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21.5.21 समाचार

जागरण जोश से साभार

🛑टॉप हिन्दी करेंट अफ़ेयर्स, के अंतर्गत आज के शीर्ष करेंट अफ़ेयर्स को शामिल किया गया है जिसमें मुख्य रूप से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और कोरोना वायरस आदि शामिल हैं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संक्रमण के चलते अनाथ और निराश्रित हुए बच्चों को लेकर महत्वपूर्ण फैसला लिया है. उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी के बीच प्रदेश के भीतर अनाथ अथवा निराश्रित हुए बच्चे अब राज्य की संपत्ति हैं, उनका ध्यान रखने के लिए राज्य सरकार की तरफ से सभी जिम्मेदारियां निभाई जाएंगी. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेशवासियों की स्वास्थ्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार द्वारा सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं. यूपी में कोरोना संक्रमण के नए मामलों में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है. राज्य सरकार ने उनके निधन पर एक दिन के राजकीय शोक की घोषणा की है. वे 93 वर्ष के थे. पूर्व मुख्यमंत्री कोरोना संक्रमित थे. उनके निधन पर राजस्थान सरकार ने एक दिन के राजकीय शोक और सरकारी दफ्तरों में छुट्टी की घोषणा की है. राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पहाड़िया के निधन पर शोक जताया है.



जगन्नाथ पहाड़िया 6 जून 1980 से 14 जुलाई 1981 तक सिर्फ 13 महीने ही राजस्थान के मुख्यमंत्री रहे थे. लेकिन इस छोटे कार्यकाल में उन्होंने प्रदेश में पूरी तरह शराबबंदी लागू की. वे 1957, 1967, 1971 और 1980 में सांसद और 1980, 1985, 1999 और 2003 में विधायक भी रहे. सीमा शुल्क नियम, IGCR 2017 ऐसे तरीकों और प्रक्रियाओं को निर्धारित करता है जिसमें कोई भी आयातक माल के घरेलू उत्पादन या सेवाएं प्रदान करने के लिए आवश्यक सामानों के आयात पर रियायती सीमा शुल्क का लाभ उठा सकता है. अपने एक बयान में, वित्त मंत्रालय ने यह बताया कि, व्यापार और उद्योग की आवश्यकताओं को समायोजित करने वाले इन नियमों में एक बड़ा बदलाव यह है कि, आयातित माल को अब जॉब वर्क के लिए बाहर भेजने की अनुमति दी गई है. राज्य सरकार ने कोरोना वायरस संक्रमण से ठीक होने वाले मरीजों में सामने आ रहे है म्यूकरमाइकोसिस (ब्लैक फंगस) रोग को 19 मई 2021 को महामारी घोषित कर दिया. इस बारे में राज्य के चिकित्सा व स्वास्थ्य विभाग ने अधिसूचना जारी की. राजस्थान महामारी अधिनियम 2020 की धारा 3 की सहपठित धारा 4 के तहत म्यूकरमाइकोसिस (ब्लैक फंगस) को संपूर्ण राज्य में महामारी और अधिसूचनीय रोग अधिसूचित किया गया है. राजस्थान में लगभग 100 मरीज ब्लैक फंगस से प्रभावित हैं. 🛑नेचर जर्नल में प्रकाशित एक नए अध्ययन से यह पता चलता है कि, अंटार्कटिका की बर्फ की चादर वर्ष, 2060 के आस-पास एक महत्वपूर्ण बिंदु तक कम हो सकती है. इसका मतलब यह है कि, अगर वैश्विक ग्रीनहाउस उत्सर्जन मौजूदा दर पर जारी रहता है, तो अंटार्कटिका आइस शीट (AIS) महत्वपूर्ण सीमा को पार कर जाएगी, जिससे वैश्विक समुद्री स्तर में अपरिवर्तनीय वृद्धि होगी. अंटार्कटिका की बर्फ की चादर, जिसे पृथ्वी का सबसे बड़ा बर्फ भंडार माना जाता है, कई सुरक्षात्मक बर्फ की परतों/ तहों से ढकी हुई है. ये बर्फ की परतें समुद्र तल से नीचे की ओर जमी हुई हैं जो महाद्वीप के केंद्र में अंदर की ओर ढलान वाली हैं. इस अध्ययन में प्रयुक्त बर्फ की चादरों की भौतिक स्थिति पर आधारित कंप्यूटर मॉडल के अनुसार, यह पाया गया है कि, 02 डिग्री सेल्सियस से ऊपर ग्लोबल वार्मिंग से अंटार्कटिका में, विशेष रूप से विशाल थ्वाइट्स ग्लेशियर के माध्यम से, बर्फ के नुकसान में भारी वृद्धि होगी. थ्वाइट्स ग्लेशियर ब्रिटेन या फ्लोरिडा के किनारे के बराबर है. यह वेस्ट अंटार्कटिक आइस शीट (WAIS) का एक हिस्सा है और अमेरिका तथा ब्रिटेन के वैज्ञानिकों के बीच अध्ययन का गहन केंद्र है.



वर्तमान में, दुनिया मौजूदा नीतियों और वैश्विक ग्रीनहाउस उत्सर्जन दर के साथ तापमान 02 डिग्री सेल्सियस से अधिक होने की राह पर है. पेरिस समझौते के लक्ष्यों को पूरा करने वाले देश समुद्र के बढ़ते जल स्तर को तेजी से कम करने का एक तरीका साबित हो सकते हैं. वैज्ञानिकों को यह डर है कि, तब बर्फ के नुकसान को उलटना या कम करना संभव नहीं होगा और वर्ष, 2100 तक समुद्र के जल-स्तर में वृद्धि आज की तुलना में 10 गुना तेज होगी. • डेविड पोलार्ड, रॉबर्ट डीकोंटो और रिचर्ड एले द्वारा किए गए एक नए अध्ययन से यह पता चलता है कि, अगर वर्तमान उत्सर्जन पर वर्ष, 2100 तक अंकुश नहीं लगाया गया तो समुद्र के जल स्तर में 2150 तक, यह वृद्धि प्रति वर्ष 2.3 इंच (6 सेमी) से अधिक हो सकती है. • वर्ष, 2300 तक अगर देश पेरिस समझौते के लक्ष्यों को पूरा करने में विफल रहते हैं, तो समुद्र-स्तर की वृद्धि आज की तुलना में 10 गुना तेज होने की उम्मीद जताई गई है. • पेरिस समझौते को पूरा करने के लिए तीन प्रमुख तरीकों में ग्लोबल वार्मिंग को 1.5 डिग्री सेल्सियस से 02 डिग्री सेल्सियस के बीच रखने, तापमान को और कम करने के लिए हवा से पर्याप्त कार्बन डाइऑक्साइड को हटाने और वर्ष, 2030 तक वैश्विक उत्सर्जन में 50 प्रतिशत की कटौती करने की आवश्यकता है. • मौजूदा नीतियां वर्ष, 2030 तक वैश्विक उत्सर्जन में केवल 01 प्रतिशत की कटौती करने में मदद करेंगी. जैसेकि नवंबर में होने वाले पेरिस समझौते और जलवायु कार्य योजना पर विचार-विमर्श के लिए देश तैयार हैं, महासागर और ध्रुवीय वैज्ञानिकों के पास ध्यान देने योग्य तीन महत्वपूर्ण संदेश हैं: • डिग्री का हर अंश मायने रखता है. • ग्लोबल वार्मिंग 02 डिग्री सेल्सियस से अधिक होने पर समुद्र तट पानी में डूबे रह सकते हैं. तकनीकी सुधार इन सभी विनाशकारी प्रभावों को उलटने या कम करने में सक्षम नहीं होंगे. • नीतियों को एक लंबा दृष्टिकोण अपनाना चाहिए क्योंकि इनसे बड़े पैमाने पर अंटार्कटिका की बर्फ की चादर और दुनिया को अपरिवर्तनीय क्षति हो सकती है. अंटार्कटिका के बारे में और अधिक आंकड़े सामने आने पर वैज्ञानिकों का यह कहना है कि, यह स्पष्ट हो रहा है कि यह महाद्वीप मैदानी क्षेत्र के भाग्य का निर्धारण करेगा.


🛑केंद्र सरकार ने भारत में व्यापार सुविधा को बढ़ावा देने के लिए मौजूदा सीमा शुल्क (शुल्क की रियायती दर पर माल का आयात) नियम, IGCR 2017 में बदलाव किये हैं. केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड द्वारा सीमा शुल्क (शुल्क की रियायती दर पर माल का आयात) संशोधन नियम, 2021 के माध्यम से ये बदलाव प्रस्तुत किए गए थे. सीमा शुल्क नियम, IGCR 2017 ऐसे तरीकों और प्रक्रियाओं को निर्धारित करता है जिसमें कोई भी आयातक माल के घरेलू उत्पादन या सेवाएं प्रदान करने के लिए आवश्यक सामानों के आयात पर रियायती सीमा शुल्क का लाभ उठा सकता है.

• अपने एक बयान में, वित्त मंत्रालय ने यह बताया कि, व्यापार और उद्योग की आवश्यकताओं को समायोजित करने वाले इन नियमों में एक बड़ा बदलाव यह है कि, आयातित माल को अब जॉब वर्क के लिए बाहर भेजने की अनुमति दी गई है. • उपर्युक्त सुविधा की अनुपस्थिति ने पहले उद्योग को, विशेष रूप से सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम क्षेत्र में विवश कर दिया था, जिनके पास देश में पूर्ण विनिर्माण क्षमता नहीं थी. • वित्त मंत्रालय ने यह भी बताया कि, जिन आयातकों के पास किसी भी प्रकार की विनिर्माण सुविधा नहीं है, वे अब रियायती सीमा शुल्क पर माल आयात करने के लिए IGCR, 2017 का लाभ उठा सकते हैं. वे पूरी तरह से जॉब वर्क के आधार पर निर्मित अंतिम सामान भी प्राप्त कर सकते हैं. • यहां इस बात पर ध्यान दिया जाना चाहिए कि आभूषण, सोना, कीमती पत्थरों और धातुओं जैसे कुछ क्षेत्रों को बाहर रखा गया है. • अब प्रदान किया गया एक और महत्वपूर्ण प्रोत्साहन ऐसे लोगों को अनुमति दे रहा है जो रियायती सीमा शुल्क पर पूंजीगत सामान आयात करते हैं, उन्हें घरेलू बाजार में शुल्क और ब्याज के भुगतान पर मूल्यह्रास मूल्य पर ऐसे सामान की खपत करने की अनुमति है. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वर्ष, 2021 में अपने बजट भाषण में यह घोषणा की थी कि, देश में व्यापार सुविधा को बढ़ावा देने के लिए सीमा शुल्क (IGCR) नियम, 2017 में संशोधन किया जाएगा. इस घोषणा के अनुसार, केंद्रीय सीमा शुल्क और अप्रत्यक्ष कर बोर्ड ने 02 फरवरी, 2021 को इन नियमों के दायरे को तुरंत बढ़ाना शुरू कर दिया था.

🛑राजस्थान सरकार ने ब्लैक फंगस को महामारी घोषित कर दिया है. यहां कोरोना से ठीक हुए लोगों में यह बीमारी तेजी से फैल रही है. रिपोर्ट के अनुसार, इससे अब तक राज्य में दो लोगों की मौत हो चुकी है. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एक दिन पहले इसे राजस्थान की हेल्थ इंश्योरेंस चिरंजीवी योजना में शामिल किया था. इसके बाद अब यह कदम उठाया है. राज्य सरकार ने कोरोना वायरस संक्रमण से ठीक होने वाले मरीजों में सामने आ रहे है म्यूकरमाइकोसिस (ब्लैक फंगस) रोग को 19 मई 2021 को महामारी घोषित कर दिया. इस बारे में राज्य के चिकित्सा व स्वास्थ्य विभाग ने अधिसूचना जारी की. राजस्थान के चिकित्सा और स्वास्थ्य विभाग ने इस बारे में अधिसूचना जारी की. प्रमुख शासन सचिव चिकित्सा अखिल अरोरा द्वारा जारी इस अधिसूचना के मुताबिक कोरोना वायरस संक्रमण के प्रभाव के कारण म्यूकरमाइकोसिस (ब्लैक फंगस) के मरीजों की संख्या में निरंतर वृद्धि, ब्लैक फंगस के कोरोना वायरस संक्रमण के दुष्प्रभाव के रूप में सामने आने, कोविड-19 व ब्लैक फंगस का एकीकृत व समन्वित उपचार किए जाने के मद्देनजर यह कदम उठाया गया है. राजस्थान महामारी अधिनियम 2020 की धारा 3 की सहपठित धारा 4 के तहत म्यूकरमाइकोसिस (ब्लैक फंगस) को संपूर्ण राज्य में महामारी और अधिसूचनीय रोग अधिसूचित किया गया है. राजस्थान में लगभग 100 मरीज ब्लैक फंगस से प्रभावित हैं. विशेषज्ञों के अनुसार यह बीमारी कोरोना वायरस से ठीक हुए मधुमेह के रोगियों में अधिक हो रही है. इस बीमारी में पीड़ित की आंखों की रोशनी जाने के साथ ही जबड़े तक को निकालने की नौबत आ रही है.



ब्लैक फंगस एक गंभीर लेकिन दुर्लभ फंगल संक्रमण है जो म्यूकोर्मिसेट्स नामक मोल्डों के समूह के कारण होता है. ये मोल्ड पूरे वातावरण में रहते हैं. यह मुख्य रूप से उन लोगों को प्रभावित करता है जिन्हें स्वास्थ्य समस्याएं हैं या ऐसी इम्यूनोसप्रेसिव दवाएं लेते हैं जो शरीर की रोगाणुओं और बीमारी से लड़ऩे की क्षमता कम करती हैं. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन सिंह ने ट्वीट कर बताया है कि आंखों में लालपन या दर्द, बुखार, खांसी, सिरदर्द, सांस में तकलीफ, साफ-साफ दिखाई नहीं देना, उल्टी में खून आना या मानसिक स्थिति में बदलाव ब्लैक फंगस के लक्षण हो सकते हैं. हरियाणा सरकार ने भी एक दिन पहले ही ब्लैक फंगस को महामारी घोषित किया है. हरियाणा सरकार ने इसको लेकर आवश्यक निर्देश जारी किए और इनका पालन नहीं होने पर दंडनीय कार्रवाई की जाएगी. गौरतलब है कि कोरोना की दूसरी लहर के बीच ब्लैक फंगस के मामले बढ़े हैं. महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, मध्यप्रदेश, झारखंड, दिल्ली और कर्नाटक के अलावा अन्य कुछ राज्यों में भी ये मामले तेजी से बढ़ रहे हैं.

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