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30.4.21 समसामयिकी

जागरण जोश से साभार

चीन से एक अंतरिक्ष-खनन स्टार्ट-अप ने 27 अप्रैल, 2021 को पृथ्वी की निचली कक्षा में एक रोबोट प्रोटोटाइप लॉन्च किया है, जो एक बड़े नेट/ जाल के साथ अन्य अंतरिक्ष यानों द्वारा छोड़े गए मलबे या कचरे को हटा सकता है. इस NEO-01 को चीन के लॉन्ग मार्च 6 रॉकेट पर अन्य उपग्रहों के साथ लॉन्च किया गया था. यह छोटे आकाशीय पिंडों का निरीक्षण करने के लिए भी अंतरिक्ष के दूरस्थ स्थानों पर पहुंच जाएगा. इस स्पेस-माइनिंग कंपनी के अनुसार, शेन्ज़ेन स्थित ओरिजिन स्पेस द्वारा विकसित किया गया यह 30 किलो का रोबोट भविष्य की तकनीकों का मार्ग प्रशस्त करेगा जो क्षुद्रग्रहों पर खनन करने में सक्षम होंगी. विश्व स्तर पर विभिन्न देशों द्वारा अंतरिक्ष में हजारों उपग्रहों को लॉन्च किया जाता है. चूंकि कई उपग्रहों ने अपने उपयोग की निर्धारित सीमा को पार कर लिया है, उनमें से कई कबाड़/ मलबे के रूप में समाप्त हो जाते हैं जो अंततः अन्य ऑपरेटिंग उपग्रहों के लिए खतरा बनते हैं. वर्ष, 2009 में जब से पहली क्षुद्रग्रह खनन कंपनी ‘वर्ल्ड प्लेनेटरी रिसोर्सेज’ की स्थापना हुई है, विश्व स्तर पर एक दर्जन से अधिक देशों ने इस अंतरिक्ष क्षेत्र में प्रवेश किया है, इसमें जापान का एस्ट्रोस्केल और अमेरिका का 3D सिस्टम शामिल हैं.



चीनी कंपनी की वेबसाइट पर उल्लिखित एक रिपोर्ट के अनुसार, जापान की एस्ट्रोस्केल तकनीक, जो अंतरिक्ष मलबे को इकट्ठा करने के लिए मैग्नेट का उपयोग करता है, के विपरीत चीन का NEO -01 मलबे को इक्कट्ठा करने के लिए एक जाल/ नेट का उपयोग करेगा और फिर, इसे पूरी तरह से अपने इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन सिस्टम के माध्यम से जला देगा. चीन का ओरिजिन स्पेस वर्ष, 2045 तक क्षुद्रग्रहों के पहले वाणिज्यिक खनन को संचालित करने के लिए दर्जनों अंतरिक्ष दूरबीनें और ज्यादा अंतरिक्ष यान लॉन्च करने की योजना बना रहा है. चीन भी इन दिनों नमूने एकत्र करने के लिए और पृथ्वी के पास के क्षुद्रग्रहों के प्रति एक रक्षा प्रणाली के निर्माण की योजना में तेजी लाने के लिए, पृथ्वी के निकट के एक क्षुद्रग्रह पर अपने जांच मिशन को उतारने के प्रयासों पर काम कर रहा है. बीजिंग का लक्ष्य रूस और अमेरिका के बराबर के स्तर को हासिल करना है और इसकी वर्ष, 2030 तक चीन को एक प्रमुख अंतरिक्ष शक्ति में बदलने की योजना है. रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने हेलीकॉप्टर इंजन अनुप्रयोग के लिए अपने स्वदेशी हेलीकाप्टर विकास कार्यक्रम के एक हिस्से के तौर पर एक सिंगल क्रिस्टल ब्लेड टेक्नोलॉजी विकसित की है. DRDO ने HAL (हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड) को कुल 60 क्रिस्टल ब्लेड भी दिए हैं. इन सिंगल-क्रिस्टल ब्लेड का उपयोग हेलीकॉप्टर इंजन में किया जाता है. इसे प्राप्त करने के लिए, जटिल ज्यामिति और आकार के साथ सिंगल-क्रिस्टल ब्लेड का उपयोग किया जाता है. वे निकल-बेस्ड सुपरअलॉय से निर्मित होते हैं जो ऑपरेशन के उच्च तापमान को सहने में सक्षम होते हैं. दुनिया भर में केवल कुछ ही देशों जैसे यूके, फ्रांस, यूएसए, रूस में ऐसे सिंगल क्रिस्टल (SX) पुरजों को डिजाइन और निर्माण करने की क्षमता है. भारत में वर्तमान में उपयोग किए जाने वाले दो कोरोना वायरस वैक्सीन, कोविशील्ड और कोवैक्सिन ने SARS-CoV-2 के B.1.617 वेरिएंट के खिलाफ अपनी प्रभावकारिता दिखाई है, जिसे इंडियन स्ट्रेन' या 'डबल म्यूटेंट' वैरिएंट भी कहा जाता है. कोवैक्सिन का निर्माण भारत बायोटेक द्वारा भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी के साथ साझेदारी में किया गया है. कोविशील्ड को सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया द्वारा विकसित किया गया है. भारत के स्वदेशी लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट, तेजस ने अपनी एयर-टू-एयर हथियारों की क्षमता में 5 वीं पीढ़ी के पायथन -5 एयर-टू-एयर मिसाइल (AAM) को जोड़ा है. पायथन -5 मिसाइल का पहला परीक्षण 27 अप्रैल 2021 को DRDO द्वारा किया गया था. इन परीक्षणों का उद्देश्य तेजस पर पहले से ही इंटीग्रेटेड डर्बी बियॉन्ड विजुअल रेंज (BVR) AAM की क्षमता को बढ़ाना है. इन मिसाइलों का परीक्षण गोवा में किया गया और इन मिशन परीक्षणों के सफल समापन ने बेहद चुनौतीपूर्ण परिदृश्यों के तहत इसके प्रदर्शन को मान्य साबित किया.


प्रधानमंत्री मोदी ने PM केयर्स फंड से 1 लाख पोर्टेबल ऑक्सीजन कंसंट्रेटर्स की खरीद की अनुमति दी है. इस फंड के तहत पहले से स्वीकृत 713 प्रेशर स्विंग एबॉर्शन - PSA प्लांट्स के अतिरिक्त, 500 नवीनतम PSA ऑक्सीजन प्लांट्स की खरीद के लिए भी अनुमति दी गई है. प्रधानमंत्री मोदी ने एक ट्वीट के माध्यम से यह सूचित किया कि, 1 लाख पोर्टेबल ऑक्सीजन कंसंट्रेटर्स/ सांद्रक खरीदे जाएंगे, 500 से अधिक प्रेशर स्विंग एबॉर्शन प्लांट्स को PM-केयर्स फंड से मंजूरी दी गई है. उन्होंने आगे यह भी कहा कि, इससे जिला मुख्यालय और टियर -2 शहरों में ऑक्सीजन की पहुंच में, विशेष रूप से सुधार होगा.


रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने हेलीकॉप्टर इंजन अनुप्रयोग के लिए अपने स्वदेशी हेलीकाप्टर विकास कार्यक्रम के एक हिस्से के तौर पर एक सिंगल क्रिस्टल ब्लेड टेक्नोलॉजी विकसित की है. DRDO ने HAL (हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड) को कुल 60 क्रिस्टल ब्लेड भी दिए हैं. इन सिंगल-क्रिस्टल ब्लेड का उपयोग हेलीकॉप्टर इंजन में किया जाता है. रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह एक कार्यक्रम का हिस्सा है जोकि रक्षा धातुकर्म अनुसंधान प्रयोगशाला- DMRL द्वारा शुरू किया गया है. यह DRDO की एक प्रीमियम प्रयोगशाला है जो सिंगल-क्रिस्टल हाई-प्रेशर टरबाइन - HPT ब्लेड के 5 सेट (कुल 300) विकसित करेगी. इन्हें निकल-बेस्ड सुपरअलॉय के उपयोग के साथ विकसित किया जाएगा.



रक्षा मंत्रालय ने यह भी बताया कि, शेष 4 सेटों की आपूर्ति नियत समय पर पूरी की जाएगी. केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने DRDO, HAL सहित इस महत्वपूर्ण तकनीक के विकास में शामिल उद्योग को बधाई भी दी. क्रिस्टल ब्लेड का विकास DRDL ने अपनी विशेषज्ञता के आधार पर किया था, जिसे तब प्राप्त किया गया था जब कुछ समय पहले ही एयरो-इंजन परियोजना के लिए ऐसी तकनीक विकसित की जा रही थी. डिफेंस मैटलर्जिकल रिसर्च लेबोरेटरी में इस ब्लेड को तैयार करने के लिए पूर्ण वैक्यूम निवेश कास्टिंग प्रक्रिया स्थापित की गई है. रक्षा मंत्रालय के अनुसार, मजबूत सिरेमिक मोल्ड बनाने के लिए एक विशेष सिरेमिक संरचना विकसित की जानी थी. यह महत्वपूर्ण था कि इस संरचना को कास्टिंग ऑपरेशन के दौरान तरल CMSX-4 मिश्र धातु के धातु दबाव के खिलाफ 1500 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक तापमान सहन करना होता है. DRDO के अनुसार, रणनीतिक और रक्षा अनुप्रयोगों में उपयोग किए जाने वाले हेलीकॉप्टरों को अत्यधिक प्रतिकूल परिस्थितियों में अपने विश्वसनीय संचालन के लिए शक्तिशाली और कॉम्पैक्ट एयरो इंजन की आवश्यकता होती है. इसे प्राप्त करने के लिए, जटिल ज्यामिति और आकार के साथ सिंगल-क्रिस्टल ब्लेड का उपयोग किया जाता है. वे निकल-बेस्ड सुपरअलॉय से निर्मित होते हैं जो ऑपरेशन के उच्च तापमान को सहने में सक्षम होते हैं. दुनिया भर में केवल कुछ ही देशों जैसे यूके, फ्रांस, यूएसए, रूस में ऐसे सिंगल क्रिस्टल (SX) पुरजों को डिजाइन और निर्माण करने की क्षमता है.

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