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हिंदी समाचार 17 अप्रैल 21

दैनिक समसामयिकी


17

April 2021(Friday)


INTERNATIONAL


1.अफगानिस्तान से सभी सैनिक वापस बुलाएगा US:तालिबान के खिलाफ 20 साल चली जंग के बाद अमेरिका लौटेंगे 2500 सैनिक, जो बाइडेन ने 11 सितंबर तक वापसी का आदेश दिया

• तालिबान के खिलाफ 20 साल तक जंग लड़ने के बाद अमेरिकी सैनिक जल्द अफगानिस्तान से चले जाएंगे। अमेरिका ने अफगानिस्तान से अपने सभी सैनिक वापस बुलाने का ऐलान कर दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने अफगानिस्तान में तैनात 2500 अमेरिकी सैनिकों को 11 सितंबर तक वापसी का आदेश दिया है।

• अमेरिका ने तालिबान को उखाड़ फेंकने के लिए 2001 में अफगानिस्तान के अंदर अपने सैनिक भेजे थे। अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन और रक्षा मंत्री लॉयड ऑस्टिन नाटो में शामिल देशों को भी इसकी जानकारी देंगे।

अफगानिस्तान में 7 हजार से ज्यादा सैनिक


• अमेरिका अपने सैनिकों को 9/11 हमले की 20वीं बरसी के पहले वापस बुलाना चाहता है। US की बाइडेन सरकार ने कई हफ्तों पहले ही इस फैसले के संकेत देने शुरू कर दिए थे। इस समय अफगानिस्तान में 7 हजार से ज्यादा सैनिक तैनात हैं। इनमें से ज्यादातर नाटो (नॉर्थ एटलाण्टिक ट्रीटी ऑर्गेनाइजेशन) के हैं। पिछले एक साल में तालिबानियों ने कई अमेरिकी सैनिकों को निशाना बनाया है। वे अफगानिस्तान की सेना पर भी आए दिन हमले करते रहते हैं।

अमेरिका ने भी तैयार किया था प्रस्ताव


• इससे पहले ट्रंप सरकार ने अफगानिस्तान से 1 मई को अमेरिकी सैनिकों के लौटने की डेडलाइन तय की गई थी। अमेरिका चाहता था कि तालिबानियों के साथ शांति का समझौता हो जाए। इसके लिए US, तुर्की में UN के दखल से एक बैठक के लिए जोर लगा रहा था। अमेरिका ने भी एक प्रस्ताव तैयार किया था। इसमें तुरंत एक नए लीगल सिस्टम को बनाने का जिक्र था, जिसमें तालिबानियों को भी प्रतिनिधित्व दिया जाए। लेकिन गनी ने उसे खारिज कर दिया था।

कंधार में एयरस्ट्राइक कर 80 आतंकी मारे थे


• इससे पहले अफगानिस्तान के कंधार में 4 अप्रैल 2021 को एयरस्ट्राइक में 80 से ज्यादा आतंकवादी मारे गए थे। अरघनदाब जिले में हुई इस कार्रवाई में तालिबान के मुख्य कमांडर सरहदी की भी मौत हो गई थी। अफगानी डिफेंस मिनिस्ट्री ने ट्वीट करके भी एयर फोर्स की इस कार्रवाई की जानकारी दी थी।

• डिफेंस मिनिस्ट्री के प्रवक्ता फवाद अमान ने बताया था कि आतंकवादियों के ठिकानों पर उस वक्त एयर स्ट्राइक की गई, जब वे एक हमले को अंजाम देने की तैयारी कर रहे थे।


2. संयुक्त अरब अमीरात के डिप्लोमैट ने कहा- भारत और पाकिस्तान के रिश्ते सुधारने में मदद कर रहे हैं, इनके बीच बातचीत बेहद जरूरी

• संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने पहली बार आधिकारिक तौर पर यह कबूल किया है कि वो भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्ते सुधारने में मदद कर रहा है। अमेरिका में UAE के एम्बेसेडर यूसुफ अल ओटायबा ने कहा- हम चाहते हैं कि ये दोनों देश अच्छे दोस्त भले ही न बन सकें, लेकिन कम से कम बातचीत तो शुरू होनी ही चाहिए ताकि इस क्षेत्र में अमन कायम हो सके।

• पिछले महीने भारत और पाकिस्तान अचानक एलओसी पर संघर्ष विराम के लिए राजी हुए थे। तब कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया था कि UAE दोनों देशों के बीच बैक डोर डिप्लोमैसी में मदद कर रहा है। हालांकि, यह पहली बार है कि UAE ने अपनी भूमिका स्वीकार की है।

गहरी दोस्ती न सही, लेकिन दुश्मनी भी न हो


• यूसुफ ने बुधवार को स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी के एक वर्चुअल सेशन में शिरकत की। यहां भारत-पाकिस्तान रिश्तों और इनमें UAE की भूमिका पर सवाल भी पूछे गए। एक सवाल के जवाब में इस डिप्लोमैट ने कहा- दोनों देश एटमी ताकत से लैस हैं। इनके बीच हेल्दी रिलेशन जरूरी हैं। यह जरूरी नहीं कि इन दोनों देशों के बीच गहरी दोस्ती ही हो। लेकिन, कम से कम दुश्मनी नहीं होनी चाहिए। बातचीत जरूरी है।

दुबई में बातचीत हुई


• न्यूज एजेंसी के मुताबिक, जनवरी में भारत और पाकिस्तान के इंटेलिजेंस अफसरों की दुबई में सीक्रेट मीटिंग हुई थी। इसमें यह सहमति बनी थी कि एलओसी पर फायरिंग बंद होनी चाहिए। सीजफायर होने के बाद यह माना जा रहा है कि दोनों देश जल्द ही अपने हाईकमिश्नर्स को फिर एक-दूसरे के यहां अपॉइंट करेंगे। इस्लामाबाद और नई दिल्ली में 2019 के बाद से हाईकमिश्नर नहीं हैं।

कट्टरपंथियों से डरती है इमरान सरकार


• पिछले दिनों पाकिस्तान के नए वित्त मंत्री हम्माद अजहर ने भारत से कपास और शक्कर के आयात को मंजूरी दी थी। इन दोनों ही चीजों की वहां बेहद किल्लत है। कॉटन न होने की वजह से टेक्सटाइल इंडस्ट्री बंद होने की कगार पर है। रमजान के पवित्र महीना चल रहा है और पाकिस्तान में इस वक्त शक्कर की कीमत 115 रुपए प्रति किलोग्राम है। बहरहाल, हम्माद के ऐलान के अगले ही दिन इमरान सरकार ने इन दोनों चीजों के इम्पोर्ट करने का फैसला वापस ले लिया। पाकिस्तानी मीडिया का कहना है कि 24 घंटे में फैसला बदलने के पीछे कट्टरपंथियों का दबाव था।

अफगानिस्तान पर नजर


• अमेरिकी राष्ट्रपति ने ऐलान कर दिया है कि 11 सितंबर के पहले अफगानिस्तान से अमेरिकी फौज वापस बुला ली जाएगी। इससे अफगानिस्तान के भविष्य पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। इस बारे में पूछे गए एक सवाल पर UAE के एम्बेसेडर ने कहा- अफगानिस्तान के मसले पर सभी की नजर है। पाकिस्तान से भी मदद की उम्मीद हैं।

• भारत भी वहां बड़ी ताकत है और उसने हालात बेहतर करने में काफी मदद की है। अमेरिका, तालिबान और अफगानिस्तान सरकार के सामने गंभीर चुनौती है। पाकिस्तान बड़ी भूमिका निभा सकता है।


3. भविष्य की वैश्विक व्यवस्था हिंद प्रशांत क्षेत्र में तय होगी : ईयू परिषद अध्यक्ष

• यूरोपीय संघ परिषद के अध्यक्ष चा‌र्ल्स मिशेल ने बताया कि कई अर्थों में भविष्य की वैश्विक व्यवस्था का रास्ता हिंद प्रशांत क्षेत्र में तय होगा क्योंकि यह वैश्विक आर्थिक एवं राजनीति का केंद्र बन गया है।

• रायसीना वार्ता को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि भारत के साथ यूरोपीय संघ का गठजोड़ क्षेत्र की भू-राजनीतिक रणनीति का मील का पत्थर है और वह इन संबंधों को और विकसित करने को प्रतिबद्ध है। यूरोपीय संघ परिषद के अध्यक्ष ने कहा, 'यह हमारे साझा हित में है कि दुनिया की चुनौतियों से निपटने में लोकतांत्रिक एवं मुक्त मॉडल सबसे अधिक शक्तिशाली है।'

• भू-राजनीतिक घटनाक्रमों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यूरोपीय संघ (ईयू) की हिंद प्रशांत क्षेत्र में स्वतंत्रता, खुलेपन और स्थिरता को लेकर बड़ी हिस्सेदारी है और यह क्षेत्र के लिए रणनीतिक रुख अपनाने जा रहा है। मिशेल ने कहा कि हिंद प्रशांत क्षेत्र में यूरोपीय संघ केवल आर्थिक साझेदार ही नहीं है बल्कि यह क्षेत्र की सुरक्षा में भमिका निभाने को प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा, 'कई अर्थों में भविष्य की वैश्विक व्यवस्था का रास्ता हिन्द प्रशांत क्षेत्र में तय होगा। यह क्षेत्र वैश्विक आर्थिक एवं राजनीति का केंद्र बन गया है और यूरोपीय संघ इससे कारोबार, निवेश और आवागमन के माध्यम से करीबी रूप से जुड़ा हुआ है।'

• उन्होंने कहा कि इसकी स्वतंत्रता, खुलेपन और स्थिरता में हमारी बड़ी हिस्सेदारी है । यूरोपीय संघ आपके क्षेत्र को लेकर पहली बार समग्र, रणनीतिक रुख अपनाने जा रहा है। उन्होंने भारत-ईयू संबंधों के बारे में कहा कि दो बड़े लोकतंत्र इस चुनौतीपूर्ण समय में दुनिया को बेहतर, निष्पक्ष एवं सुरक्षित स्थान बनाने में महत्वपूर्ण साझीदार हैं ।

• मिशेल ने कहा कि यह हमारे आपसी हित में है कि दो महत्वपूर्ण अर्थव्यवस्थाओं के बीच कारोबार और निवेश को लेकर क्षमताओं का अधिकतम उपयोग हो। हम कोविड-19, जलवायु परिवर्तन, आर्थिक सहयोग तथा शांति एवं सुरक्षा के चार आयामों पर सहयोग का प्रस्ताव करते हैं। यूरोपीय संघ को भारत का महत्वपूर्ण कारोबारी साझीदार करार देते हुए उन्होंने कहा कि समूह कारोबार, रोजगार तथा वृद्धि की बड़ी संभावनाओं का विकास तैयार है। उन्होंने कहा कि समूह अफगानिस्तान में शांति सुनिश्चित करने तथा म्यामांर में लोकतंत्रिक प्रक्रिया बहाल करने से जुड़ा है।


NATIONAL


4. मुस्लिम महिला को है 'रिवर्स तलाक' की आजादी, हाई कोर्ट ने सुनाया अहम फैसला

• एक मुस्लिम महिला के अदालत के बाहर अपने पति को एकतरफा तलाक देने का अधिकार है, जिसे खुला कहा जाता है। केरल हाईकोर्ट ने इसे कानूनी रूप से वैध माना है। न्यायमूर्ति ए मुहम्मद मुस्तकीम और न्यायमूर्ति सीएस डायस की खंडपीठ ने मुस्लिम पुरुषों के लिए उपलब्ध तालक के अधिकार के लिए क़ुला की बराबरी की। इसके लिए 1972 के फ़ैसले (केसी मोयिन बनाम नफ़ीसा और अन्य) को गलत ठहराया, जिसमें मुस्लिम महिलाओं को ऐसे अधिकार से वंचित रखा गया।

• 1972 के फैसले में एक एकल पीठ ने कहा था कि एक मुस्लिम महिला अपने पति को अदालत से बाहर तलाक नहीं दे सकती है। मुस्लिम पुरुषों को इस माध्यम से तलाक देने की अनुमति है। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि महिलाओं को मुस्लिम विवाह विघटन अधिनियम 1939 (DMMA) के तहत कोर्ट का रास्ता अपनाना आवश्यक है।

• अपील की एक बैच पर विचार करने के बाद, डिवीजन बेंच ने कहा कि DMMA केवल फास्ख को नियंत्रित करता है। अदालत इसमें दिए गए कारणों की वैधता पर अपना फैसला सुनाता है। अदालत ने कहा कि अतिरिक्त न्यायिक तलाक के अन्य तरीके (तल्ख-ए-तफ़विज़, ख़ुला, और मुबारत) मुस्लिम महिला के लिए उपलब्ध हैं, जैसा कि शरीयत अधिनियम की धारा 2 में इसका जिक्र है।

• तालाक-ए-तफ़वीज़ एक अनुबंध पर आधारित है और पति द्वारा अनुबंध की शर्तों का उल्लंघन करने पर पत्नी तलाक प्राप्त कर सकती है। Mubara'at में आपसी सहमति से अलग होने का प्रावधान रहा है।

• अदालत ने कहा, “खुला तलाक का एक रूप है जो पत्नी को पति की तरह तलाक देना का अधिकार देता है। तलाक के एक रूप के रूप में खुला की मान्यता सीधे पवित्र कुरान से उपलब्ध है। अध्याय II छंद 228-229 में इसका जिक्र है। कुरान पति और पत्नी दोनों को तलाक देने का अधिकार देता है।”

• अदालत ने कहा कि पति की सहमति प्राप्त करना इसमें जरूरी नहीं है। पत्नी को डावर वापस करने की बाध्यता निष्पक्षता के सिद्धांत पर आधारित है जिसे मुस्लिम कुरान में देखने की आज्ञा है। अदालत ने कहा कि अगर पत्नी ने मेहर लौटाने से इनकार कर दिया, तो पति अदालत का दरवाजा खटखटा सकता है।


5. केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने ईटस्मार्ट सिटीज चैलेंज और ट्रांसपोर्ट फॉर ऑल चैलेंज को किया लॉन्च

• केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने गुरूवार को ईटस्मार्ट सिटीज चैलेंज और ट्रांसपोर्ट फॉर ऑल चैलेंज लॉन्च किया। यह आयोजन वर्चुअल माध्यम से किया गया। ईटस्मार्ट सिटीज चैलेंज शहरी आबादी को सही भोजन विकल्प बनाने और स्वस्थ और खुशहाल राष्ट्र बनाने में मदद करेगा।

• ईटस्मार्ट सिटीज चैलेंज के बारे में बोलते हुए नागरिक उड्डयन मंत्री और आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि यह गर्व की बात है कि आज हम ईट राइट इंडिया के दृष्टिकोण को ईटस्मार्ट सिटीज चैलेंज के लॉन्च के साथ स्मार्ट शहरों के स्तर तक बढ़ा रहे हैं। यह आंदोलन शहरी आबादी को सही भोजन विकल्प बनाने और स्वस्थ और खुशहाल राष्ट्र बनाने में मदद करेगा। यह स्मार्ट सिटीज मिशन में किए जा रहे उल्लेखनीय कार्यों का पूरक होगा।

• इसके साथ ही ट्रांसपोर्ट फॉर ऑल चैलेंज को लॉन्च करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कोरोना महामारी ने पूरी दुनिया को परिवहन के साथ सबसे खराब क्षेत्रों में से एक बना दिया है। उन्होंने कहा कि ट्रांसपोर्ट फॉर ऑल (Transport4All) डिजिटल इनोवेशन चैलेंज शहरों को इस गतिशीलता संकट से उबरने में मदद करेगा।

सुरक्षित और स्थायी खाद्य वातावरण का समर्थन करती है ईटस्मार्ट सीटीज चैलेंज


• वर्चुअल माध्यम से किए गए कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री पुरी ने स्मार्ट ईटस्मार्ट सिटीज चैलेंज का उद्देश्य भी बताया। उन्होंने कहा कि स्मार्ट शहरों को एक ऐसी योजना विकसित करने के लिए प्रेरित करना है, जो संस्थागत, शारीरिक, सामाजिक और आर्थिक बुनियादी ढाँचे द्वारा समर्थित एक स्वस्थ, सुरक्षित और स्थायी खाद्य वातावरण का समर्थन करती है।

• ट्रांसपोर्ट फॉर आल (Transport4All) को लेकर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि डिजिटल इनोवेशन उन डिजिटल समाधानों को विकसित करने के लिए चुनौती देता है जो सार्वजनिक परिवहन को सुरक्षित, सस्ती, आरामदायक और सभी के लिए विश्वसनीय बनाएगा।


ENVIRONMENT


6. जर्मनी के पोट्सडैम इंस्टीट्यूट की रिसर्च में दावा:जब-जब पारा 1 डिग्री चढ़ेगा, भारत में माॅनसून की बारिश 5% ज्यादा होगी

• पोट्सडैम इंस्टीट्यूट ऑफ क्लाइमेट इम्पैक्ट रिसर्च (जर्मनी) के साइंटिस्ट, प्रोफेसर एंडर्स लीवरमैन ने ग्लोबल वार्मिंग की वजह से भारत की बारिश पर होने वाले प्रभावों का अध्ययन किया है। उनके मुताबिक, जितनी बार धरती का पारा ग्लोबल वार्मिंग की वजह से एक डिग्री सेल्सियस ऊपर चढ़ेगा, उतनी बार भारत में मानसून की 5 फीसदी ज्यादा बारिश होगी।

• उनका कहना है कि माॅनसूनी बारिश हर साल बुरी होती जाएगी। साथ ही इसका अंदाजा लगाना भी मुश्किल होगा। उनकी यह स्टडी अर्थ सिस्टम डायनेमिक्स में प्रकाशित हुई है। भारत में आमतौर पर बारिश का सीजन जून के महीने से शुरू होता है और यह सितंबर के अंत तक चलता है। प्रो. एंडर्स ने बताया कि इस सदी के अंत तक साल-दर-साल ग्लोबल वार्मिंग की वजह से तापमान बढ़ेगा।

शोध में क्लाइमेट मॉडल 31 का उपयोग


• हमारी स्टडी में यह बात सामने आई है कि भारत में मॉनसूनी बारिश और तबाही मचाएगी। इससे ज्यादा बाढ़ आएगी जिससे लाखों एकड़ में फैली फसलें खराब होंगी। एंडर्स के मुताबिक, इस शोध के लिए उन्होंने क्लाइमेट मॉडल 31 का उपयोग किया है।


7. अमेरिका की पहल पर 22-23 अप्रैल को होगी लीडर्स समिट ऑन क्लाईमेट, सर्वाधिक उत्सर्जन करने वाले 40 देशों के राष्ट्राध्यक्ष लेंगे हिस्सा

• अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन दुनिया में सर्वाधिक कार्बन उत्सर्जन के लिए जिम्मेदार 40 देशों के साथ इसी महीने जलवायु वार्ता करने जा रहे हैं। लेकिन कोरोना संकट के बीच तमाम देश अपनी अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए जूझ रहे हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि दुनिया को शून्य उत्सर्जन के प्रेरित करने की अमेरिका की यह पहल कितनी कारगर होगी।

• अमेरिका जलवायु के मुद्दे पर बेहद संजीदा है। नए राष्ट्रपति ने पेरिस समझौते में लौटकर ही यह प्रदर्शित कर दिया है। अब उन्होंने 22-23 अप्रैल को लीडर्स समिट आन क्लाईमेट आयोजित की है, जिसमें सर्वाधिक उत्सर्जन करने वाले 40 देशों के राष्ट्राध्यक्षों को वर्चुअल जमावड़ा होगा। इस मुद्दे पर अमेरिकी राष्ट्रपति के विशेष दूत जान कैरी भारत समेत कई देशों की यात्रा भी कर चुके हैं।

• माना जा रहा है कि यह बैठक राष्ट्रपति बाइडन के लिए लिटमस टेस्ट होगी कि आखिर अमेरिका जलवायु परिवर्तन पर विश्व को कितन प्रेरित कर पाता है। दरअसल कोरोना संकट से जूझ रहे देशों के समक्ष चुनौती यह है की जो प्रतिबद्धताएं उन्होंने पेरिस समझौते के तहत की हैं, उसे भी पूरा करने में कठिनाई हो रही है। ऐसे में 2050 तक शून्य कार्बन उत्सर्जन जैसे बड़े लक्ष्यों की तरफ बढ़ना आसान नहीं है। जबकि अमेरिका की कोशिश है कि इस साल नवंबर में ग्लास्गो में होने वाली काप-26 बैठक में भारत समेत तमाम देश शून्य उत्सर्जन के लक्ष्यों की घोषणा करें।

• बाइडन ने जिन नेताओं को वर्चुअल बैठक में बुलाया है, उनमें भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन जापान के प्रधानमंत्री योशीहीदे सूगा, ब्राजील के राष्ट्रपति जायर बोलसोनारो, कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो, इसराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतनयाहू सऊदी अरब के शाह सलमान बिन अब्दुलअजीज अल सऊद और ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन शामिल हैं।

• क्लाईमेट ट्रेंड्स द्वारा आयोजित बेविनार में यूनियन ऑफ कंसर्न्ड साइंटिस्ट्स में क्लाइमेट एंड एनर्जी प्रोग्राम की पॉलिसी डायरेक्टर रेचल क्लीटस ने कहा कि नेट जीरो का लक्ष्य महत्वपूर्ण है। हमें जीवाश्मय ईंधन पर निवेश बंद करना होगा। रिन्यूएबल एनर्जी टेक्नोलॉजी के सहयोग को बढ़ाकर भारत, कनाडा और यूरोप के बीच ग्लोबल क्लाइमेट एंबिशन को बढ़ाने के लिए संवाद जरूरी है। यह बाइडन सरकार पर निर्भर करता है कि वह किस तरह से संकल्प को आगे बढ़ाती है।

• ओबामा के पूर्व क्लाइमेट एडवाइजर और सेंटर फॉर अमेरिकन प्रोग्रेस के संस्थापक अध्यक्ष जॉन पोडेस्टा ने कहा कि अमेरिकी प्रशासन ने कुछ प्रमुख लक्ष्यों की तरफ ध्यान दिलाया है। वर्ष 2050 तक नेट जीरो अर्थव्यवस्था, वर्ष 2035 तक ऊर्जा क्षेत्र को 100 फीसदी प्रदूषण मुक्त बनाना और इस रूपांतरण को न्याय संगत तरीके से करना, आदि। लेकिन बाइडन सरकार को अपनी आर्थिक और कूटनीतिक रणनीति में जलवायु मुद्दे को भी शामिल करना होगा।

• डब्ल्यूआरआई इंडिया की क्लाइमेट प्रोग्राम निदेशक उल्का केलकर के अनुसार बाइडन प्रशासन से हमें वैसी ही उम्मीदें हैं जैसी कि ओबामा सरकार से हुआ करती थी। हालांकि हरित कोष में 1.2 अरब डॉलर देने की घोषणा उम्मीद के अनुरूप नहीं है। फिर भी अमेरिकी प्रशासन से उम्मीद जगी है। कनाडा, जापान, दक्षिण कोरिया चीन ने भी सकारात्मक संकेत दिए हैं। भारत ने भी जलवायु के अनुकूल अर्थव्यवस्था बनाने के लिए कदम उठाए हैं।


Source of the News (With Regards):- compile by Dr Sanjan,Dainik Jagran(Rashtriya Sanskaran),Dainik Bhaskar(Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara(Rashtriya Sanskaran) Hindustan dainik(Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times(Hindi& English)

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