top of page

हिंदी समाचार 03.April 21

Updated: Apr 11, 2021

News from standard sources with thanks

दैनिक समसामयिकी


03 April 2020(Saturday)


UNTERNATIONAL


1.उत्पादन में कटौती को लेकर सऊदी अरब-भारत के बीच तनाव, तेल आयात अनुबंधों की समीक्षा करेगा भारत:-

• कच्चे तेल के उत्पादन में कटौती को लेकर सऊदी अरब के साथ तनाव के बीच भारत ने अपनी सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनियों से इस पश्चिम एशियाई देश से कच्चे तेल की खरीद के करार की समीक्षा करने को कहा है। सरकार ने इन कंपनियों से कहा है कि वे सऊदी अरब के साथ कच्चे तेल के आयात के अनुबंध में अनुकूल शर्तों के लिए वार्ता करें। एक शीर्ष अधिकारी ने यह जानकारी दी।

• कच्चे तेल के उत्पादकों के गठजोड़ को तोड़ने तथा कीमतों और अनुबंधों की शर्तों को अनुकूल करने के लिए सरकार ने इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी) और हिन्दुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लि. (एचपीसीएल) से कहा है कि वे पश्चिम एशिया के बाहर से कच्चे तेल की आपूर्ति पाने का प्रयास करें और सामूहिक रूप से अधिक अनुकूल शर्तों के लिए बातचीत करें।

• भारत अपनी कच्चे तेल की 85 प्रतिशत जरूरत आयात से पूरा करता है। वैश्विक स्तर पर आपूर्ति तथा कीमतों में उतार-चढ़ाव से भारत पर भी असर पड़ता है। फरवरी में कच्चे तेल के दाम फिर बढ़ने शुरू हुए थे।

• उस समय भारत ने सऊदी अरब से उत्पादन नियंत्रण पर अंकुश कुछ खोलने को कहा था, लेकिन उसने भारत के आग्रह को नजरअंदाज कर दिया था। उसी के बाद भारत अपनी आपूर्ति के विविधीकरण कर प्रयास कर रहा है।

खरीदारों के खिलाफ होती है अनुबंध की शर्तें

• अधिकारी ने कहा, 'परंपरागत रूप से सऊदी अरब और पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन (ओपेक) के उत्पादक हमारे प्रमुख आपूर्तिकर्ता है, लेकिन उनकी शर्तें सामान्य तौर पर खरीदारों के खिलाफ होती हैं। अधिकारी ने बताया कि भारतीय कंपनियां अपनी दो-तिहाई खरीद मियादी या निश्चित वार्षिक अनुबंध के आधार पर करती हैं।

• अधिकारी ने कहा कि इन करार में अनुबंधित मात्रा की आपूर्ति सुनिश्चित होती हैं, लेकिन कीमतें और अन्य शर्तें आपूर्तिकर्ता के पक्ष में झुकी होती हैं।

ओेपेक के फैसले की कीमत उपभोक्ता क्यों चुकाये

• अधिकारी ने कहा कि खरीदार को अनुबंधित मात्रा की पूरी खरीद करनी होती है, लेकिन ओपेक द्वारा कीमतों को बढ़ाने के लिए उत्पादन को कृत्रिम रूप से कम करने का फैसला किए जाने के बाद सऊदी अरब और अन्य उत्पादकों के पास आपूर्ति घटाने का विकल्प होता है।

• अधिकारी ने कहा, ''ओेपेक के फैसले की कीमत उपभोक्ता क्यों चुकाये? यदि हम उठाव के लिए प्रतिबद्ध हैं, तो उन्हें भी आपूर्ति पूरी करनी चाहिए, चाहे स्थिति कैसी भी हो। एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि खरीदार को किसी भी महीने वार्षिक अनुबंध में निर्धारित मात्रा में से जो तेल उठाना होता है उसकी सूचना कम से कम छह सप्ताह पहले देनी होती है जबकि खरीदार को उत्पादक द्वारा घोषित औसत आधिकारिक दर पर भुगतान करना पड़ता है।


2. भारतीय सेना बांग्लादेश में बहुराष्ट्रीय अभ्यास में भाग लेगी- अभ्यास शांतिर ओग्रोशेना-2021

• बांग्लादेश में वहां के 'राष्ट्रपिता' बंगबंधु शेख मुजीबुर्रहमान की जन्म शताब्दी के उपलक्ष्य में बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास शांतिर ओग्रोशेना 2021 (शांति का फ्रंट रनर) आयोजित किया जाएगा और यह बांग्लादेश की आज़ादी के शानदार 50 वर्ष पूरे होने का प्रतीक होगा ।

• भारतीय सेना की टुकड़ी में डोगरा रेजिमेंट की एक बटालियन के अधिकारी, जेसीओ और जवान शामिल हैं, जो दिनांक 4 अप्रैल से 12 अप्रैल 2021 तक रॉयल भूटान आर्मी, श्रीलंकाई सेना और बांग्लादेश सेना की टुकड़ी के साथ अभ्यास में भाग लेंगे ।

• अभ्यास का विषय "मजबूत पीसकीपिंग ऑपरेशंस" है । पूरे अभ्यास के दौरान अमेरिका, ब्रिटेन, तुर्की, सऊदी अरब, कुवैत और सिंगापुर के सैन्य पर्यवेक्षक भी उपस्थित रहेंगे ।


3. अमेरिका को टारगेट करके अपनी नौसेना को मजबूत कर रहा है चीन, जानें - US, रूस और चीन की नौसेना क्षमता

• अमेरिका और चीन के मध्यक बढ़ते तनाव के बीच बीजिंग अपनी सैन्य क्षमताओं में तेजी से इजाफा कर रहा है। अमेरिका को चुनौती देने के लिए वह लगातार लड़ाकू विमान से लेकर विशालकाय पनडुब्बियों के निर्माण में जुटा है।

• हाल में चीन अपनी एक नई पनडुब्बी बनाने में लगा है। यह पनडुब्बी काफी विशालकाय है। हालांकि, इस पनडुब्बीब के बारे में विस्तृहत जानकारी अभी नहीं है, लेकिन यह कयास लगाए जा रहे हैं कि अमेरिका को टारगेट करके चीन पनडुब्बी का विकास कर रहा है। गौरतलब है कि दक्षिण चीन सागर और हिंद प्रशांत क्षेत्र में पनडुब्बियों की काफी अहम भूमिका होती है।

• आइए जानते हैं कि जल सेना के मामले में अमेरिका और रूस की क्याह स्थिति है। चीन की नई पनडुब्बीज की काट में अमेरिका के पास कौन सी सक्षम पनडुब्बीत मौजूद है। क्याै है उसकी खासियत।

अमेरिका की ओहियो क्ला स की पनडुब्बीस से चीन को भय

• रक्षा वैज्ञानिकों की माने तो चीन के पास एक मजबूत और सक्षम नौ सेना है। चीनी नौसेना अत्याकधुनिक हथियारों से लैस भी है। इसके बल पर वह अमेरिका को भी चुनौती देता है। इस बात का अमेरिका को भी भान है। लेकिन परमाणु शक्ति से चलने वाली गाइडेड मिसाइल सबमरीन यूएसएस ओहियो दुनिया की सर्वश्रेष्ठ् हथियारों में से एक है। शीत युद्ध के दौरान इसका डंका बजता था।

• अमेरिका की ओहियो क्ला स की पनडुब्बीच अपने आकार और प्रहार में मामले में दुनिया में जानी जाती है। यह पनडुब्बी दुश्मकन के इलाके में प्रवेश कर सैनिकों और मिसाइलों से हमला करने में सक्षम है। इसके अलावा अमेरिकी नौसेना बेड़े में एंटी शिप मिसाइलों यूएसएस मिशिगन, यूएसएस फ्लोरिडा और यूएसएस जॉर्जिया शामिल हैं। अमेरिका की यह सभी पनडुब्बीू घातक एंटी मिसाइलों से लैस है।

• इन पनडुब्िएस यों में ऐसी तकनीक का प्रयोग किया गया है, जो दुश्मान के प्रहार से अपने को बचाने की स्थिति में है। ओहियो को ताकत देने के लिए इसमें एक परमाणु रिएक्टसर को लगाया गया है। इसके जरिए पनडुब्बीओ में दो टर्बाइनों को ऊर्जा मिलती है। ओहियो में 154 टॉमहॉक क्रूज मिसाइलें तैनात होती हैं। प्रत्ये क टॉमहॉक मिसाइल अपने साथ एक हजार किग्रा तक के वॉरहेड ले जाने में सक्षम हैं। अमेरिकी सेना ने इसका इस्तेकमाल सीरिया लीबिया, ईराक और अफगानिस्ता न में सफलतापूर्णक किया है।

• चीन की तुलना में अमेरिकी नौसेना के के पास अधिक क्षमता वाले कई घातक गाइडेड मिसाइल ड्रिस्ट्रॉयर और क्रूजर हैं, जो पल भर में भीषण तबाही मचा सकते हैं। ये युद्धपोत अमेरिका के क्रूज मिसाइल लॉन्च करने की क्षमता को कई गुना बढ़ाते हैं। उसके पास अपने युद्धपोतों से लॉन्च किए जाने वाले 9000 से अधिक वर्टिकल लॉन्च मिसाइल सेल्स मौजूद हैं, जबकि चीन के पास यह क्षमता केवल 1000 के आसपास है। ऐसे में मिसाइलों के मामले में चीन कहीं भी अमेरिका को टक्कर नहीं दे सकता है।

चीन के पास दुनिया की सबसे बड़ी नौसेना

• चीन ने अमेरिका को टक्कबर देने के लिए दुनिया की सबसे बड़ी नौसेना का निर्माण कर लिया है। मौजूदा समय में चीनी नौसेना के पास अमेरिका से अधिक पनडुब्बियां और युद्धपोत हैं। चीन की 62 में से सात पनडुब्बियां परमाणु शक्ति से संचालित होती हैं। चीन को पारंपरिक ईंधन के रूप में भी उसे अब ज्यादा खर्च नहीं करना पड़ रहा है।

• यह तकनीक अमेरिका के पास भी है। चीनी राष्ट्र पति ने शी चिनफ‍िंग वर्ष 2015 में शिपयार्ड और प्रौद्योगिकी में निवेश का आदेश जारी किया था। उन्होंरने कहा था कि हमें एक शक्तिशाली नौसेना के निर्माण की जरूरत महसूस हो रही है। चीन ने वर्ष 2015 में चीनी नौसेना ने अपनी ताकत को अमेरिकी नौसेना के बराबर करने के लिए एक व्यापक अभियान चलाया था।

• पीएलए को विश्व-स्तरीय फाइटिंग फोर्स में बदलने के काम आज भी उसी तेजी से जारी है। सुप्रीम कमांडर का आदेश पाने के बाद से ही चीनी नौसेना ने पिछले 5-6 साल में अपनी ताकत को कई गुना बढ़ा लिया है। यह अमेरिका के लिए बेहद चिंता का व‍िषय है।

रूस के पास भी थी सक्षम पनडुब्बीे


• पनडुब्बियों के मामले में रूस की नौसेना भी पीछे नहीं है। दुनिया की सबसे विशालकाय पनडुब्बी रूसी नौसेना के पास है। रूस की टाइफून क्लाीस दुनिया की विशाल पनडुब्बियों में से एक है। यह पनडुब्बीे बैलिस्टिक मिसाइल से लैस है।

• यह किसी भी देश की नौसेना को मात देने में पूरी तरह से सक्षम है। हालांकि, मौजूदा समय में रूस के पास कितनी बैलिस्टिक मिसाइलें ऑपरेशनल हैं, इसका अंदाजा नहीं है। शीत युद्ध के समय अमेरिका भी इन पनडब्ििस्यों से घबराता था।

• अब हालत बदल चुके हैं। शीत युद्ध के बाद टाइफून की मिसाइलें एक्संपायर हो गई हैं। शीत युद्ध के खात्मेल के साथ रूस ने यह फैसला लिया था कि इस पर वह अपना पैसा नहीं बर्बाद करेगा। टाइफून का काम खत्म हो गया। टाइफून और मिसाइलों का बेहतर वर्जन लाने का प्लाेन रूस ने छोड़ दिया।


Source of the News (With Regards):- compile by Dr Sanjan,Dainik Jagran(Rashtriya Sanskaran),Dainik Bhaskar(Rashtriya Sanskaran), Rashtriya Sahara(Rashtriya Sanskaran) Hindustan dainik(Delhi), Nai Duniya, Hindustan Times, The Hindu, BBC Portal, The Economic Times(Hindi& English)

51 views1 comment

Recent Posts

See All
bottom of page