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03.05.21समाचार

'हम एमआरएनए टीके पर काम कर रहे हैं' बिज़नेस स्टैण्डर्ड से साभार सोहिनी दास |

बायोकॉन की संस्थापक एवं कार्यकारी चेयरपर्सन किरण मजूमदार शॉ का मानना है कि कोविड वैश्विक महामारी की दूसरी लहर का बेहतर तरीके से मुकाबला करने के लिए भारत को आवश्यक दवाओं का स्टॉक तैयार करने की आवश्यकता थी। उन्होंने यह भी कहा कि रेमडेसिविर जैसी दवाओं को आपातकालीन उपाय के तौर पर घरेलू उपचार में भी इस्तेमाल करने की अनुमति दी जानी चाहिए। शॉ ने सोहिनी दास से बातचीत में बताया कि बायोकॉन किस प्रकार एमआरएनए तकनीक पर और उसकी अनुसंधान इकाई सिनजीन एमआरएनए टीके पर काम कर रही है। पेश हैं मुख्य अंश: दूसरी लहर से निपटने के लिए हमारी तैयारियों के बारे में आप कहेंगी? इसके लिए कोई योजना नहीं बनाई गई, कोई जवाबदेही निर्धारित नहीं की गई और न ही कोई कार्ययोजना तैयार की गई। इस सरकार के पास किसी भी आवश्यक दवा के सुरक्षा स्टॉक के लिए कोई योजना नहीं थी। मैं जानना चाहती हूं कि ऐसी कोई योजना क्यों नहीं बनाई गई। हम इस अभिमान में दिख रहे हैं कि वैश्विक महामारी को हमने खत्म कर दिया। टीकाकरण की रफ्तार भी काफी सुस्त चल रही है। मैं लगातार कहती रही कि युवाओं का टीकाकरण किया जाए लेकिन क्या किसी ने मेरी बात सुनी? हरेक देश को यह संकट निजी क्षेत्र के साथ साझा करना होगा। यदि मैंने अच्छी तैयारी की होती तो मैं सीरम इंस्टीट््यूट और भारत बायोटेक को अगस्त में ही कहती कि मंजूरी मिले या न मिले टीके का उत्पादन जारी रखो। इसमें नुकसान को जोखिम काफी कम था। सरकार को उन्हें टीके का उत्पादन जारी रखने के लिए कहना चाहिए था और उन्हें समर्थन मूल्य देना चाहिए था। यदि उन्होंने 100 रुपये का समर्थन मूल्य दिया होता तो आज हमें टीके की 30 करोड़ खुराक अधिक मिलती। सुरक्षा स्टॉक रखने के बारे में कोई समझ नहीं है। आज वे चाहते हैं कि निजी क्षेत्र पूरा जोखिम उठाए। सरकार को जोखिम साझा करना होगा। मुझे उम्मीद है कि हमने इस दूसरी लहर से सीखा है कि हमें तैयार रहना होगा और आवश्यक दवाओं एवं आवश्यक सामग्रियों का भंडार बनाना होगा। हमने स्वास्थ्य सेवा में कम निवेश किया है। अधिक अस्पताल, अधिक आईसीयू, अधिक डॉक्टर और नर्स होने से भविष्य में हमें काफी मदद मिलेगी। रेमडेसिविर जैसी प्रमुख दवाओं की आपूर्ति की समस्याएं कब तक खत्म होंगी? मई के अंत तक हमारे पास रेमडेसिविर की पर्याप्त आपूर्ति होगी। जब आपको मांग में तेजी दिखती है तब आपको सुरक्षा स्टॉक की जरूरत होती है क्योंकि कंपनियों को उत्पादन बढ़ाने में समय लगता है। ये प्रक्रियाएं महज 24 घंटे में नहीं हो सकतीं। एंटीबॉडी तैयार होने में थोड़ा समय लगता है। जून के तीसरे सप्ताह तक मांग और आपूर्ति के बीच अंतर भी खत्म हो जाएगा। स्वास्थ्य मंत्रालय का कहना है कि ऑक्सीजन सपोर्ट पर अस्पताल में भर्ती गंभीर मरीजों को ही रेमडेसिविर दिया जाएगा। क्या आपको लगता है कि अस्पतालों में बिस्तरों की कमी के मद्देनजर घरों में उपचार ले रहे रोगियों को भी यह दवा दी जा सकती है? यह एक बेहद गैर जिम्मेदाराना बयान है। रेमडेसिविर की उन लोगों को जरूरत होती है जिनमें कोविड-19 के लक्षण दिख रहे हैं और जो अस्पताल में भर्ती होते हैं। इसे जल्द देने की जरूरत होती है। हमें यह समझने की जरूरत है कि हरेक दवा क्या करती है। यह वायरस की प्रतिकृति को रोकती है। यदि आप इसे वेंटिलेटर पर मौजूद मरीजों को देते हैं तो यह काम नहीं करती है। जब आईएल6 का स्तर बढ़ जाता है तो मोनोक्लोनर एंटीबॉडी- टोसिलिजुमैब और इटोलिजुमैब- दी जानी चाहिए। रेमडेसिविर देने के समय एंटीबॉडी कॉकटेल अथवा प्लाज्मा दिया जाना चाहिए। ये इंफ्यूजन उत्पाद हैं और इनके लिए एक क्लीनिकल सेटिंग की आवश्यकता होती है। आप अपने होमकेयर सेटअप में भी किसी नर्स के जरिये इसे दे सकते हैं। यदि आप लोगों को अस्पतालों तक नहीं ले जा सकते तो लोगों को घर पर ही इसे लेने की अनुमति मिलनी चाहिए। रेमडेसिविर और इटोलिजुमैब को घर पर भी किसी नर्स द्वारा लोगों को दिया जा सकता है। आप किन नए उत्पादों पर शोध कर रही हैं? क्या आपकी नजर एमआरएनए तकनीक पर है? भारत को एक एमआरएनए टीका विकसित करने की आवश्यकता है। हमें कई अन्य उत्पादों को भी विकसित करने की आवश्यकता है जैसे नोवल बायोलॉजिक्स, बायोसिमिलर, नोवल केमिकल इंटिटीज और व्यक्तिगत डायग्नोटिक्स। सिनजीन बड़ी संख्या में नैदानिक परीक्षण, टीके आदि विकसित कर रही है। एक बायोलॉजिक्स कंपनी होने के नाते बायोकॉन कई एंटीबॉडी और बायोसिमिलर पर काम कर रही है। हमने कैंसर का उपचार विकसित करने के लिए एमआरएनए तकनीक पर काम करना शुरू कर दिया है और सिनजीन इसे एक टीका प्लेटफॉर्म के रूप में तैयार कर रही है। यह कोविड-19 के लिए अथवा कोई अन्य टीका हो सकता है। फिलहाल यह शुरुआती अवस्था में है। हम क्षमता विकसित करने की कोशिश कर रहे हैं। कीवर्ड ताजा खबर

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