारी हैं। उन्होंने IIT रूड़की से बीटेक और देहरादून से LLB किया था। चीफ इलेक्शन कमिश्नर सुनील अरोड़ा के रिटायर होने के एक दिन बाद 13 अप्रैल को चंद्रा उनकी जगह जिम्मेदारी संभालेंगे। वह 14 मई, 2022 तक इस पद पर रहेंगे। चंद्रा 14 फरवरी 2019 को लोकसभा चुनाव से पहले चुनाव आयुक्त नियुक्त किए गए थे।

यूपी और पंजाब के चुनाव अहम


• चंद्रा के कार्यकाल में चुनाव आयोग गोवा, मणिपुर, उत्तराखंड, पंजाब और उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव कराएगा। इन राज्यों में अगले साल मार्च से मई तक विधानसभा का कार्यकाल खत्म हो जाएगा। उत्तर प्रदेश विधानसभा का कार्यकाल 14 मई को खत्म होना है।

CBDT के अध्यक्ष रह चुके हैं


• पोल पैनल में शामिल होने से पहले सुशील चंद्रा सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेस (CBDT) के अध्यक्ष थे। टीएस कृष्णमूर्ति के बाद वह दूसरे ऐसे IRS अफसर थे, जिन्हें चुनाव आयुक्त बनाया गया। कृष्णमूर्ति को 2004 में मुख्य चुनाव आयुक्त नियुक्त किया गया था।

ECONOMY


4. भारतीय बैंकों के पास जमा 150 खरब रुपये, पांच साल में हुई 50 फीसदी की बढ़ोतरी

• कोरोना संकट में भी बैंकों की जमा में गिरावट नहीं आई है बल्कि यह करीब 11 फीसदी बढ़कर पहली बार 150 खरब रुपये के पार पहुंच पर पहुंच गई है। रिजर्व बैंक की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक 26 मार्च 2021 तक भारतीय बैंकों की जमा 150.13 खरब रुपये रही। महज पांच साल में बैंकों की जमा में 50 फीसदी की वृद्धि हुई है। वर्ष 2016 में भारतीय बैंकों की कुल जमा 100 खरब रुपये थी।

• आंकड़ों के मुताबिक पिछले एक साल में भारतीय बैंकों की कुल जमा में 11.3 फीसदी का इजाफा हुआ है। वर्ष 2011 में भारतीय बैंकों की कुल जमा 50 खरब रुपये के स्तर पर पहुंची थी।

• रिजर्व बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक कोरोना काल में बैंकों की जमा उनके कर्ज की रफ्तार के मुकाबले दोगुना तेजी से बढ़ी है। क्रेडिट रेटिंग एजेंसी केयर ने भी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि इक्विटी फंड से लगातार निकासी हो रही है और बैंकों की जमा में इजाफा हो रहा है।

• निजी क्षेत्र के एचडीएफसी बैंक का जमा मार्च, 2021 के अंत तक 16 प्रतिशत बढ़कर 13.35 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया। समीक्षाधीन अवधि में कर्ज करीब 14 प्रतिशत बढ़कर 11.32 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया। सालाना आधार पर बैंक का घरेलू खुदरा ऋण 7.5 प्रतिशत बढ़ा है। वहीं इस दौरान थोक ऋण में 21 प्रतिशत का इजाफा हुआ है।

• बैंक ने कहा कि 31 मार्च, 2021 के अंत तक उसकी जमा सालाना आधार पर 16.3 प्रतिशत बढ़कर 13.35 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गई। बैंक की कासा (चालू खाता और बचत खाता) जमा इस दौरान करीब 27 प्रतिशत बढ़कर 6.15 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गईं।

• 31 मार्च, 2021 के अंत तक बैंक का कासा अनुपात 46 प्रतिशत था, जो एक साल पहले 42.2 प्रतिशत था। इसी तरह निजी क्षेत्र के फेडरल बैंक का कुल जमा 31 मार्च, 2021 के अंत तक 13 प्रतिशत बढ़कर 1,72,655 करोड़ रुपये पहुंच गया जो एक साल पहले 31 मार्च, 2020 को 1,52,290 करोड़ रुपये था। फेडरल बैंक द्वारा दिया गया सकल कर्ज 31 मार्च, 2021 को समाप्त वित्त वर्ष में 9 प्रतिशत बढ़कर 1,34,876 करोड़ रुपये पहुंच गया।

• इससे पूर्व मार्च, 2020 में यह 1,24,153 करोड़ रुपये था। फेडरल बैंक ने कहा कि आंकड़े अभी पक्के नहीं है और इसे बाजार नियामक सेबी के सूचीबद्धता बाध्यता और खुलासा आवश्यकता नियम और गतिविधियां तथा प्रक्रिया संहिता के तहत जारी किया गया है।

• चालू खाता और बचत खाता (कासा) जमा सालाना आधार पर 31 मार्च, 2021 को 26 प्रतिशत बढ़कर 58,381 करोड़ रुपये रही, जो 31 मार्च, 2020 को 46,450 करोड़ रुपये थी।

बाजार को लेकर सहमे हुए हैं निवेशक

• सामान्य स्थिति में बैंकों के कर्ज की रफ्तार उनकी जमा के मुकाबले अधिक होती है। लेकिन कोरोना काल में हालात इससे अलग हैं। बैंकों की कर्ज पिछले वित्त वर्ष में महज 5.5 फीसदी बढ़ा है जबकि जमा की रफ्तार दोगुने से भी अधिक है।

• विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना के मद्देजनर निवेशक बाजार और अर्थव्यव्यस्था को लेकर सहमे हुए हैं। ऐसे में वह बैंकों की एफडी और अन्य तय ब्याज दरों वाले विकल्पों में निवेश कर रहे हैं।

• विशेषज्ञों का कहना है कि बैंकों की जमा उस स्थिति में बढ़ी है जब बैंक जमा पर दरें लगातार घटा रहे हैं। सरकारी बैंकों की एफडी पर ब्याज दरें निजी बैंकों की बचत खाता पर मिलने वाली दरों के निचले स्तर पर पहुंच गई है।


5. पेंशन सेक्टर में एफडीआई की लिमिट बढ़ाकर 74% कर सकती है सरकार

• केंद्र सरकार पेंशन सेक्टर में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश यानी एफडीआई की लिमिट को बढ़ाकर 74% कर सकती है। इस संबंध में सरकार संसद के अगले सत्र में बिल ला सकती है। सूत्रों के हवाले से न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट में यह बात कही गई है।

अभी 49% है एफडीआई की लिमिट

• सूत्रों के मुताबिक, पेंशन फंड रेगुलेटर एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी (PFRDA) एक्ट 2013 में संशोधन के लिए संसद के मॉनसून या शीतकालीन सत्र में बिल आ सकता है। इसी संशोधन के जरिए पेंशन सेक्टर में एफडीआई की लिमिट बढ़ाई जाएगी। मौजूदा समय में पेंशन सेक्टर या पेंशन फंड में एफडीआई की लिमिट 49% है।

NPS ट्रस्ट को भी अलग किया जा सकता है

• सूत्रों के मुताबिक, एक्ट में संशोधन के जरिए NPS ट्रस्ट को भी PFRDA से अलग किया जा सकता है। अभी NPS ट्रस्ट PFRDA के अधीन हैं। संशोधन के बाद NPS ट्रस्ट को चैरिटेबिल ट्रस्ट या कंपनीज एक्ट के दायरे में लाया जा सकता है।

• इसका मकसद NPS ट्रस्ट को पेंशन रेगुलेटर से अलग करना है। इसके प्रबंधन के लिए 15 सदस्यीय बोर्ड की स्थापना की जाएगी। इस बोर्ड में सरकारी सदस्यों की संख्या अधिक होगी जिसमें राज्यों की ओर से नामित सदस्य भी होंगे। इसका कारण यह है कि NPS में राज्यों का ज्यादा योगदान है।

1 जनवरी 2004 को लागू किया गया था NPS

• केंद्र सरकार ने पुराने पेंशन सिस्टम के स्थान पर नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) पेश किया था। यह 1 जनवरी 2004 से केंद्र सरकार की सेवाओं में भर्ती होने वाले कर्मचारियों पर लागू होता है। पहले चरण में इसमें आर्म्ड फोर्सेज को शामिल नहीं किया गया था। 1 मई 2009 से इसे देश के सभी लोगों के लिए वॉलेंट्री आधार पर लागू किया गया था। यानी अब देश का कोई भी व्यक्ति NPS का लाभ ले सकता है।

इंश्योरेंस सेक्टर में भी बढ़ाई एफडीआई की लिमिट

• केंद्र सरकार ने हाल ही में इंश्योरेंस सेक्टर में एफडीआई की लिमिट बढ़ाई है। इसे संसद से भी मंजूरी मिल चुकी है। सरकार ने इंश्योरेंस सेक्टर में एफडीआई की लिमिट को 49% से बढ़ाकर 74% कर दिया है। इससे पहले सरकार ने 2015 में इंश्योरेंस सेक्टर में एफडीआई की लिमिट को बढ़ाकर 49% किया था। इस लिमिट के बढ़ने से बीते पांच साल में इंश्योरेंस सेक्टर में 26,000 करोड़ रुपए की एफडीआई आई है।


SCIENCE


6. भारत ने बनाया माइक्रोसेंसर आधारित दुनिया का पहला एक्सप्लोसिव ट्रेस डिटेक्टर

• केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने शुक्रवार को नैनोस्निफर नामक दुनिया के पहले माइक्रोसेंसर आधारित स्वदेशी एक्सप्लोसिव ट्रेस डिटेक्टर (ईटीडी) लांच किया। 10 सेकेंड से भी कम समय में विस्फोटकों का पता लगाने में सक्षम इस सस्ते उपकरण से आयातित उपकरणों पर देश की निर्भरता कम होगी।

• सरकार की ओर से जारी बयान के मुताबिक, इस मौके पर शिक्षा मंत्री ने कहा कि नैनोस्निफर की लांचिंग से अन्य संस्थान, स्टार्टअप और मध्यम दर्जे के उद्योग शोध और देश में ही उत्पादों के विकास के लिए प्रोत्साहित होंगे।

• प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत विजन की सराहना करते हुए निशंक ने कहा कि यह उपकरण सौ प्रतिशत मेड इन इंडिया है।

• इसे आइआइटी बांबे से जुड़े स्टार्टअप नैनोस्निफ टेक्नोलाजीस ने विकसित किया है और इसकी मार्केटिंग आइआइटी दिल्ली से पूर्व में जुड़े रहे स्टार्टअप क्रिटिकल साल्यूशंस के बाईप्रोडक्ट विहंत टेक्नोलाजीस ने की है।

• इसकी बुनियादी तकनीक का अमेरिका और यूरोप में पेटेंट कराया गया है। यह उपकरण सभी तरह के विस्फोटकों की पहचान करने के साथ ही उनका वर्गीकरण भी कर सकता है।


ENVIRONMENT


7. शोध में दावा: जलवायु परिवर्तन से लुप्त हो सकते हैं कस्तूरी हिरण और हिम तेंदुए

• यदि ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन इसी रफ्तार से जारी रहा तो प्रकृति के कई अजूबे भी लुप्त हो सकते हैं। इनमें दुर्लभ वनस्पतियां एवं जानवर शामिल हैं। बायोलॉजिकल कंजर्वेशन जर्नल में प्रकाशित एक शोध में यह दावा किया गया है।

• वैज्ञानिकों की एक वैश्विक टीम ने लगभग 300 बायोडायवर्सिटी हॉटस्पॉट का विश्लेषण किया है। यह विश्लेषण जानवरों और पौधों की प्रजातियों की असाधारण उच्च संख्या वाले स्थानों पर किया गया। इनमें से कई हॉटस्पॉट लुप्तप्राय प्रजातियों के हैं जो एक भौगोलिक स्थान जैसे एक द्वीप या एक देश के लिए ख़ास या विशेष रूप से अद्वितीय हैं।

• रिपोर्ट के अनुसार, एशिया में हिंद महासागर द्वीप समूह, फिलीपींस और श्रीलंका सहित पश्चिमी घाट के पहाड़ 2050 तक जलवायु परिवर्तन के कारण अपने अधिकांश स्थानिक पौधों को खो सकते हैं। ऐसे खतरे वाले जीवों में फारसी पैंथर, बलूचिस्तान काला भालू और हिम तेंदुआ, कस्तूरी मृग भी शामिल हैं।

• कई अन्य हिमालयी प्रजातियों को भी खतरा है। जैसे औषधीय लाइकेन लोबारिया पिंडारेंसिस के अस्तित्व के लिए भी चुनौती है। शोध में कहा गया है कि मौजूदा गतिविधियां सदी के अंत तक तापमान बढ़ोत्तरी को तीन डिग्री की ओर ले जा रही हैं।

• ऐसी स्थिति में जमीन पर रहने वाली एक तिहाई और समुद्र में रहने वाली आधी प्रजातियां लुप्त हो जाएंगी। पहाड़ों पर 84 फीसदी स्थानी जानवरों और पौधों को के समक्ष लुप्त होने का संकट पैदा होगा। जबकि द्वीपों पर यह खतरा सौ फीसदी होगा। शोध के अनुसार तीन डिग्री तापमान बढ़ने से 92 फीसदी स्थानिक तथा 95 फीसदी समुद्री प्रजातियों को नकारात्मक परिणामों का सामना करना पड़ेगा।

• शोध के परिणाम बताते हैं कि जलवायु परिवर्तन सबसे मूल और स्थानिक प्रजातियों को नकारात्मक रूप से प्रभावित करेगा। यदि देश पेरिस समझौते के अनुरूप उत्सर्जन को कम करते हैं तो यह खतरा काफी हद तक टल सकता है।

• यदि तापमान बढ़ोत्तरी डेढ़ डिग्री से नीचे रहती है तो दो फीसदी प्रजातियों के लिए ही खतरा पैदा होगा। यदि बढ़ोत्तरी दो डिग्री की रहती है तो चार फीसदी प्रजातियां के लुप्त होने का खतरा रहेगा। शोध में कहा गया है कि यदि ग्लास्गो में पेरिस समझौते के तहत तापमान बढ़ोत्तरी को डेढ़ डिग्री रखने के प्रयासों पर सहमति बनती है तो प्राकृतिक खजाने को बिनास से बचाया जा सकता है।


SPECIAL


8 .ब्राजील दुनिया का पहला देश, जहां सात अजूबों में शामिल क्राइस्ट रिडीमर की दूसरी प्रतिमा बन रही

• ब्राजील दुनिया का पहला देश है, जो सात अजूबों में शामिल किसी प्रतिमा से भी ऊंची प्रतिमा बना रहा है। दरअसल, ब्राजील के एनकांटाडो जिले में जीसस क्राइस्ट की 43 मीटर ऊंची प्रतिमा बनाई जा रही है।

• यह रियो स्थित 30 मीटर ऊंची क्राइस्ट द रिडीमर स्टेच्यू से 13 मीटर ऊंची होगी। रविवार को इसके 28 मीटर चौड़ाई के दोनों हाथों का निर्माण पूरा हुआ। इस प्रतिमा का निर्माण 2019 में शुरू हुआ था, जिसे अक्टूबर में क्राइस्ट द रिडीमर स्टेच्यू के 90वें जन्मदिन से पहले पूरा कर लिया जाएगा।

निर्माण में 2.61 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान


• एसोसिएशन ऑफ फ्रेंड्स ऑफ क्राइस्ट ने बताया कि इसके निर्माण में 2.61 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है।

• प्रोजेक्ट की पूरी राशि डोनेशन से मिली है। मालूम हो कि क्राइस्ट द रिडीमर की प्रतिमा को ईसाई धर्म का एक वैश्विक प्रतीक माना जाता है। इसे देखने के लिए दुनियाभर से लाखों लोग पहुंचते हैं। इससे रियो डी जेनेरियो शहर का पर्यटन भी चलता है।


Source of the News (With Regards):- compile by Dr Sanjan,Dainik Jagran(Rashtriya Sanskaran),Dainik Bhaskar(Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara(Rashtriya Sanskaran) Hindustan dainik(Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times(Hindi& English)

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