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विज्ञान समाचार -अंग प्रतिरोपण

हम जीव विज्ञान की सदी में रह रहे हैं. यह काफी पहले ही घोषित किया जा चुका है कि अगर बीसवीं सदी भौतिक विज्ञान की सदी थी तो इक्कीसवीं सदी जीव विज्ञान की सदी होगी. पिछले कुछ वर्षों में जीव विज्ञान में चमत्कारिक अनुसंधान तेज़ी से बढ़े हैं. इस दिशा में हैरान कर देने वाली हालिया खबर है- शोधकर्ताओं की एक अंतरराष्ट्रीय टीम द्वारा एक बंदर के भ्रूण में इंसानी स्टेम सेल की रोपाई से मानव-वानर काइमेरा प्राणी तैयार करने में सफलता. रिसर्च टीम के नेतृत्वकर्ता प्रोफेसर जुआन कार्लोस बेलीमोंटे के मुताबिक यह शोध भविष्य में इंसानों में प्रत्यारोपण (ट्रांसप्लांट) के लिए वैकल्पिक अंग विकसित करने में बेहद मददगार साबित हो सकती है.


मानव जीवन तरह-तरह के चुनौतियों से भरा हुआ है. किसी व्यक्ति के समक्ष संभवत: सबसे बड़ी और कठिन चुनौती होती है- उसका अपने शरीर के किसी खास अंग को खोना. लेकिन तमाम उम्मीदें यहीं नहीं खत्म होतीं. विज्ञान और प्रौद्योगिकी की बदौलत लैब में विकसित कृत्रिम अंगों या अंगदान किए गए अंगों से इन चुनौतियों पर विजय पाई जा सकती है. अंगदान एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसके तहत एक मृत या जीवित व्यक्ति के स्वस्थ अंगों (हार्ट, लीवर, किडनी, इंटेस्टाइन, फेफड़े अदि) और ऊतकों (टिश्यूज़) को निकाल लिया जाता है और फिर इन अंगों को किसी दूसरे जरूरतमंद शख्स में प्रत्यारोपित कर दिया जाता है.


एक अध्ययन के मुताबिक, भारत में किसी भी समय किसी व्यक्ति के अंग के खराब हो जाने की वजह से प्रति वर्ष कम से कम लगभग पांच लाख व्यक्तियों की मृत्यु अंगों की अनुपलब्धता के कारण हो जाती है. अंगदान करने वालों की कमी का हल ढूंढने के लिए वैज्ञानिक रिजेनरेटिव मेडिसिन या पुनर्योजी चिकित्सा के तहत लैब में शरीर के अंगों को विकसित करने की कवायद में जुटे हुए हैं. सुनने में यह जरूर विज्ञान की काल्पनिक कथा जैसी लग सकती है लेकिन यह हकीकत है कि आज वैज्ञानिक प्रयोगशाला में अंग-निर्माण की कल्पना को साकार करने में जुटे हुए हैं.

विज्ञान विश्व से साभार


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